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Delhi: आज हिजबुल का आखिरी बड़ा कमांडर रियाज नायकू धराशाही कर दिया गया है। रियाज नायकू पर यह कार्यवाही भारतीय सुरक्षा बलों के लिए कितनी बड़ी कामयाबी है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रियाज मोस्ट-वांटेड लिस्ट में था। जिसकी तलाश पिछले 3 साल से हो रही थी। रियाज नायकू के सिर पर 12 लाख रुपये का इनाम था।
रियाज नायकू भी बुरहान वानी की उस ब्रिगेट का हिस्सा था। कश्मीर में नए लड़के तैयार करने और उन्हें हिजबुल संगठन में भर्ती करवाने में यह लगा हुआ था। कश्मीर में पिछले कुछ वर्षं में सुरक्षाबलों जिन जिन घटनाओ को अंजाम दिया गया, उनकी प्लानिंग रियाज नायकू ने ही की थी। आपको बता दें की 2016 में बुरहान वानी के बाद उसकी गैंग पिछले साल का सफाया हो गया था। इसके बाद रियाज नायकू ने हिजबुल में नई भर्ती की थी, लेकिन आज रियाज नायकू के दी एन्ड के बाद इस गैंग का भी समापन हो गया है।
भारतीय सुरक्षाबलों ने बहुत मुश्किल मिशन को सफल बनाया
रियाज नायकू को आज पुलवामा में उसके गांव में ही सुरक्षाबलों ने धराशाही के दिया है। ये बहुत मुश्किल मिशन था। क्योंकि रियाज नायकू का पक्का नेटवर्क था, जिससे उसे सुरक्षाबलों की हर गतिविधि की जानकारी पहले से ही लग जाती थी। इसलिए इतने साल से बच जाता था। सुरक्षाबल और जम्मू कश्मीर पुलिस के जवान उसके निशाने पर थे।
रियाज नायकू की समाप्ति के बाद सेना ने कश्मीर में हिजबुल को लगभग समाप्त कर दिया है। अब कश्मीर में नए दहशतगर्दों की भर्ती में कमी आएगी और इससे सेना को अधिक सफलता मिलेगी। आज बुरहान वानी से लेकर रियाज नायकू को धराशाही किये जाने से घाटी से आतंक मिटेगा। जानकारी मिली है की रियाज नायकू का शव परिवार वालों को नहीं सौंपा जाएगा। सारी कार्यवाही पूरी करने के बाद प्रशासन ही उसका अंतिम संस्कार करेगा। यह एक बड़ा फैसला है, जिसके चलते दहशतगर्द को हीरो बनाने का ड्रामा बंद हो सके।
सुरक्षाबलों को मिली थी खुफिया जानकारी
जानकारी के अनुसार एक बार त्राल में रियाज नायकू सुरक्षाबलों द्वारा घिर जाने के बाद भी सुरंग बनाकर निकला था। इसलिए इस बार सुरक्षा बल कोई चूक नहीं होने देना चाहते थे। इस ऑपरेशन को सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर के बड़े अधिकारी मॉनीटर कर रहे थे। सुरक्षाबलों को रियाज नायकू के बारे में जानकारी मिली कि वो बेगपुरा के अपने गांव में अपनी मां से मिलने के लिए आ सकता है।
रियाज नायकू को ठेर किये जाने की पूरी कहानी
मंगलवार की शाम को नायकू की स्थिति के बारे में सुरक्षा एजेंसियों को पता चल गया कि वो अपने गांव में ही है। उसके बाद सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को घेर लिया। परन्तु बहुत खोजने के बाद भी रियाज नायकू नहीं मिला और सुरक्षाबलों ने उस जाने की तैयारी शुरू की। फिर अचानक सुरक्षाबलों के मुखबिर ने सुचना दी कि नायकू गांव में ही छिपा है। इसके बाद सुरक्षा बलों ने फिर से सर्च ऑपरेशन शुरू किया।
फिर लगभग एक से डेढ़ किलोमीटर के गांव के घर खाली करवाए गए और वहां रहने वाले लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। सुरक्षा बलों को अंदेशा था कि कहीं इस बार भी नायकू किसी सुरंग का इस्तेमाल करके भाग जाने की फिराक में होगा। इसलिए तीन JCB मशीनें मंगवाई गई और रात भर इस इलाके में अलग अलग स्थानों पर सुरंग को खोजने के लिए खुदाई की गई।
पूरी रात के बाद सुबह सुरक्षा बल के जवान वहां पहुँच गए, जहां नायकू छुपा था। सुरक्षा बल के जवानों के पास आते ही रियाज नायकू और उसके गुर्गे हरकत में आ गए। सुरक्षाबलों ने इसके बाद उस घर को ही ध्वस्त कर दिया। परन्तु रियाज नायकू बचकर दूसरे घर में छुप गया। फिर यही पर सुरक्षा बल के जवानों ने नायकू और उसके साथी को धराशाही कर दिया।



