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Bharatpur: भारत में कई जगह ऐसी है जहां पर पक्षियों की कई प्रजातियों का भरमार है। पक्षी प्रेमी अक्सर इन जगहों पर विजिट करने जरूर जाते हैं। भारत में कई तरह के लोग हैं, जिनमें कुछ पशु पक्षी प्रेमी मिलेंगे, तो कुछ पशु पक्षी विरोधी भी मिलेंगे।
संसार में सभी प्राणियों के लिए जगह सुनिश्चित है। फिर चाहे प्राणी बुद्धिजीवी हो या फिर एक जीव। भारत के कुछ राज्यों में एक जगह सुनिश्चित की गई है, जहां पर हर प्रजाति के पक्षी मिलते हैं। इसी में हम बात करेंगे राजस्थान राज्य के अंतर्गत आने भरतपुर के पक्षियों की नगरी जिसका नाम केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (Keoladeo National Park) है।
इस राष्ट्रीय उद्यान में देशी और विदेशी पर्यटकों (Foreign Tourists) का आना जाना लगा ही रहता है। देश विदेश से इस स्थान की खूबसूरती और यहां के पक्षियों को निहारने के लिए लोग आते हैं।
इन पर्यटकों को राष्ट्रीय उद्यान के अंदर ले जाने के लिए केबल साइकिल और साइकिल रिक्शा का ही इस्तेमाल होता है। साइकिल और साइकिल रिक्शा का इस्तेमाल इसलिए भी किया जाता है, जिससे अंदर मौजूद पक्षियों को कोई तकलीफ ना हो।
इसके साथ ही इस पर्यटक के अंदर पर्यटकों को घुमाने के लिए केबल 125 साइकिल और साइकिल रिक्शा चालक को ही अनुमति दी गई है इसके पीछे भी कुछ कारण है तो आइए आगे के लेख में विस्तार पूर्वक जानेंगे इसके बारे में।
अनपढ़ होने के बाद बोलते हैं अंग्रेजी
इस केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में करीब 300 से भी ज्यादा पक्षियों की प्रजाति है, इन पक्षियों को देखने के लिए ज्यादातर विदेशी लोग आते हैं इन विदेशी लोगों की वजह से इस इलाके के रिक्शा चालक फराटे दार अंग्रेजी (Fluent English) बोलने लग गए हैं। वास्तव में यहां पर जब पर्यटक विदेश से घूमने आते हैं और यही वह रिक्शा चालक है जो इन्हें अपना पूरा समय देकर उन जगहों पर ले जाते हैं जहां वे घूमने आए हैं।
उनके साथ रहकर उनके साथ समय बिता कर यह रिक्शा चालक एकदम सटीक अंग्रेजी बोलना सीख जाते है। इन सब में हैरत करने वाली बात यह है कि यह रिक्शा चालक कम पढ़े लिखे और कुछ अनपढ़ भी होते हैं परंतु उनकी अंग्रेजी किसी पढ़े-लिखे व्यक्ति से भी ज्यादा बेहतरीन होती है।
हिंदी अंग्रेजी के साथ कई भाषाएं आती हैं रिक्शा चालकों को
केवलादेव नेशनल पार्क में अंग्रेजी के साथ-साथ कई तरह की भाषा बोलने वाले विदेशी पर्यटक आते हैं। इन्हीं पर्यटक को केवलादेव नेशनल पार्क की सैर कराते कराते उनकी भाषा सीख जाते हैं।
वह अंग्रेजी के साथ कई विदेशी भाषाओं का प्रयोग करते हैं जैसे फ्रेंच जर्मन इटालियन यूरोपियन आदि। रिक्शा चालक अंग्रेजी के साथ इन भाषाओं का भी प्रयोग कर लेते हैं इस वजह से वे रिक्शा चालक के साथ-साथ विदेशी टूरिस्ट के गाइड भी कहे जाते हैं।
रिक्शा चालक बलवंत सिंह का इंटरव्यू
केवलादेव नेशनल पार्क के एक रिक्शा चालक (Rickshaw Driver) जिनका नाम बलवंत सिंह है। वे बताते हैं कि वह इस नेशनल पार्क में कई वर्षों से रिक्शा चला रहे हैं। उनके रिक्शे में विश्व के कोने-कोने से लोग आते हैं।
उनके साथ घूम कर उन्हें अपनी भाषा सिखा जाते हैं। वे पिछले कई वर्षों से उन पर्यटकों को घुमा रहे, जिसके चलते आज उनकी अंग्रेजी (English) इतनी जबरदस्त हो गई है कि उन्होंने पढ़े-लिखे व्यक्तियों को पीछे छोड़ दिया है।
एक गाइड के पद पर देते हैं अपनी सेवा
राजस्थान (Rajasthan) के भरतपुर (Bharatpur) में करीब 300 से ज्यादा प्रजातियों वाले लाखों की संख्या में पक्षी मौजूद हैैं। ऐसे में हर पक्षी की पहचान करना हर किसी के बस की बात नहीं होती। जो व्यक्ति बाहर से इन पक्षियों को देखने आते हैं।
उन्हें उनके बारे में कोई भी नॉलेज नहीं होता, इसीलिए विदेशी पर्यटक के साथ एक गाइड भी होता है, जो उन्हें उन पक्षियों की पहचान कराता है। वहां के रिक्शा चालक भी उन सभी पक्षों की पहचान करने में सक्षम है, इसीलिए कभी-कभी रिक्शा चालक उन विदेशी पर्यटक के लिए एक गाइड की तरह काम करते हैं।



