
Delhi: दोस्तों एक बार हम फिर लेकर आए हैं एक साधारण परिवार से निकलकर आईएएस बनने तक की सफल स्टोरी। परंतु यह कहानी अन्य आईएएस अधिकारियों से काफी अलग है। इसे पढ़ने के बाद निश्चय ही आप भी भावविभोर हो जाएंगे। दरअसल हम सब जानते हैं की आईएएस एग्जाम भारत में होने वाले सभी तरह के एंट्रेंस एग्जाम में सबसे कठिन माना जाता है।
यहां तक की आप कितनी भी बड़ी कोचिंग में ट्रेनिंग ले ले या कितने भी पैसे खर्च कर ले इस एग्जाम (UPSC EXAM) में वही व्यक्ति सिलेक्ट हो पाता है, जिसकी जिद स्ट्रांग होती है। इसीलिए आप पाएंगे की आईएएस (IAS Officer) बनने वाले ज्यादातर विद्यार्थी किसी साधारण एवं छोटे परिवार को बिलॉन्ग करते हैं। और अक्सर छोटे-छोटे गांव से निकलकर अपनी मेहनत के दम पर आईएस बने होते हैं।

ऐसी ही एक कहानी आज फिर सामने आई है। जिसमें जब एक पिता पैसों के अभाव में आईआईटी जैसा एग्जाम नहीं दे पाया और पूरी रात रोते हुए काटी वही पिता आज अपने बेटे के आईएएस बनने पर खुशी के आंसू बहा रहा है। परंतु यह सफलता इतनी आसान नहीं थी, आइए जानते हैं जीत के पीछे संघर्ष की कहानी।
बिहार के इस गांव की है यह सक्सेस स्टोरी जिसने सभी को किया भाव विभोर
दोस्तों हमारे आज के हीरो शुभम कुमार (IAS Shubham Kumar) जिन्होंने कुछ सालों की तैयारी में ही आईएएस फर्स्ट रैंक के साथ क्वालीफाई किया। वह बिहार मुजफ्फरनगर के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र कटिहार के करीब कुम्हारी गांव एवं कदव प्रखंड के रहने वाले हैं।
इनके आईएएस बनने से पहले शुभम कुमार के पिता श्री देव आनंद सिंह (Dev Anand Singh) बताते हैं कि, वह स्वयं भी पढ़ाई में बहुत अच्छे थे और एक रात सिर्फ 500 RS जैसी रकम के अभाव में टैलेंटेड होते हुए भी आईआईटी जैसे एग्जाम में प्रवेश नहीं पा सके जिस वजह वह रात उन्होंने रोते हुए अपने एक दोस्त के साथ गुजारी और मन में ठाना कि, अपने बच्चों को कभी भी उनके सपनों के साथ कंप्रोमाइज नहीं करने देंगे। आज वही पिता फिर से रो रहे हैं परंतु आज वो आंसू खुशी के हैं।
6th क्लास में ही मन में था कुछ बड़ा करने का उद्देश्य
यह घटना उस समय की है जब शुभम कुमार अपने गांव की स्कूल में छठवीं क्लास पढ़ रहे थे। तब इन्होंने शिक्षक द्वारा पूछे गए एक सवाल का जवाब दिया, परंतु शिक्षक उनके जवाब से संतुष्ट नहीं थे, शुभम ने उनके साथ काफी देर तक सवाल जवाब किए। शुभम को महसूस हुआ कि उनका जवाब सही था, परंतु शिक्षक उनकी बात मानने तैयार नहीं थे।
Congratulations IAS 2020 topper Shubham Kumar
# Next IAS student pic.twitter.com/MvC8tcfMUf— B.Singh (@Cmd_Madeeasy) September 24, 2021
इसका मतलब उन्हें इस स्कूल में जिस ऊंचाइयों तक जाना है वैसी शिक्षा नहीं मिलने वाली। इसलिए इतनी कम उम्र होते हुए भी छठवीं क्लास में इनके पिताजी ने उन्हें पटना के रेसिडेंशियल विद्यालय में दाखिला कराया। जिस उम्र में बच्चे मां से लिपट कर सोते हैं, उस उम्र में वह अकेले पटना की स्कूल में सो रहे थे और यहां घर में मां उनकी याद में अक्सर रो लेती थी। दोस्तों सफलता ऐसी ही मुश्किलों से गुजर के मिलती है।
बचपन में ही IAS बनने का सपना देखा था
शुभम कुमार ने बताया की 12वीं क्लास दौरान ही उन्होंने ठान लिया कि आगे चलकर आईएएस बनना है। चूंकि हम एक मिडिल क्लास परिवार को बिलॉन्ग करते हैं जिसके चलते हमें सबसे पहले अपने फ्यूचर की सिक्योरिटी देखना जरूरी है।
Father Of IAS Topper Shubham Kumar AIR-1 ❤️❤️ pic.twitter.com/z3PZcVIJzA
— UPSC NOTES (@UPSC_Notes) January 22, 2023
उन्होंने देखा की वह फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स तीनों सब्जेक्ट में काफी स्ट्रांग हैं, इसलिए पहले इन्होंने आईआईटी का एग्जाम दिया जिसे पास करने पे काउंसलिंग द्वारा मुंबई IIT में दाखिला मिल गया। यहां से इन्होंने सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री प्राप्त की।
पसंद की पोस्ट पाने के उद्देश्य से ट्राई किया थर्ड अटेम्प्ट
शुभम ने बीटेक के बाद उन्होंने जॉब ज्वाइन न कर के 7 से 8 घंटे रोज लगा दिए अपने सपनो को पूरा करने अर्थात आईएएस की तैयारी के लिए। पहले अटेम्प्ट में सफलता नहीं मिली एवं दूसरे अटेम्प्ट में 298 रैंक के साथ क्वालीफाई हुए। परंतु यहां हार नही मानी और मेहनत करते हुए तीसरे अटेम्प्ट में आईएएस 2020 में ऑल ओवर इंडिया प्रथम रैंक के साथ क्वालीफाई कर लिया।




