नौसेना में चयनित होकर ऑटो चालक की बेटी ने पिता का सपना पूरा किया, मां को सैल्यूट कर सम्मान दिया

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Hisha Baghel Agniveer
Auto driver's Daughter Hisha Baghel fulfill family dream. After father Hisha Baghel became Agniveer in Indian Navy. She salutes her mother.

Delhi: हर माता-पिता का सपना होता है कि उनके बच्चे ऊंची उड़ान भरी और देश में उनका नाम रोशन करें। माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे पढ़ लिखकर अपना सुव्यवस्थित जीवन जीए। हर माता-पिता की ख्वाहिश होती है कि उनका बच्चा हर वह चीज कर सके जो उन्होंने अपने जीवन में नहीं किया।

कुछ मामले ऐसे भी होते हैं की कोई व्यक्ति अपने जीवन में एक अच्छा मुकाम हासिल करना चाहता है, परंतु आर्थिक परेशानियों के चलते वह अपना सपना पूरा नहीं कर पाता, इसलिए वह व्यक्ति अपने बच्चों में अपना बचपन देखता है और चाहता कि उनका बच्चा एक सफल इंसान बने। दुनिया में यदि कोई असली रिश्ता है तो वह माता-पिता का अपने बच्चों से और बच्चों का अपने माता-पिता से।

आज हम इस लेख के माध्यम से एक ऐसी ही बेटी की बात करेंगे, जिसने अपने पिता के सपने को आत्मसात किया और अपने लक्ष्य के मेहनत करने लगी। वह अपने जीवन में सफलता हुई, परंतु इस सफलता को देखने के लिए उस बेटी के पिता उसके साथ नहीं थे।

19 वर्ष की उम्र में पूरा कर दिखाया पिता का सपना

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) राज्य के अंतर्गत आने वाले दुर्ग (Durg) जिले के बोरीगरका गांव की 19 वर्षीय हिशा बघेल (Hisha Baghel) अग्निवीर के अंतर्गत भारतीय नौसेना के लिए चुनी गई। सिलेक्शन के पश्चात उन्होंने 16 सप्ताह की कड़ी ट्रेनिंग भी ली।

इसके बाद नौसेना (Indian Navy) की वर्दी पहन अपने घर आए, तो गांव वालों ने उनका भव्य स्वागत किया। इस दौरान हिशा की आंखों में पिता के सपने पूरा करने की खुशी दिख रही थी, साथ ही पिता के साथ ना होने का गम भी उन्हें बहुत ज्यादा था।

Indian Navy File Free Photo.

ईशा की रिश्तेदार दोस्त परिवार सब लोगों ने मिलकर हिषा की कामयाबी गांव में बताने के लिए लगभग 2 घंटे की रैली निकाली जिसमें उन्हें फूल हार से सम्मानित किया गया। हिसाब की कामयाबी और अपने पिता के सपने को पूरा कर काफी खुश हैं साथ ही वह अपनी मां का सहारा वन रही है इसके लिए भी वह बेहद खुश हैं।

बीमारी के चलते पिता का हो गया देहांत

बताया जा रहा है कि हिसा बघेल जिसका चयन अग्निवीर के माध्यम से नेवी में हुआ उनके पिता पैसे से एक ऑटो चालक थे, वह काफी समय से कैंसर जैसी भयावह बीमारी से जूझ रहे थे। जिस समय हीशा की ट्रेनिंग चल रही थी उसी समय पिता संतोष बघेल इस दुनिया को छोड़ गए।

पिता की निधन की जानकारी परिजनों ने अपनी बेटी हिसा को नहीं दी, वे नहीं चाहते थे कि हिसा अपने लक्ष्य से भटके। निशा के पिता संतोष बघेल का निधन 5 मार्च 2023 को हुआ है। घर वालों ने उनकी ट्रेनिंग के काफी समय के बाद बताएं कि अब उनके पिता इस दुनिया में नहीं रहे। वही निशा के पिता संतोष बघेल चाहते थे कि उनके बेटे खूब पढ़े लिखे और तरक्की करें।

उन्होंने कभी अपनी बेटी की शिक्षा में कोई कमी नहीं रहने दी। उनका एकमात्र सपना था कि उनकी बेटी सरकारी नौकरी प्राप्त कर सकें। हीषा चाहती थी कि वह ऐसी नौकरी करें जिससे वह देश की सेवा कर सके। ऐसा ही हुआ जब उनका चयन भारतीय नेवी के लिए हुआ।

16 सप्ताह की ट्रेनिंग के पश्चात लौटी घर

रिपोर्ट के मुताबिक अग्निवीर के माध्यम से चयनित हुई हिसा को 16 सप्ताह की ट्रेनिंग करनी थी जिसके लिए उन्हें उड़ीसा के चिल्का जाना था। उन्होंने चिल्का से अपनी 16 सप्ताह की ट्रेनिंग पूरी की उसके बाद जब भी घर लौटी तो गांव का हर एक शख्स उनके आने की प्रतीक्षा कर रहा था।

उनके स्वागत में फूलों के हार और गाड़ी तैयार थी। जैसे ही हिसा अपने गांव की सीमा को पार कर रही थी वैसे ही लोगों ने डीजे शुरू कर दिए और डांस करने लगे साथ ही लोगों ने उन को फूल माला पहनाई साथ ही गांव की महिलाओं ने उनकी आरती उतारकर उन्हें तिलक लगाया। गांव की गलियों से गुजरते हुए जब भी अपने घर पहुंची तो सभी लोग हिसा के आने का इंतजार ही कर रहे थे।

ऐसा गाड़ी से उतरकर सबसे पहले अपनी मां के पास पहुंची और उन्हें सेल्यूट कर गले लग गई मां बेटी के मिलन को देख गांव के हर व्यक्ति की आंखों में नमी थी इसके बाद ऐसा अपने पिता की तस्वीर को नमन किया।

छत्तीसगढ़ की पहली अग्निवीर है हिसा

हिशा की मां सती बघेल बताती है कि हिशा के स्वर्गीय पिता संतोष बघेल अपने बच्चों की शिक्षा को लेकर हमेशा से ही गंभीर रहे हैं। पिछले 12 वर्षों से वह कैंसर जैसी बीमारी से लड़ रहे हैं। परिवार वालों ने जमीन जायदाद बेचकर उनका इलाज कराया, परंतु वह ठीक नहीं हो सके। 12 वर्षों से लड़ रहे लड़ाई को उन्होंने 5 मार्च 2023 को समाप्त कर दी।

पिता के इलाज में ऐसा लग रहा था जैसे देख हिशा ने कोचिंग पढ़ाने स्टार्ट कर दिया और अपनी पढ़ाई का खर्चा खुद उठाने लगे। हिशा की मां का कहना है कि वह छत्तीसगढ़ की पहली अग्निवीर है, जिनका चयन मेरिट लिस्ट और फिजिकल अच्छा प्रदर्शन करने के पश्चात हुआ है।

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