बीकानेर के एक छोटे से गांव की लड़की UPSC में ऑल इंडिया 91 रेंक लेकर आई और अफसर बन गई

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Pragya Jat UPSC
UPSC Success Story Of Pragya Jat From Rajasthan. Pragya Jat 91th Rank In Civil Services Examination 2021. Now She is IFS officer.

Gurugram: जैसे कि हम जानते हैं कि यूपीएससी की परीक्षा देश की सबसे जटिल परीक्षा है। इस परीक्षा में 3 चरण होते हैं यदि दो चरण पास करने के बाद आखिरी चरण में फेल हो जाते हैं, तो इसकी शुरुआत दोबारा पहले चरण से करनी होती है, इसीलिए यह परीक्षा और भी ज्यादा जटिल हो जाती है।

इसके बावजूद भी देश के 80 फ़ीसदी युवा यूपीएससी (UPSC) को अपना करियर चुनते हैं। हर वर्ष लाखों युवा अपने अपने सपनों के साथ इस परीक्षा में बैठते हैं, जिनमें से कुछ ही लोग चुने जाते हैं। इन्हीं में से एक हैं बीकानेर (Bikaner) जिले के एक छोटे से गांव नौरंगदेसर (Norangdesar) से तालुक रखने वाली प्रज्ञा जाट, जिन्होंने यूपीएससी की परीक्षा में पूरे भारत में 51 वी रैंक हासिल की है।

UPSC HQ
Union Public Service Commission

इस सफलता के बाद प्रज्ञा का सपना है कि वह फॉरेन सर्विस में अपनी सेवा दे सके। यूपीएससी परीक्षा के अंतर्गत काफी सारी पोस्ट होती हैं, जिनमें युवाओं को सेवा देने का मौका मिलता है। इन्हीं में से एक है फॉरेन सर्विसेज (Indian Foreign Service)। तो आइए आगे के लेख में जाने की प्रज्ञा ने किस तरह यह सफलता हासिल की।

प्रज्ञा ने देखा यूपीएससी का सपना

प्रज्ञा (Pragya Jat) काफी होनहार विद्यार्थी रही हैं, उन्होंने दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज से अपनी शिक्षा पूरी की और कक्षा 10वीं और 12वीं में अच्छे अंकों से परीक्षा पास की। वह चाहती तो डॉक्टर या इंजीनियर बन सकती थी, परंतु उन्होंने केवल एक ही सपना देखा वह है यूपीएससी।

वे यूपीएससी में चयनित होकर देश के लिए कुछ करना चाहती थी। इसीलिए उन्होंने शुरू से ही अपने दिमाग में यूपीएससी को बिठाकर कॉलेज में ह्युमेनिटिज, इकोनोमिक्स और सोशियोलॉजी जैसे सब्जेक्ट की पढ़ाई की।

उनका कहना है कि 10वीं और 12वीं में अच्छे अंक लाना केवल डॉक्टर और इंजीनियर बनना नहीं होता, बल्कि सिविल सेवा में अपने देश के लिए अधिक से अधिक कार्य करना भी होता है। उन्होंने परिश्रम को सफलता की कुंजी और अपने लक्ष्य से पीछे ना हट ना सफलता का मूल मंत्र कहा है।

तीसरे प्रयास में बनी यूपीएससी टॉपर

प्रज्ञा का कहना है कि यूपीएससी परीक्षा (UPSC Exam) में चयनित होने का केवल एक ही मार्ग है वह है जी तोड़ मेहनत यदि व्यक्ति पेपर के आखरी सवाल तक मेहनत करता है तो उसके हाथ सफलता जरूर लगती है और यदि व्यक्ति असफलता से डरकर पीछे हट जाता है, तो वह किसी भी काम में सफल नहीं हो सकता, क्योंकि इंसान असफलताओं से लड़कर ही सफल बनता है।

असफलताएं व्यक्तियों को काफी कुछ सिखा देती हैं। ऐसे ही प्रज्ञा ने भी सीखा उन्होंने बताया कि वे यूपीएससी के प्रीलिम्स में दो बार चयनित हो गई थी, परंतु उन्हें सफलता नहीं मिल रही थी। तीसरे प्रयास में वे 91वे रैंक में सिलेक्ट हुई। यह उनके लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कभी असफलताओं से हार नहीं मानी बल्कि उनसे सीखा और अपने कर्म करते रहे। आज वे उस मुकाम पर हैं जिसके सपने उन्होंने काफी सालों से देख रखें हैं।

परिवार का मिला सपोर्ट

प्रज्ञा के परिवार में उनके माता-पिता और उनका एक छोटा भाई है। माता जिनका नाम आशा देवी है, वह एक ग्रहणी है, परंतु प्रज्ञा की सफलता में उनका बहुत बड़ा हाथ है, उन्होंने प्रज्ञा को हर कदम पर सहयोग किया।

वही प्रज्ञा के पिता एक रेलवे कर्मचारी हैं। उन्होंने अपनी बेटी के उज्जवल भविष्य के लिए काफी सारे सपने संजोए हुए थे, जो आज कारागार हुए। प्रज्ञा के छोटे भाई अभी मास्टर्स कर रहे हैं। उन्होंने भी प्रज्ञा को कभी निराश नहीं होने दिया, वे उन्हें हमेशा मोटिवेट करते रहे।

प्रज्ञा को गांव से है लगाओ

प्रज्ञा ने अपने गांव के बारे में बताते हुए कहा कि उन्हें अपने गांव से काफी ज्यादा लगाओ है। क्योंकि उनका गांव सबसे प्यारा है, हालांकि वे अपने गांव में नहीं रहती और उनका गांव जाना काफी कम होता है। इसके बावजूद भी उन्हें अपने गांव से बेहद लगाव है।

वह हर त्यौहार उत्सव और छोटे बड़े आयोजन में गांव जाती हैं और उनके गांव के लोग काफी ज्यादा पसंद करते हैं। वर्तमान समय में प्रज्ञा गुड़गांव (Gurgaon) में रह रही हैं और उन्होंने अपनी पूरी पढ़ाई दिल्ली से पूरी की है। पिता रेलवे कर्मचारी हैं, जो एक ट्रांसफरेबल जॉब है, जिसके चलते प्रज्ञा को भी पिता के साथ कई शहरों में रहने का मौका मिला।

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