
Ujjain: हिंदू धर्म याने सनातन धर्म भारत का सबसे पवित्र और बड़ा धर्म माना जाता है। इस धर्म के अनुसार पृथ्वी में जो कुछ भी है वह सब पूजनीय है। यदि व्यक्ति जीवित है और वह सांस ले रहा है, तो उनके लिए वह हवा भी ईश्वर की तरह है।
इसी प्रकार धरती में कई सारे जीव बिचरते हैं, जिनमें से कुछ जीव ईश्वर के वाहन भी हैं इसीलिए लोग उन्हें ईश्वर की तरह ही पूजते हैं जैसे सांप (Snake)। हिंदू धर्म के अनुसार पृथ्वी में ढेर सारे विषैले सांप है। लोगों का मानना है कि यह धरती उन्हीं की है इसीलिए उन्हें नागराज (Nagraj) कहकर पूजा जाता है।

लोगों का यह भी मानना है कि यह देवता किसी का बुरा नहीं करते, बल्कि यह लोगों को सुरक्षा प्रदान करते हैं। भारत के कई व्यक्ति ऐसे हैं, जो लगातार नागराज की पूजा करते हैं। इतना ही नहीं हर वर्ष नाग पंचमी (Nag Panchami) को नागों के पर्व के रूप में मनाते हैं। हिंदू ग्रंथ में सांपों को देवताओं का स्थान मिला है और वह सर्वत्र पूजा जा रहे हैं। इनकी पूजा का काफी महत्व है बताया गया है, तो आइए इस लेख के माध्यम से उस महत्व के बारे में विस्तार पूर्ण जाने।
सर्पों का ईश्वर से है गहरा नाता
वेदों और पुराणों में देखा जाए तो सर्प ईश्वर से काफी करीब है। हमारे सामने सबसे पहला उदाहरण तो भगवान भोलेनाथ हैं, जिन्होंने सृष्टि की रचना की है। आप देख सकते हैं कि गले में गहने के समान सर्प को लपेटकर उन्होंने रखा हुआ है। इसीलिए लोग सर्प को भगवान शिव का आभूषण भी कहते हैं।
इसके अलावा आप देख सकते हैं कि भगवान विष्णु समुद्र के नीचे शेषनाग को अपना बैठने का स्थान बनाकर विराजमान है। परंतु इसके अलावा भी एक और कारण है, शायद जिसके बारे में आम नागरिक बहुत कम जानता है वह है श्री कृष्ण से मिला हुआ वरदान।
इस वरदान के कारण है सर्प को भगवान की उपाधि प्राप्त हो गई है और विश्व में सर्वत्र पूजा जा रहे हैं। ज्योतिष एक्सपर्ट डॉक्टर राधाकांत वत्स ने अपनी ज्ञान और रिसर्च से इस विषय में जानकारी थी।
वर्षों पहले हुई नाग वंश की स्थापना
ऐसा बताया जा रहा है कि आज से हजारों वर्षों पूर्व नागवंश को स्थापित कर दिया गया था। पृथ्वी में कई खतरनाक एक से बढ़कर एक विषैले सर्पों का जन्म हुआ, आज भी धरती पर इधर-उधर पाए जाते हैं। परंतु इन सभी सर्पों में सर्वश्रेष्ठ स्थान शेषनाग का है।
Kukke subramanya temple where the snake god Shesha resides pic.twitter.com/XvhUYTxJBh
— (((Dominique Fisherwoman))) 💙 (@AbbakkaHypatia) August 13, 2021
शेषनाग भगवान विष्णु की सैया कहलाती है और नागराज वासुकी भगवान शिव के गले में श्रृंगार की तरह सुसज्जित होते हैं, जिस कारण से लोगों ने सर्प को देवताओं का अवतार माना है। कुछ कथाओं के अनुसार सर्पों को पूजा जाना द्वापर युग से जोड़ा गया है।
श्री कृष्ण और कालिया नाग के बीच का युद्ध
द्वापर युग श्री कृष्ण का युग था जब भगवान विष्णु ने श्री कृष्ण का अवतार लेकर धरती पर बढ़ रहे पापों को कम करने के लिए जन्म लिया। उस वक्त यमुना नदी में कालिया नाग निवास कर रहा था।
कालिया नाग इतना विषैला था कि यमुना का पानी भी विषैला हो गया था। जिसका उपयोग कर पाना गोकुल वासियों के लिए काफी कठिन था। इस स्थिति से निपटने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने कालिया नाग को यमुना से जाने के लिए कहा तब कालिया नाग अहंकार में आकर श्री कृष्ण को युद्ध के लिए चुनौती दे दी।
A Temple with over 100,000 sculptures of Snakes, established by Bhagwan Parashurama.
Mannarasala Sree Nagaraja Temple in Haripad , Kerala, is a very ancient and internationally known centre of pilgrimage for the devotees of serpent gods (Nagaraja). pic.twitter.com/bRqtdxaP92
— Mahima (@BahuRaani) August 13, 2022
उसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने चुनौती को स्वीकारा और कालिया नाग से युद्ध किया। युद्ध के दौरान कालिया नाग हार गया। साथ ही उसे श्री कृष्ण के अवतार में भगवान विष्णु की प्रतिमा दिखाई दी।
श्री कृष्ण के वरदान स्वरूप पूजे जाते हैं सर्प
यह जानकर कि श्री कृष्ण ही भगवान विष्णु का अवतार है, तो कालिया नाग को अपने किए पर काफी पछतावा हुआ, फिर उसने क्षमा मांगी और साथ ही अभय दान देने के लिए भी प्रार्थना की।
SouthIndia's temples have massive areas allocated for NAGAs – Reptilian Gods who live underground.There are a variety of #Naga Stones & each one has a specific meaning.The most fascinating is the motif of Intertwined #snakes.Does this symbol remind you of anything? #ancientaliens pic.twitter.com/hXNXzMrZVH
— ᏢᏒᎪᏉᎬᎬᏁ mᎾhᎪᏁ🔥 (@PraveenMohanET) August 31, 2018
इसके बाद भगवान श्री कृष्ण ने कालिया नाग को यमुना छोड़ने के साथ एक वरदान भी दिया जिसमें उन्होंने कहा कि सर्पों की पूजा लोगों के द्वारा की जाएगी और जो सर्प की पूजा करेगा। उसे कभी सर्प दंश का भय नहीं रहेगा। वह अपने साथ एक सुरक्षा कवच का होना महसूस करेगा। तभी से नागवंशी और अन्य हिंदू धर्म के लोग नागों की पूजा करते है।



