
Jind: प्रतिवर्ष यूपीएससी की परीक्षा (UPSC Exam) पूरे भारत स्तर पर आयोजित होती है, जिसमें लाखों उम्मीदवार प्रतिवर्ष शामिल होते हैं। कुछ उम्मीदवार पहली बार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, तो कुछ 4 से 5 बार इस परीक्षा को देकर अनुभव प्राप्त कर लेते हैं।
यूपीएससी की परीक्षा भारत की सबसे कठिन परीक्षा में से एक है, इसीलिए हर वर्ष लाखों उम्मीदवार परीक्षा में शामिल जरूर होते हैं, परंतु उनमें से मात्र चुनिंदा लोग ही इस परीक्षा को पास कर पाते हैं। यूपीएससी की परीक्षा त्याग और समर्पण की कामयाबी है।
इस परीक्षा के उम्मीदवार सोशल मीडिया के साथ-साथ परिवार से भी कोसों दूर हो जाते हैं। उसके बाद वह दिन रात अपने कंफर्ट जोन को छोड़कर पढ़ाई करते हैं, उनकी यह सफलता त्याग और समर्पण का फल होता है। इस परीक्षा में निरंतर प्रयास करने की जरूरत होती है।

यदि कोई भी उम्मीदवार इस परीक्षा असफल होने के बाद यदि दोबारा प्रयास नहीं कर सकता, तो उसका इस परीक्षा के लिए तैयार होना या पास करना बेहद मुश्किल होता। आज इस लेख के माध्यम से हम आपको एक ऐसी युवती की सफलता के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसने अपने अथक प्रयास से अपने राज्य का मान बढ़ाया।
हरियाणा की अंकिता पवार बनी सिविल सेवक
हरियाणा (Haryana) राज्य के अंतर्गत आने वाले जींद जिले के जुलाना क्षेत्र के पास स्थित गोसाई खेड़ा गांव की रहने वाली अंकिता पवार (Ankita Panwar) ने 28 वी रैंक हासिल करके यूपीएससी की परीक्षा (28th rank in UPSC Exam) में अपना स्थान बनाया है। आपको बता दें की अंकिता यूपीएससी की तैयारी शुरू करने से पहले 22 लाख रुपए की नौकरी किया करती थी, जिसे उन्होंने छोड़कर सिविल सेवा परीक्षा को अपना लक्ष्य बनाया।
अंकिता किस कामयाबी के बाद उनका परिवार काफी ज्यादा खुश है और उनके घर अंकिता को बधाई देने आने वालों की भीड़ लगी हुई है। पूरा गांव अंकिता की सफलता के लिए जश्न मना रहा है।
इसी बीच अंकिता के पिता भूप सिंह पवार का कहना है कि उनकी बेटी अंकिता बचपन से ही चाहती थी कि वह अपने जीवन में कुछ ऐसा कर सके, जिससे आम जनता की सेवा हो और देश को विकास की तरफ ले जा सके। उन्हें जनता की सेवा करने का मौका यूपीएससी ने दिया है।
शिक्षा की शुरुआत
अंकिता के पिता का कहना है कि उनके बच्चे काफी होनहार है। अंकिता दो बहन और एक भाई हैं जिनमें से एक बहन उनकी मुंबई में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की मैनेजर हैं और उनका भाई सॉफ्टवेयर इंजीनियर है जो एक बड़ी कंपनी में अच्छे पैकेज पर काम कर रहा है।
अब अंकिता आईएएस पद (IAS Post) के लिए चुनी गई हैं। अंकिता के पिता साइंस एंड टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट से रिटायर हो चुके हैं और उनकी माता घर चलाती हैं। एक इंटरव्यू के दौरान अंकिता के पिता कहते हैं कि अंकिता बचपन से ही काफी होनहार रही हैं।
उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा चंडीगढ़ से ही की। कक्षा बारहवीं तक उन्होंने चंडीगढ़ में पढ़ाई की बताया जा रहा है कि सीबीएससी से उन्होंने 97.5 प्रतिशत अंक हासिल किए थे कक्षा 12वीं में, इसी के साथ उन्होंने पूरा जिला टॉप किया था।
आईआईटी रुड़की से किया बीटेक
कक्षा 12वीं में टॉप करने के बाद उन्होंने आईआईटी की तैयारी की और सिलेक्ट होकर आईआईटी रुड़की (IIT Roorkee) से बीटेक की पढ़ाई की। बीटेक के दौरान ही उन्हें बेंगलुरु की एक नामचीन कंपनी जिसका नाम ओरेकल इंडिया लिमिटेड है। मैं कैंपस प्लेसमेंट के दौरान जॉब मिल गई। इस कंपनी ने उन्हें 2200000 रुपए का पैकेज ऑफर किया, जिसे उन्होंने ज्वाइन कर लिया।
कुछ समय पश्चात उन्हें लगने लगा कि जो भी करना चाहती है, वह उससे दूर हो गई हैं उनका लक्ष्य आम नागरिक की सेवा करना था, परंतु कंपनी में नौकरी करने के दौरान वे लोगों की सेवा नहीं कर पा रही थी। इसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़कर यूपीएससी की तैयारी करने का फैसला लिया और दृढ़ निश्चय करके जुट गई।
दूसरे प्रयास में पाई 28 वी रैंक
अंकिता बताती है कि उन्होंने बचपन से ही यूपीएससी में अपना करियर बनाने का लक्ष्य बनाया था। इसी लक्ष्य को लेकर भी आगे बढ़ रहे थे। उनका कहना है कि उन्होंने यूपीएससी के लिए खुली आंखों से सपने देखें। उनका कहना है कि वर्ष 2017 में उन्होंने ओरेकल इंडिया लिमिटेड को ज्वाइन किया था, इसमें उन्होंने 2 वर्ष ही नौकरी की है।
उसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़कर यूपीएससी की तैयारी प्रारंभ कर दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 में उन्होंने यह परीक्षा पहली बार दी थी, जिसमें उन्हें 321 भी रैंक हासिल हुई थी। परंतु उनका सपना आईएएस बनने का था, इसीलिए उन्होंने दोबारा तैयारी की और दूसरे प्रयास में उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा में 28 वी रैंक हासिल की इसी के साथ उन्होंने अपना सपना पूरा किया।



