सचिन पायलट को ‘सिंधिया’ बनने से ऐसे रोक रही कांग्रेस, कांग्रेस का राजनैतिक ड्रामा पार्ट 2

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Jaipur/Rajasthan: कांग्रेस में इस वक़्त राजनैतिक ड्रामा पार्ट 2 चल रहा है। मध्यप्रदेश के बाद अब राजस्थान में कांग्रेस पार्टी के दो बड़े नेताओं के बीच तू तू मै मै की खबरें सामने आ रही हैं। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच काफी चीज़े ठीक नहीं है। दोनों की नेताओं के बीच हो रहा मामला अब दिल्ली तक पहुंच गया है। डिप्टी सीएम सचिन पायलट दिल्ली पहुंच चुके हैं।

मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक, सचिन पायलट का समर्थन करने वाले 15-20 विधायक भी उनके साथ दिल्ली आए हैं। कांग्रेस आलाकमान सोनिया गांधी से उनकी मुलाकात करने के मकसद से कभी दिल्ली में है। इससे पहले अशोक गहलोत ने शनिवार को बीजेपी पर सरकार अस्थिर करने का आरोप लगया था।

मुख्यमंत्री गेहलोत ने अपने विधायकों को समर्थन पत्र लिखने के लिए कहा है, जबकि उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट अपने समर्थकों के साथ दिल्ली पहुंचे हुए हैं। राजनीतिक जानकरों के अनुसार, राजस्थान में कांग्रेस पार्टी के भीतर टकराव बढ़ गया है, क्योंकि सीएम और डिप्टी सीएम दोनों अपनी-अपनी पावर दिखाने में एक दूसरे से कम्पटीशन कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस और निर्दलीय विधायकों को प्रलोभन देने और उनकी सरकार को अस्थिर करने का प्रयास की है। शनिवार शाम को गहलोत ने अपने आवास पर कई मंत्रियों और विधायकों से मुलाकात की और उन्हें समर्थन पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा।

अब सचिन के बगावती तेवर देखने के बाद खबर आ रही है की राजस्थान में सत्ता का संघर्ष ग़ज़ब मोड़ पे आ गया है। निरोधी दस्ते और SOG की तरफ़ से उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट को पूछताछ के लिए नोटिस भेजा गया है। इस नोटिस को कांग्रेस की राजनीती से जोड़कर देखा जा रहा है। इस खबर को जाने माने पत्रकार रोहित सरदाना ने ट्वीट किया है।

अब बताया जा रहा है कि कांग्रेस विधायक नए सिरे से सीएम अशोक गहलोत को समर्थन पत्र सौंपेंगे। बदलते घटनाक्रम के बीच शनिवार को तीन निर्दलीय विधायकों की एसोसिएट सदस्यता रद्द कर दी गई है। शुक्रवार देर रात से ही उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और राजस्थान सरकार के करीब 15 मंत्री दिल्ली में हैं।

शनिवार देर शाम खबर आई थी कि पीआर मीणा, राजेंद्र बिधूड़ी, दानिश अबरार, चेतन डूडी सहित करीब 17 कांग्रेस विधायकों को हरियाणा के मेवात स्थित आईटीसी भारत होटल में बाड़ेबंदी की गई, लेकिन यह खबर अब अफवाह साबित हो रही है। कांग्रेस नेता अविनाश पांडेय ने कहा है कि यह खबर सरासर गलत है। अब सचिन पायलट कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने मुलालात क़र सकते है।

इन सारे राजनीतिक घटनाक्रम के बीच लोग जानना चाहते हैं कि आखिर राजस्थान कांग्रेस में किस बात की जंग चल रही है। पार्टी के अंदर किस वजह से उठा पठक चल रही है। क्या सचिन पायलट मध्य प्रदेश के ज्योतरादित्य सिंधिया की तरह कांग्रेस से अलग होकर भाजपा में चले जाएंगे और राजस्थान में एक बार फिर भाजपा की सरकार बन जाएगी। इन सवालों का जवाब इस पूरे लेख में ही आपजो मिल जायेगा।

सचिन पायलट लगभग 7 साल से राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हैं। उनके समर्थक चाहते हैं कि यह पद पायलट के पास ही बना रहे, जबकि कांग्रेस मांग कर रही है कि राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष बदला जाए। प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए ब्राह्मण कोटे से रघु शर्मा, महेश जोशी और जाटों से लालचंद कटारिया, ज्योति मिर्धा का नाम आगे किया जा रहा है। एक रिपोर्ट में बराय गया है की रघुवीर मीणा का भी नाम प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए लिया जा रहा है। इसपर अंतिम निर्णय कांग्रेस आलाकमान सोनिया गांधी को हो करना है।

राजनैतिक जानकारीं का मानना है की बिहार में प्रदेश अध्यक्ष का ऐलान होने के साथ ही साथ कांग्रेस राजस्थान में पार्टी के नए प्रदेश अध्यक्ष का ऐलान कर सकती है। इस पर अभी तक कोई पुष्टि नहीं है। जानकार बताते है की बताते हैं कि सचिन पायलट किसी भी हाल में इस पद पर आगे भी बने रहना चाहते हैं। हालिया राजनीतिक हालात में सचिन पायलट राज्य में पार्टी की कमान अपने पास ही रखना चाहते हैं।

आपको बता दे की मध्य प्रदेश और राजस्थान के अभी के राजनीतिक हालात बिलकुल अलग हैं। मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया उस बात से खफा थे की उन्हें कोई पद या अधिकार नहीं दिए गए थे। परन्तु राजस्थान में अशोक गहलोत ने कमलनाथ वाली मिस्टेक नहीं की है। मध्य प्रदेश में कमलनाथ सीएम के साथ प्रदेश अध्यक्ष पद पर भी कवीज़ थे।

दूसरी तरफ अशोक गहलोत ने सचिन पायलट को अपनी कैबिनेट में उपमुख्यमंत्री का पद पहले से ही दे रखा है। अगर सचिन पायलट प्रदेश अध्यक्ष पद पर भी बने आगे भी बने रहते है, तो कांग्रेस का यह राजनैतिक ड्रामा पार्ट 2 यही समाप्त हो जायेगा। यदि पायलट को यह पद नहीं हासिल हुआ तो वे अमित शाह के साथ देखे दे सकते है। परन्तु कांग्रेस सचिन पायलट को अमित शाह की झोली में कांग्रेस के 15 से ज्यादा विधायक नहीं डालने देगी और सचिन को रोकने के लिए मनमाँगा पद दे सकती है।

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