
Bhagalpur: गरीबी में पढ़ना और पढ़ लिख कर एक अच्छा मुकाम हासिल करना हर किसी के बस की बात नही होती है। एक बच्चे का पालन पोषण और उसके भविष्य की तैयारी में उसके माता-पिता एक बहुत ही अहम भूमिका निभाते हैं। माता-पिता भले ही गरीब हो, परंतु अपने बच्चे को वह कुछ बेहतरीन ही देना चाहते हैं।
इसी प्रकार बच्चे का भी फर्ज होता है कि माता-पिता के प्रति उन्हें कुछ अच्छा करना चाहिए क्योंकि माता-पिता अपनी हैसियत से ज्यादा बच्चों को देते हैं। अक्सर देखा गया है कि माता पिता बच्चों को पाल पोस कर बड़ा कर देते हैं, अच्छी से अच्छी जिंदगी देने की कोशिश करते हैं, परंतु बच्चे एक बूढ़ी मां को अपने पास रखने से कतराते हैं।
बच्चों को यह समझना जरूरी है कि उनके माता-पिता ने उन पर अपना सब कुछ लुटा दिया है, तो उनका फर्ज है कि वे बुढ़ापे में अपने मां-बाप का सहारा बने। इस मामले में बेटियां बेटों से कई कदम आगे हैं, वे एक नहीं दो-दो परिवार को संभाल सकती हैं। बेटी अब मां-बाप के बुढ़ापे का सहारा हैैं।
इस बात का उदाहरण बनी है एक बेटी जिनके पिता ऑटो चालक हैं और गरीबी में बेटी को पढ़ा लिखा कर अमेजॉन कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनाया और अब वही बेटी ने अपनी कमाई से 35 लाख रुपया का फ्लैट खरीद कर पिता को उपहार स्वरूप दिया।
बात है बिहार के भागलपुर की
हम बात कर रहे हैं बिहार (Bihar) राज्य के अंतर्गत आने वाला भागलपुर (Bhagalpur) के जगदीशपुर प्रखंड के तगेपुर के रहने वाले मुकेश मोहन मिश्रा की बिटिया नेहा मिश्रा (Neha Mishra) की। नेहा मिश्रा अपने किए हुए कार्य से चारों तरफ चर्चाओं में है। बताया जा रहा है कि नेहा मिश्रा अमेजॉन कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं।

उन्होंने अपनी कमाई से अपने पिता के लिए 3500000 रुपए का एक फ्लैट खरीदा है और उन्हें गिफ्ट में दिया है। नेहा के पिता मुकेश मोहन मिश्रा पेशे से एक ऑटो चालक है और उनकी बेटी इतनी बड़ी सॉफ्टवेयर इंजीनियर बन कर उन्हें उपहार में फ्लैट दे रही हैं, जिसकी वजह से नेहा के माता-पिता और नेहा चर्चा का विषय बने हुए हैं।
जानकारी के अनुसार नेहा अमेजॉन (Amazon) के द्वारा लिया जाने वाला इंटरनल एग्जाम को पास किया है, जिसकी वजह से वह पिछले 2 वर्षों से Work From Home के अंतर्गत सॉफ्टवेयर इंजीनियर (Software Engineer) के रूप में डाटा एनालिसिस्ट (Data Analyst) के पद पर कार्य कर रही है।
9.8 लाख रुपया के पेकेज पर कर रही काम
मिली जानकारी से पता चला है कि नेहा मिश्रा को 9.8 लाख रुपए प्रतिवर्ष का पैकेज (RS 9.8 Lakh Salary Package) मिला है। नेहा बताती है कि लॉकडाउन के वक्त उन्होंने काफी परेशानियों का सामना किया है। पिछले 40 वर्षों से वे किराए के मकान में रह रही थी, जिसके चलते महामारी के वक्त मकान मालिक मकान खाली करने के लिए दबाव डाल रहे थे और उस माहौल में मकान ढूंढना काफी मुश्किल पड़ रहा था।

गे नेहा आ बताती हैं कि जब उन्होंने उस मुश्किल हालात से निपटाने के लिए अपने पिता से नया घर लेने की बात कही तो उनके पिता ने साफ इंकार कर दिया। फिर नेहा ने अपने पिता को बिना बताए बैंक से लोन ले लिया उनका लोन करीब 3000000 रूपए अप्रूव हुआ, जिससे उन्होंने जीरोमाइल के बसन्त विहार में दो बीएचके का फ्लैट खरीदा। उनका मानना है कि जिस तरह किराए पर पैसा देते हैं उसी प्रकार बैंक की किस्त भी दी जा सकती है।
अपनी फैमिली के साथ रहती हैं वे उस घर में
नेहा बताती है कि फ्लैट लेने के बाद वे अपने नए घर में परिवार के साथ शिफ्ट हो गई, वर्तमान में उस घर में नेहा के माता-पिता और उनकी दादी रहती हैं। उन का छोटा भाई इस वक्त हैदराबाद में है और अपनी पढ़ाई कर रहा है।
नेहा बताती हैं कि उनके पिता वर्ष 1989 से ऑटो चला कर अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे थे 2014 में उन्होंने कोर्ट केस जीता और शिक्षा विभाग में उन्हें परिचारी की नौकरी मिली तब से उनके जीवन में थोड़ा सुधार आया, परंतु उन्होंने अपने जीवन के 40 वर्ष किराए के मकान पर बिताएं।
पिता ने बताया अपनी बेटी को शिक्षित करने का हाल
नेहा के पिता मुकेश मोहन मिश्रा बताते हैं कि उन्होंने बहुत ही गरीबी में अपनी बेटी को शिक्षित किया है। ऑटो चला कर उनके पास जितना पैसा आता था, उतने में उनका परिवार का दो वक्त का खाना ही नसीब हो पाता था, ऐसे में उनकी होनहार बेटी नेहा को पढ़ाना काफी मुश्किल हो रहा था, परंतु उन्होंने हार नहीं मानी लगातार प्रयत्न करते रहे।
आगे वे बताते है की उन्होंने नेहा को कक्षा 12वीं तक माउंट कार्मेल स्कूल भागलपुर में पढ़ाया है। वर्ष 2016 में 12वीं कक्षा में नेहा अब्बल अंको से पास हुई, जिसके बाद उन्होंने हैदराबाद स्थित सैन फ्रांसिस्को वूमेन कॉलेज में इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। इसी दौरान वर्ष 2019 में अमेजॉन जैसी मल्टीनेशनल कंपनी में अपनी मेहनत के दम पर नौकरी ली। नेहा की सफलता से उसके माता पिता बेहद खुश है।



