
Patna: दोस्तों जैसा कि हम सब जानते हैं कि भारत की शिल्प कला दुनिया भर में प्रसिद्ध है। देश के कोने कोने में बने विराट महल, बड़े बड़े मंदिर में शिल्प कला के द्वारा इतनी बेहतर नक्काशी और सजावट का कार्य किया गया है, जिसकी सुंदरता देखते ही बनती है। सबसे बड़ी बात हमारी इस शिल्प कला के द्वारा हजारों साल पहले जो नक्काशी की गई थी वह आज भी उतनी ही खूबसूरती के साथ देखी जा सकती है।
यही वजह है कि सरकार ने आज के युवाओं के लिए शिल्प कला जैसी कलाकारी के प्रोत्साहन के लिए देश में विभिन्न संस्थान खोले हैं, जिसके जरिए युवाओं को शिल्प कला का प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर (Atmanirbhar) बनने का मौका मिल रहा है।
इसी सिलसिले में बिहार स्थित उपेंद्र महारथी शिल्प कला प्रशिक्षण केंद्र के अंतर्गत 18 से भी अधिक अलग-अलग तरह की शिल्प कलाओं की ट्रेनिंग युवाओं को दी जा रही है। जिसमें से सिक्की शिल्प कला के प्रति युवाओं का कुछ खास आकर्षण नजर आ रहा है। आइए जानते हैं सिक्की कला क्या होती है और कैसे इसे तैयार किया जाता है।
युवाओं को बेहतर मार्गदर्शन के लिए राष्ट्रीय अवार्ड पुरस्कृत शिक्षकों द्वारा ही दिया जा रहा प्रशिक्षण
युवाओं को प्रशिक्षण के द्वारा High-Skilled शिल्पकार बनाने के उद्देश्य से सरकार ने यह निर्णय लिया की सभी प्रकार की शिल्प कला का प्रशिक्षण सिर्फ उन शिक्षकों द्वारा प्रदान किया जाएगा जो राष्ट्रीय अवार्ड से अपनी कला के लिए पुरस्कृत किए जा चुके हैं। इसलिए सिक्की कला की प्रशिक्षण के लिए श्री धीरेंद्र कुमार का प्रशिक्षक के तौर पर चयन किया गया जो इसके लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से अवार्डेड है।
धीरेंद्र कुमार जी का कहना है कि सिक्की एक तरह की घास होती है, जिससे डलिया, टोकरी, गुलदस्ता, प्लेट आदि सजावट की चीजें तैयार की जाती है। परंतु अब हमारी कोशिश है कि हम विद्यार्थियों को इसके जरिए पेंटिंग का प्रशिक्षण दें जिनकी बाजार में महंगी कीमत मिलती है।
कुछ इस तरह बनाई जाती है सिक्की कला के द्वारा पेंटिंग
बातचीत के दौरान धीरेंद्र कुमार जी ने बताया सिक्की घास (Sikki Grass) के द्वारा पेंटिंग बनाने का काम बहुत ही माहीन एवं मुश्किल होता है। पेंटिंग बनाने से पहले कागज पर उस चित्र को पेंसिल द्वारा उकेरा जाता है। इसके उपरांत सिक्की घास को पेंटिंग में उकेरी तस्वीर के आकार अनुसार घुमावदार मोड़ के अनुसार छोटे बड़े टुकड़ों में काट लिया जाता है।
👉Sikki Art (Table mat) decorated with motif of mithilaart
Sikki grass a special kind of grass found in Bihar and Uttar Pradesh, India. Many types of handicraft items are made from sikki grass. The art of making items from sikki grass is an ancient one in the province of Bihar. pic.twitter.com/ZPZNqO5bwr— Mithilakriti Hub – Creative Hand Made Designs (@mithilakritihub) July 15, 2021
फिर काफी बारीकी के साथ स्केच की गई पेंटिंग की लाइंस के ऊपर सफाई के साथ चिपकाने का कार्य किया जाता है। यह काफी मेहनत और बारीक काम है, इसलिए तैयार की गई पेंटिंग की बाजार में अच्छी खासी कीमत मिलती है।
प्रशिक्षण में आए युवाओं को सिक्की कला ने बेहद आकर्षित किया
उपेंद्र महारथी शिल्प कला संस्थान में चल रहे सिक्की शिल्प कला के प्रशिक्षण के दौरान इस में भाग ले रहे युवाओं ने अपने अनुभव शेयर किए। उन्होंने बताया कि शुरू में तो सिक्की कला (Sikki Art) में काम करना काफी कठिन महसूस हो रहा था, पर जैसे-जैसे धीरेंद्र कुमार ने अपनी ट्रेनिंग के जरिए इसे आसान बना दिया।
Sikki craft: Art made of golden grass in Bihar#IncredibleIndia 💃👳💁 pic.twitter.com/39CkwySi96
— 🇮🇳 മഥുര കൃഷ്ണാ 💕 (@MathuraKrishnaa) July 31, 2021
अब इस शिल्पकाला (Handicraft HastKala) में उन्हें काम करना किसी आनंद की तरह प्रतीत होता है। वही इसके द्वारा बनाई गई पेंटिंग की बाजार में अच्छी कीमत मिलने के कारण उन्हें इस काम में अब रुचि अधिक हो रही है। क्योंकि यह उन्हें आत्मनिर्भर बन एक अच्छा कैरियर बनाने में मदद करेगी।
प्रधानमंत्री जी का मिशन है आत्मनिर्भरता के लिए वन डिस्टिक वन प्रोडक्ट पे फोकस
जैसा कि हम सब जानते हैं कि हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फोकस है कि देश के विभिन्न प्रांतों एवं जिलों में स्थानीय कला के द्वारा बनाई जा रहे प्रोडक्ट को राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाया जाए, जिससे हर शहर में स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन हो सके। जिसके लिए वन डिस्टिक वन प्रोडक्ट नाम की स्कीम पर जोर दिया जा रहा है।
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— Dinesh Saigal (@ArtnIndia) January 27, 2023
आपको लगभग हर रेलवे स्टेशन पर अब उस शहर द्वारा तैयार किए जा रहे प्रोडक्ट की अलग से दुकानें देखने को मिल सकती है। यह एक बहुत महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट है, जिसका निश्चय ही फायदा आने वाले समय में मिलने वाला है।




