
Varanasi: काफी सारे लोग संसाधनों के अभाव के चलते अपनी मंजिल को छोड़ देते और कुछ लोग उन संसाधनों के अभाव को अपना हथियार बनाकर अपनी मंजिल को बड़ी शिद्दत से चाहते हुए आगे बढ़ते हैं और उसे पा लेते हैं।
ऐसा ही कुछ हुआ अभिषेक यादव (Abhishek Yadav) के साथ नंदगंज गाज़ीपुर के अंतर्गत आने वाले 1 गांव धनीईपुर के निवासी अभिषेक यादव का जीवन बचपन से ही काफी संघर्ष में ही रहा है। 2 वर्ष की उम्र में उनका हार्ट का ऑपरेशन हुआ, क्योंकि उन्हें जन्मजात दिल में छेद की बीमारी थी।
अभिषेक के पिता नौ सेना के सैनिक थे। परंतु इसके बाद भी उनके पास काफी ज्यादा आर्थिक कमी थी। वे कहते हैं कि भले उन्होंने आर्थिक कमी का सामना किया परंतु पिताजी के नौसेना में होने की वजह से उन्हें शुरू से ही केंद्रीय विद्यालय में पढ़ने का मौका मिला इसके लिए वे अपने आप को बहुत ही ज्यादा लकी मानते हैं।
कक्षा बारहवीं तक उन्होंने विज्ञान संकाय से पढ़ाई की उसके बाद उनके पिता की हैसियत कॉलेज पढ़ने लायक नहीं थी, इसीलिए उन्होंने स्विगी और जोमैटो में एक डिलीवरी ब्वॉय (Zomato and Swiggy delivery boy) का काम किया। काम करते हुए ही उन्होंने कॉलेज में प्रवेश लिया और यूनिवर्सिटी टॉप कर लिया। आइए आगे की लेख में जाने और किन संघर्षों से गुजरे हैं अभिषेक यादव।
आर्ट विषय में दिलचस्पी थी परंतु साइंस लेकर पढ़ना पड़ा
अभिषेक बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही आर्ट और इतिहास जैसे विषयों पर काफी ज्यादा दिलचस्पी थी, परंतु परिवार वालों ने विज्ञान लेकर पढ़ने के लिए जोर दिया, तो उन्हें विज्ञान लेकर पढ़ना पड़ा। परंतु जब वह कॉलेज में आए तो उन्होंने अपने पसंद के सब्जेक्ट को चुन लिया उस सब्जेक्ट में उन्होंने न केवल अच्छे अंको से पास हुए बल्कि उन्होंने यूनिवर्सिटी टॉप किया।
आपको बता दें अभिषेक शुरू से ही चाहते थे कि उन्हें वाराणसी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में एडमिशन मिले। इस वर्ष उन्होंने यूनिवर्सिटी टॉप करके स्वर्ण पदक (Gold Medal) के हकदार बन गए हैं 10 दिसंबर को दीक्षांत समारोह में उन्हें स्वर्ण पदक से सम्मानित किया जाएगा।
अभिषेक का कहना है कि कभी नहीं सोचा था कि वह टॉप करेंगे, परंतु इतना था कि टॉप 3 में वे जरूर रहेंगे। पिछले सेमेस्टर में उन्हें दूसरी रैंक प्राप्त थी। उन्होंने सभी छात्राओं को जानकारी देते हुए कहा है कि यदि किसी विषय में आप टॉप करना चाहते हैं, तो उस विषय पर अच्छी तरह पढ़ाई के साथ-साथ उसे समझना जरूरी है।
इन सबसे अलावा आपके लिखने का तरीका भी अच्छा होना चाहिए, जिसमें पढ़ने वाले को साफ तौर पर समझ में आए कि आपने क्या लिखा है, साथ ही सटीक उत्तर देने की कोशिश करें यही आपको टॉपर बनाएगा।
मां टीचर और मित्रों के सहयोग से हासिल की यह उपलब्धि
कहते हैं बड़ी सफलता के पीछे माता-पिता और शिक्षकों का बहुत बड़ा रोल होता है यही चीज अभिषेक के साथ हुई। अभिषेक की मां ने उन्हें पढ़ाई के लिए काफी ज्यादा प्रेरित किया। जब वे स्नातक की पढ़ाई करने के लिए महादेव पीजी कॉलेज में एडमिशन लिया, तो बीए की बाद की शिक्षा प्राप्त करने के लिए अभिषेक की अध्यापिका डॉक्टर रेखा सिंह ने आगे की शिक्षा के लिए उन्हें वाराणसी हिंदू विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने का सुझाव दिया।
साथ ही दोस्तों ने उन्हें काफी ज्यादा सपोर्ट किया। अभिषेक का रूममेट उसके लिए खाना रखता था और पढ़ाई में भी उसकी काफी ज्यादा मदद करता था। साथ ही बाहरी दुनिया से लड़ने के लिए अभिषेक के दो मित्र रोहित पटेल और राकेश कुमार थे जो सारी दुनिया से उनकी सुरक्षा करते थे।
सिविल सेवा की तैयारी करना चाहते हैं
ऐसा बताया जा रहा है कि अभिषेक वर्तमान समय में दिल्ली में रह रहे हैं और हाल ही में उन्होंने डीयू में b.ed के लिए प्रवेश परीक्षा दी है। बस उन्हें रिजल्ट घोषित होने का इंतजार है।
बताते हैं कि अब वे सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करना चाहते हैं और देश की सेवा में अपना योगदान देना चाहते हैं, इसीलिए अब वे दिल्ली में रहकर सिविल सेवा परीक्षा (Civil Service Exam) की तैयारी करेंगे और अपना खर्च चलाने के लिए उनका डिलीवरी बॉय वाला काम ही करेंगे।
होशियार बच्चों की मदद के लिए काम करना चाहते हैं अभिषेक
प्रशासनिक सेवा में जाने का उद्देश्य बताते हुए अभिषेक कहते हैं कि उन बच्चों के लिए काम करना चाहते हैं, जो काबिल है, परंतु जीवन के संघर्षों से उन्हें जल्द से जल्द वह मुकाम नहीं मिल पाता जिसकी वे हकदार होते हैं।
वे बताते हैं कि बीएचयू कॉलेज में एक व्यवस्था है ‘अर्न बाय लर्न’ (Earn By Learn) इस अर्थव्यवस्था के अनुसार छात्र-छात्राएं पढ़ाई के साथ साथ काम भी कर सकते हैं, जिसमें उन्हें अपना खर्चा चलाने में दिक्कत नहीं होती वैसे ही व्यवस्था सभी कॉलेजों में लागू करना चाहते हैं, जिससे बच्चों को परेशानी का सामना ना करना पड़े।



