
Delhi: जब हम ज्योतिर्लिंग के बारे में सुनते है, तो सबसे पहले हमारे मन में ये प्रश्न उठता है कि ज्योतिर्लिंग की उत्पत्ति कैसे हुई। और ज्योतिर्लिंग क्या होता हैं। ज्योतिर्लिंग स्वयं भोले नाथ होते हैं, जो स्वयं से प्रकट हुए।
प्रचलित लोककथाओं एवं शिव पुराण के अनुसार उस समय आकाश से ज्योति पिंड पृथ्वी पर गिरे और उनसे पूरी पृथ्वी पर प्रकाश फैल गया था और इन्ही 12 पिंडों को 12 ज्योतिर्लिंग का नाम दे दिया गया है। इसके अलावा एक लोक कथा यह भी प्रचलित है कि ज्योतिर्लिंग का उद्गगम भगवान शंकर और भगवान ब्रह्मा के विवाद को निपटाने के लिए हुआ था।
वह 12 स्थान जहां ज्योतिर्लिंग स्थापित हैं
उससमय जब आकाश से ज्योति पिंड पृथ्वी पर गिरे और उनसे पूरी पृथ्वी पर प्रकाश फैल गया था। तब इन्ही 12 पिंडों को 12 ज्योतिर्लिंग का नाम दे दिया गया था। जिनके नाम निम्न है।
1. सोमनाथ ज्योतिर्लिंग जो सौराष्ट्र क्षेत्र, गुजरात में स्थापित है। 2. मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग, आंध्र प्रदेश श्री शैल पर्वत पर स्थित है। 3. महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग उज्जैन, मधयप्रदेश में सरकार के नाम से विख्यात है। 4. परमेश्वर ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर मध्यप्रदेश में स्थापित है। 5. केदारनाथ ज्योतिर्लिंग, उत्तराखंड 6. भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग। 7. विश्वनाथ ज्योतर्लिंग बनारस उत्तर प्रदेश (भगवान शिव की नगरी के नाम से विख्यात)। 8. त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग नासिक महाराष्ट्र। 9. वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग। 10. नागेश्वर ज्योतिर्लिंग।11. रामेश्वर ज्योतिर्लिंग रामेश्वर तमिलनाडु। 12. घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग
ज्योतिर्लिंग केदारनाथ धाम की सम्पूर्ण जानकारी
भगवान महादेव (Bhagwan Mahadev) के 12 ज्योतिर्लिंगो में से एक ज्योतिर्लिग उत्तराखण्ड के रुपद्रप्रयाग जिले में स्थित बाबा केदारनाथ में है। केदारनाथ ज्योतिर्लिंग- चारों धाम में से सबसे प्रमुख धाम माना जाता है। केदारनाथ में भगवान शिव हमेशा निवास करते हैं और जो भी भक्तगण वहां अपनी मनोकामना लेकर वहा जाता है। उसकी सभी मनोकामनाअवश्य पूरी होती है।
यह ज्योतिर्लिंग पर्वतराज हिमालय पर्वत की केदार नामक चोटी पर स्थित है। पुराणों एवं शास्त्रों में श्री केदारेश्वर-ज्योतिर्लिंग (Kedarnath Jyotirlinga) की महिमा का गुणगान विस्तृत रूप से किया गया है। यहां की प्राकृतिक छठा देखते ही बनती है।
12 Divine Jyotirlinga Shivlings across India that every Hindu must visit once in a lifetime…
1. Kedarnath Mahadev Jyotirlinga, Uttarakhand pic.twitter.com/j9dKjEktYH
— Vertigo_Warrior (@VertigoWarrior) November 2, 2022
इस चोटी के पश्चिम भाग में पुण्यमती मंदाकिनी नदी के तट पर स्थित केदारेश्वर महादेव का मंदिर अपने अनुपम रूप से हमें धर्म और अध्यात्म की ओर बढ़ने का संदेश देता है। चोटी के पूर्व में अलकनंदा नदी के तट पर बद्रीनाथ का परम प्रसिद्ध मंदिर है।
अलकनंदा और मंदाकिनी- ये दोनों नदियाँ नीचे रुद्रप्रयाग में आकर मिल जाती हैं। दोनों नदियों की यह संयुक्त धारा और नीचे देवप्रयाग में आकर भागीरथी गंगा से मिल जाती हैं। इस प्रकार परम पावन गंगाजी में स्नान करने वालों को भी श्री केदारेश्वर और बद्रीनाथ के चरणों को धोने वाले जल का स्पर्श आसानी से हो जाता है।
महादेव के दर्शनों के लिए जाने वाले भक्तगणों के लिए केदारनाथ धाम यात्रा का विस्तृत विवरण
सर्वप्रथम हम यात्रा के लिए ट्रेन से जाने की बात करते हैं, जिसमें उत्तराखंड में स्थित हरिद्वार ऋषिकेश या देहरादून के रेलवे स्टेशन से हम अपनी यात्रा को शुरू कर सकते हैं, सबसे पहले बात करते हैं ट्रेन की, तो यहां आने के लिये आप उत्तराखण्ड में स्थित हरिद्वार, ऋषिकेश, या देहरादून रेलवे स्टेशन में से किसी भी रेलवे स्टेशन पहुंच सकते हैं।
"Kedarnath Jyotirlinga" a holiest Babadham of Shiv Shambhu in shore of Mandakini River Himalaya ranges of Uttarakhand.
Pandavas built the temple and Due to Very Exterme weather Conditions Temple is open from April to Nov, It is Major Char Dham Pilgrimage#MahaShivaratri pic.twitter.com/VEYifEZmUA
— Desi Thug (@desi_thug1) February 21, 2020
इन तीनों रेलवे स्टेशनों से हम बस या टैक्सी या अन्य व्हीकल साधनों से हम सोनप्रयाग पहुंच जाते हैं। यहां से आगे आप अपने खुद के किसी भी वाहन से केदारनाथ धाम नहीं पहुंच सकते इसके लिए आपको यहां के यूनियन की टैक्सी या जो भी साधन हो उसे बुक करना होगा। जो आपको गौरीकुण्ड ले जाएगा।
केबल 40 RS मात्र लगते हैं एवं यदि आप एरोप्लेन से यात्रा करना चाहते हैं, तो देहरादून में नजदीकी हवाई अड्डा ज़ॉली ग्राण्ट एयर पोर्ट स्थित है। जिससे आप आराम से फ्लाइट पकड़ कर सोनप्रयाग पहुंच सकते है।
Divine abode of Mahadev 😍 Kedarnath
Mandir was Built by Pandavas and revived
by Adi Sankaracharya & is one of the 12 Jyotirlinga and Panchkedar ! pic.twitter.com/qjlTSzLcNY— Dharmic Bharat (@DharmicBharat) September 11, 2022
सोनप्रयाग पहुंचकर आप रात्रि विश्राम के लिए किसी भी होटल या रूम लेकर रह सकते है। क्योंकि अगले दिन आपको अपनी सुविधानुसार वाहन से बहुत जल्दी सुबह निकलना होगा। इसके अलावा यदि आप पैदल यात्रा नही करना चाहते है, तो आपको यहां घोड़ा या खच्चर की सवारी भी आसानी से उपलब्ध हो जायेगी। जिससे आप अपनी आगे की यात्रा को सुचारू रूप से रख सकते है।
इसके साथ ही यदि आप सोनप्रयाग या गौरीकुंड से पैदल यात्रा करना चाहते है, जिसमे शिव जी के मंदिर की दूरी लगभग 21 KM है। तो उसके लिए आप मार्केट से वाटरप्रूफ बैग जूते एवं छाता रेनकोट एवं एक डंडा भी खरीदकर रख ले इसके अलावा आप गर्म कपड़े, ग्लब्स और कैप जरुर रखे। ताकि आगे सफर में आपको परेशानी न आए।



