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Delhi: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में अवैध निवासियों के मामले पर वार्तालाप की है। बातचीत के वक्त उन्होंने बोल कि देश के हर कोने में बसे सभी अवैध निवासियों और घुसपैठियों के रूप में निवास कर रहे आतंकवाद की पहचान करेंगे और उन्हें अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत बाहर करेंगे। उच्च सदन में बातचीत के वक्त उन्होंने कहा है कि हम देश के हर कोने से अवैध निवासी कर रहे लोगो की पहचान कर के उन्हें देश से बाहर निकल फेकेंगे।
असम में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस को एडिट करने की प्रतिक्रिया पूरी होने के बाद अब उसका निकटतम राज्य नगालैंड ने भी इस प्रकार की लिस्ट एडिट करने जा रहा है। अवैध रूप से निवास कर रहे नागरिकों की पहचान करने के लिए इसकी प्रकिया को हरी झंडी मिल गई है।
गलत तरह से और फ़र्ज़ी प्रमाणपत्र की परेशानी को सोल्व करने के लिए नगालैंड सरकार ने रजिस्टर ऑफ इंडिजिनियस इनहैबिटेंट्स ऑफ नगालैंड स्थापित करने का ऐलान किया है।
आपको बना दें की अवैध रूप से निवास कर रहे नागरिकों के अगेंस्ट 1980 के दशक में 6 साल लंबे आंदोलन की प्रकिया कर चुके अखिल असम छात्र संघ ने 3 जुलाई को आरोप लगाया कि कुछ घुसपैठ के स्पोर्ट्स साथी राष्ट्रीय नागरिक पंजी को बाधित करने के लिए जारी प्रणाली को तोड़ने का हर सम्भव प्रयास कर रहे है। AASU के प्रमुख्य सलाहकार समुज्जल भट्टाचार्य ने पुष्टि कि हैं। मोजूदा समय के दौरान असम के कई भागो में फर्जी दस्तावेज पाए गए थे।
Union Home Minister Amit Shah in Rajya Sabha: We will identify all the illegal immigrants and infiltrators living on every inch of this country and deport them as per the international law. pic.twitter.com/IqSYQMcqK1
— ANI (@ANI) July 17, 2019
इसमें कहा गया की आखिरी NCR list में अवैध नागरिकों को सम्लित करने के प्रयास जारी हैं। उन्होंने PTI भाषा को कहा है कि ‘‘हमें खबर मिली है कि अवैध नागरिकों को स्पॉट करने वाली कुछ ताकतें NCR प्रक्रिया को छति पहुचने का काम कर रही है। और उसमें विलम्ब हो इसके लिए भी सम्भव प्रयास कर रही हैं।’’
AASU ने यह आरोप आखरी NCR के प्रकाशन के करीब एक महीने पूर्व ही लगाया है। NRC का आखरी मसौदा 30 जुलाई, 2018 को पारित किया गया था, जिसमें 3.29 करोड़ के कुल आवेदनों में से 2.9 करोड़ लोगों के नाम ही सम्लित थे। ये अनुमान लगाया गया है कि लगभग 40.7 लाख नागरिक का नाम इस सूची से बाहर है।



