इस जगह वैज्ञानिकों ने 12000 साल पुराने मानव पैरों के निशान खोज लिये, कुछ अनोखी बातें पता चलीं

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Human footprint Utah
Archaeologists Find 12,000-Year-Old Human Footprints in Utah. 88 individual footprints were were discovered on a remote desert.

Delhi: मानव इतिहास एक ऐसा इतिहास है, जिसके बारे मे हमने बचपन से ही अपनी किताबों मे पढ़ा है। बंदरों को पूर्वज मानकर हमारी किताबों में उनके विषय में सारा इतिहास बतया गया हे। मानव इतिहास को जानना बहुत ही जटिल विषय है। लेकिन इसको जानने में रूचि हमारे साइंटिस्ट्स को बहुत अधिक है। अभी भी खोज करके तमाम थ्योरी को सही ठहराने की कोशिशें होती रहती है। मानव जीवन का इतिहास रोचकताओं से परिपूर्ण भी है।

साइंटिस्ट्स को मिले 12000 साल पुराने मानव फुटप्रिंट्स

मानव की उत्पत्ति के विषय में विभिन्न प्रकार की थ्योरियां चलती हैं। हर साइंटिस्ट्स अलग अलग थ्योरी का समर्थन करता है। कोई किसी का विरोध कर्ता है, तो कोई किसी थ्योरी के समर्थन में खड़ा रहता हे।

अभी हाल ही में अमेरिका में यूटा (Utah) के पुरातत्ववेदों को लगभग बारह हज़ार साल पुराने ऐसे पैरों के निशान (12000 Year Old Human Footprints) प्राप्त हुए है। जिसे देख कर दावा किया जा रहा है कि यह फुट प्रिंट बच्चों के हैं।

फुटप्रिंट्स बेसबॉन साईट पर हुए अपलोड

आपको बता दे कि इस खोज में साइंटिस्ट्स (Scientists) को अट्ठासी इंसान के फुटप्रिंट्स मिले हैं। इसके बारे मे वैज्ञानिकों का दावा है, कि इन पैरों के मिले निशानों से हमारे पूर्वज किस तरह के रहे होंगे, कैसा उनका जीवन था। इसका अनुमान लगा सकते है।

ऐसा कहा जा रहा है कि इन फूटप्रिंट की सहायता से पहले के मानव जनजीवन की एक झलक देखने को मिल पाएगी। आपको जानकारी के लिए बता दें, कि इन फुटप्रिंट्स को साइंटिस्ट्स द्वारा बेसबॉन साइट पर अपलोड किया गया है।

डॉक्टर डय़ूक ने किया नया दावा

इन फुट प्रिंट को एंथ्रोपॉलजिकल रिसर्च में प्रिंसिपल के पद पर कार्य करने वाले डॉक्टर ड्यूक की टीम द्वारा खोजा गया है। डॉक्टर ड्यूक का दावा है कि यह जो फुटप्रिंट इन्हें मिले है। इसकी मदद से यह अनुमान लगा सकते हैं, कि आज से कई हजारों साल पहले हम मानव का जीवन किस तरह से यापन होता था। डॉक्टर ड्यूक के मुताबिक यह 88 फुटप्रिंट ज्यादातर 5 वर्ष से 12 वर्ष तक के बच्चों के है।

डॉक्टर डय़ूक के मुताबिक जिन पैरों के निशान पाए गए हैं। भले ही आज उनमें मिट्टी भर गई है। लेकिन जब उसे अच्छे से साफ करके देखा तो यह पता लगा कि यह तो पैरों के निशान है। डॉक्टर ड्यूक कहते हैं कि कई सालों बाद भी पेरो के यह निशान जैसे के वैसे बने हुए हैं।

एसा दावा है, कि अब इन निशानों की पुष्टि के लिए उस स्थान में रहने वाले स्थानीय लोगों से सहायता ली जा रही है। ऐसा माना जा रहा है कि शायद ऐसा हो सकता है की यहां पर स्थानीय लोग कभी आए हो। लेकिन डॉक्टर डय़ूक की टीम का कहना है कि यह बात असंभव प्रतीत होती है। क्योंकि इस तरह का इलाक़ा जहां ज्यादातर हिस्सा पूरा रेगिस्तान है, पानी जैसी सुविधाएं जहां मौजूद नहीं है। वहा इंसानो के पहुचना बहुत ही मुश्किल है।

वैज्ञानिकों द्वारा सर्वे अभी भी किया जा रहा

इन फुटप्रिंट के मिल जाने के बाद से वैज्ञानिकों ने अपनी खोज और भी अधिक तेज कर दी है। सभी साइंटिस्ट्स लगातार इन इलाकों में खोज करते जा रहे हैं। अमेरिकी वायुसेना इसके साथ ही वैज्ञानिक लगातार जिस इलाके में पेरो के निसान मिले है। वहाँ खोज करने के लिए नए नए आयाम स्थापित करते जा रहे हैं।

आपको बता दे कि अब से इस खोज के लिए कार्नेल यूनिवर्सिटी के भी साइंटिस्ट्स को बुलाया जा रहा है। ताकि जल्द ही इससे रिलेटेड आगे कुछ नई रिसर्च मिलती है, तो यह कड़ियां ही मानव इतिहास को अच्छे से समझने में अहम साबित हो पाएंगी।

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