
Gangolihat, Pithoragarh: दोस्तों उत्तराखंड देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है। लोगों का मानना है कि इस राज्य में भगवान शिव का वास है। इसी राज्य में केदारनाथ भी आता जहां भगवान शिव के वराह अवतार के शरीर का एक टुकड़ा केदारनाथ की धरती पर स्थित है। भगवान शिव को कई नामों से पूजा जाता है जैसे भोलेनाथ, शिव शंभू, शंकर भगवान, महाकाल, रुद्राक्ष आदि।
भगवान भोलेनाथ बिल्कुल अपने नाम की तरह ही है। वह बहुत ही जल्द लोगों के द्वारा मनाए जाने पर मान जाते हैं। और उनका क्रोध धरती को नष्ट करने के लिए काफी है। हिंदू धर्म में शंकर भगवान को इष्ट देवता भी मानते हैं।
उत्तराखंड की भूमि भगवान शिव का लोक है, जिनके दर्शनों को हर वर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालु इनके दर्शन को आते है। क्या आपको पता है इस देवभूमि पर संसार के खत्म होने का रहस्य छुपा हुआ है। जी हां दोस्तों उत्तराखंड में एक जगह है जहां दुनिया के समाप्त होने कर राज छुपा हुआ है तो आइए जाने विस्तार से।
जाने पाताल भुवनेश्वर गुफा मंदिर के बारे में
दोस्तों देश और दुनिया में ढेरों ऐसे मंदिर और गुफाएं हैं, जहां ढेरों राज छुपे हुए हैं, जिन्हें जानना हर किसी के बस की बात नहीं है। कहते हैं जहां से विज्ञान खत्म होता है, वहां से अध्यात्म प्रारंभ होता है। कुछ ऐसा ही देखने मिल रहा है उत्तराखंड राज्य के अंतर्गत आने वाले पिथौरागढ़ जिले के पाताल भुवनेश्वर गुफा मंदिर में।
दोस्तों ऐसा कहा जा रहा है कि इस मंदिर में धरती के समाप्त होने का रहस्य छिपा हुआ है। जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि इस गुफा और मंदिर की जानकारी पुराणों में भी लिखी हुई है। यह मंदिर रहस्यों से भरा हुआ है और खूबसूरती के मामले मैं भी सबसे आगे हैं।
इस मंदिर को पाताल भुवनेश्वर मंदिर इसलिए कहा जाता है, क्योंकि यह समुद्र तल से 90 फीट नीचे है। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए पतले पतले गलियारों से जाना होता है, इसीलिए लोग इसे पाताल भुवनेश्वर मंदिर (Patal Bhuvaneshwar Temple) कहते हैं।
इस मंदिर का इतिहास
दोस्तों इस मंदिर का इतिहास जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे। लोगों से मिली जानकारी के अनुसार बताया जाता है कि आज से सैकड़ों वर्ष पूर्व सूर्य वंश के राजा और त्रेता युग के अयोध्या पर शासन करने वाले शासक राजा ऋतुपर्णा के द्वारा इस रहस्यमई गुफा (Mysterious Cave) की खोज की थी। इसके बाद इस गुफा में उनकी नागों के राजा अधिशेष से मुलाकात हुई थी।
पुराणों में लिखा है कि ऋतुपर्णा पहले ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने ऐसे रहस्यमई मंदिर की खोज की और नागों के राजा से मिलने का मौका मिला। अधिशेष ऋतुपर्णा को गुफा के भीतर एल गए, उस गुफा के भीतर उन्होंने देवी देवताओं और भगवान शिव के साक्षात दर्शन किए।
इस घटना के बाद इस गुफा के बारे में आगे कोई बातचीत नहीं हुई। त्रेता युग के बाद द्वापर युग में एक बार फिर पांडवों द्वारा इस गुफा को खोजा गया। इस बात का उल्लेख स्कंद पुराण में किया गया है। स्कंद पुराण के अनुसार देवों के देव महादेव भगवान भोलेनाथ स्वयं इस गुफा याने पाताल भुवनेश्वर गुफा में निवास करते है और सारे देवी देवता इस मंदिर में भगवान शिव की आराधना करने आते हैं।
AOI Vol 2 – Patal Bhuvaneshwar Cave, said to be the home of Shiva and Pavarti. Pilgrims recount visionary experiences, incl seeing great light beings. Many believe that many ancient temples in India and to the north, have interconnecting caves and tunnels. #India #HollowEarth pic.twitter.com/aE4LvjZlGW
— Ashrams of India (@ashramsofindia) May 17, 2022
पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि कलयुग में इस मंदिर की खोज जगतगुरू आदि शंकराचार्य (Adi Shankaracharya) के द्वारा आठवीं शताब्दी में किया गया था। इसके बाद यहां भगवान शिव की एक तांबे की शिवलिंग स्थापित कर दी गई है।
मंदिर तक जाने का रास्ता
दोस्तों इस मंदिर तक जाने का रास्ता समीर कटवाल के मेमोरियल गेट से प्रारंभ होता है। यहां से कुछ दूरी पर ग्रिल गेट है जहां से पातालकोट भुवनेश्वर मंदिर की यात्रा प्रारंभ होती है। 90 फीट नीचे पतले पतले रास्तों से होकर हम इस मंदिर तक पहुंच पाते हैं। जैसे-जैसे हम आगे बढ़ते जाते हैं इस गुफा की चट्टानों पर हमें तरह-तरह की कलाकृतियां दिखाई पड़ती है, जो नागों की राजा अधिशेष की मौजूदगी दर्शाती है।
लोगों का कहना है कि इस पूरी धरती का भार अधिशेष के द्वारा संभाला जा रहा है। पौराणिक कथा में इस जगह का जिक्र करते हुए कहा गया है कि इस मंदिर में चार द्वार है रण द्वार पाप द्वार घर द्वार और मोक्ष द्वार। आगे उल्लेख किया गया है कि जब रावण की मृत्यु हुई थी, तब आप द्वार बंद कर दिया गया था उसके बाद कुरुक्षेत्र में युद्ध के दौरान रण द्वार को भी बंद करके रखा गया था।
The enigmatic cave temple of Patal Bhuvaneshwar (पाताल भुवनेश्वर) is said to be as old as the earth itself.Patal Bhuvaneshwar is one of the most mysterious & spiritual place of Uttarakhand.This hidden pilgrimage situated at 1350 mts above sea level is mainly dedicated to Shiva. pic.twitter.com/oR3WGT0JSb
— Suchi Sharma (@Suchi_sharma_) January 4, 2022
इस लेख को पढ़ने के बाद आपके मन में भी यहां घूमने की इच्छा जागृत होगी इसके लिए जरूरी है कि आप सही समय के विषय में जान लें यहां जाना चाहते हैं, तो मानसून के मौसम में आप कतई ना जाए। आप यहां मार्च से जून के बीच यात्रा कर सकते हैं और ठंड का मौसम भी इस यात्रा के लिए बेहतरीन समय साबित होता है।
इस मंदिर की रहस्यमई गाथा
जानकारी के अनुसार इस मंदिर में भगवान गणेश का कटा हुआ सिर भी स्थापित किया गया है। जिसे आदि गणेश (Adi Ganesha) के नाम से जाना जाता है। इस गुफा में 4 खंबे है जिन्हें चारों युग का संकेत माना जाता है सतयुग त्रेता युग, द्वापर युग और कलियुग इन चारों खंडों में तीन खंबे एक समान है, परंतु कलयुग का खंबा काफी लंबा है।
Famous Mysterious cave temple in
Patal Bhuvaneshwar is a limestone cave temple 14 km from Gangolihat in the Pithoragarh district of Uttarakhand state in India.
160m long and 90 feet deep .@LostTemple7 @IndiaTales7 @rightwingchora @Lisha_Indian @desi_thug1 @wiavastukala pic.twitter.com/q1IpEunKnc— Laxmisha (@Laxmisha5) June 5, 2020
इस गुफा का सबसे रहस्यमई पार्ट यह है कि इस मंदिर में एक शिवलिंग है, जो लगातार वृद्धि कर रही है। पुराणों में कहा गया है कि जब यह शिवलिंग गुफा की छत को छू लेगी तो धरती से कलयुग समाप्त (Kalyug End) हो जाएगा या नहीं धरती समाप्त हो जाएगी।
इस गुफा की खासियत है कि आप इस गुफा के अंदर एक साथ चार धामों के दर्शन कर सकते हैं, केदारनाथ बद्रीनाथ और अमरनाथ इस गुफा में दिखाई देते हैं और इस गुफा की चट्टानों पर दुनिया का अंत (End of the world) भी लिखा हुआ है।




