
Presentation Image Credits: Pixabay
Delhi: हमारे घर पृथ्वी के अलावा भी क्या कही और जीवन हो सकता है या अभी भी मौजूद है। इसकी खोज लगातार हो रही है और अब एक अन्न गृह पर जीवन होने के संकेत मिले है। मंगल ग्रह पर जीवन तलाश रहे लोगो के लिए एक सुकून देने वाली खबर है। हाल ही में वैज्ञानिकों को पता चला है कि मार्स (Mars) पर मौजूद गेल क्रेटर (Gale Crater) पर लगभग 4 अरब साल पहले भयानक बाढ़ (Megaflood) आई थी।
वैज्ञानिकों को यह हालिया जानकारी नासा (NASA) के क्यूरियोसिटी रोवर के डेटा के अध्ययन के बाद प्राप्त हुई है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, उल्कापिंड की वजह से हुई गर्मी इस बाढ़ का कारण बनी थी। यह संयुक्त प्रोजेक्ट जेक्सन स्टेट यूनिवर्सिटी, कॉर्नेल यूनिवर्सिटी, द जेट प्रोपल्शन लैबोरेट्री और हवाई यूनिवर्सिटी ने मिलकर किया था।
बता दे की हल भी में नेचर साइंटिफिक रिपोर्टर्स जर्नल में प्रकाशित स्टडी की प्राप्तियों से पता चला है कि यह भीषण बाढ़ उल्कापिंड की वजह से हुए गर्म प्रभाव के कारण पिघले बर्फीले जलाशयों से आई थी। इस बाढ़ का असर इतना गंभीर था कि विशाल लहरों ने मंगल की सतह पर निशान छोड़ दिए हैं। यह पृथ्वी की सतह पर पड़ने वाले निशानों की तरह हैं। यह निशान अरबों सालों के बाद भी जस के तस बने हुए हैं।
विदेशी मीडिया में बताया गया की इस स्टडी की मुख्य लेखक एजात हैदरी के अनुसार, यह विशालकाय लहरें करीब 9.1 मीटर ऊंची और एक-दूसरे से 137.1 मीटर दूर थीं। उन्होंने बताया कि इससे बनने वाला आकार धरती पर 20 लाख साल पहले बर्फ पिघलने के बाद बने आकार से मेल खाता है।
इस स्टडी के सह लेखक एलबर्टो जी फैरन ने एक बयान में कहा कि उन्होंने क्यूरियोसिटी रोवर से मिले विस्तृत सेडिमेंटोलॉजिकल डेटा का अध्ययन कर पहली बार भीषण बाढ़ को पहचाना है। इससे पहले बाढ़ से पीछे बचे डिपॉजिट्स को कभी पहचाना नहीं जा सका।
मंगल गृह के प्रारंभिक जीवन में ग्रह पर मौजूद जमे हुए जलाशयों से कार्बन डाईऑक्साइड और मीथेन निकलने लगी होंगी. इसके बाद ग्रह पर हालात गर्म और गीले हो गए होंगे। इसके बाद कंडेंसेशन की वजह से जरूर भाप के बादल बने होंगे, जिनसे ग्रह के बड़े इलाके में बारिश हुई होगी।
इसके बाद यह पानी गेल क्रेटर में पहुंचा और पहले से ही बह रहे पानी के साथ मिल गया होगा और नतीजतन यह भयंकर बाढ़ में बदल गई। क्यूरियोसिटी पहले ही इस बात को साबित कर चुका है कि मंगल पर कभी झील और नहरें होने के दावे सच थे। यही बात मंगल पर जीवन के होने का संकेत बहुत प्रबल कर देती है।



