इस पति-पत्नी ने प्राचीन तकनीक का प्रयोग कर अपने हाथों से मिट्टी का घर बनाया, जाने घर की खासियत

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mud house
Couple built a mud house with ancient technique. Husband and wife built a mud house with their own hands using 700 years old technology.

Pune: कहते हैं ईट और सीमेंट से एक मकान बनता है और उस मकान में रहने वाले आदमी और औरत उस मकान को घर बनाते हैं उसे प्यार से सजाते हैं। शादी के बाद एक दंपति जोड़े (Couple) का सपना होता है कि वे एक प्यारा सा घर बनाए और अपने गृहस्थ जीवन को जिए।

जिसमें एक ग्रहणी महिला का सपना होता है कि उसका घर हर सुख सुविधा से संपन्न हो और बेहद सुंदर हो परंतु कई बार कुछ लोगों के पास पैसे के अभाव के कारण वे अपने मन का घर नहीं ले पाते या फिर उनके भाग्य में घर खरीदना होता ही नहीं है।

परंतु कभी-कभी लोग अपना भाग्य स्वयं लिखते हैं, जैसे कि आज के इस लेख में हम ऐसे दंपति के बारे में बात करेंगे जिसने अपना घर स्वयं बनाया। हर तरफ उनके घर की चर्चाएं हैं और लोग हैरत में है कि किस तरह उन्होंने मिट्टी का दो मंजिला मकान (Mud House Double Story) अपने हाथों से निर्मित किया, तो आइए जाने उन दंपति जोड़े के बारे में जिन्होंने मिट्टी से अपना घर का निर्माण किया।

कहानी महाराष्ट्र के एक कपल की

हम बात कर रहे हैं महाराष्ट्र (Maharashtra) राज्य के पुणे (Pune) शहर के रहने वाले शादी शुदा जोड़े युगा अखारे और सागर शिरुडे की जो पेशे से आर्किटेक्ट (Architect) है। दोनों ने मिलकर अपने खेतों पर बांस और मिट्टी से घर के निर्माण के बारे में सोचा परंतु आसपास के लोगों का कहना था कि उस जगह पानी के भराव की वजह से उनका घर बहुत जल्दी नष्ट हो जाएगा, इसीलिए वे अपनी मेहनत जाया ना करें।

परंतु युगा और सागर दोनों ही उनकी बातों से घबराने वाले नहीं थे और उन्होंने ग्रामीणों को प्राचीन समय में निर्मित कच्चे मकानों से अवगत कराया। मिट्टी के घर आज भी महाराष्ट्र के कई इलाकों में निर्मित है और साल के तीनों मौसम की मार भी अच्छी तरह सह लेते हैं।

शादीशुदा दंपति पेशे से है आर्किटेक्ट

मिली जानकारी के अनुसार युगा और सागर दोनों ही वर्ष 2014 में पुणे के कॉलेज पढ़ाई करते थे। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने साथ में ही सागा एसोसिएट्स नाम से चल रही प्रसिद्ध फर्म को प्रारंभ किया। जानकर खुशी होगी कि दोनों का पेशा एक आर्किटेक्ट था।

दोनों ने मिलकर कई बड़ी-बड़ी बिल्डिंगों और बड़ी-बड़ी संस्थाओं की इमारतों को डिजाइन किया। उनके कैरियर में उनके द्वारा निर्मित मिट्टी का घर जिसका नाम मिट्टी महल है काफी प्रसिद्ध और बेहतरीन है। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि बड़े से बड़ा तूफान और तेज से तेज बारिश उस घर का कुछ नहीं बिगाड़ पाई।

घर की कीमत जान कर रह जाएंगे हैरान

व्यक्ति अपने घर बनाने में 10 से 1500000 रुपए ऐसे ही खर्च कर देता है और फिर उसे आधुनिक तरीके से डेकोरेट करने के लिए कई लाखों और खर्च कर देता है, परंतु आपको बता दें युगा और सागर के द्वारा बनाये गए घर में मात्र 400000 RS का निवेश लगा। घर के निर्माण में लोकल मटेरियल का उपयोग हुआ है और कई चीजों को उन्होंने रीसाइकिल भी कर दिया है।

वे दोनों बताते हैं कि उन्हें घर बनाने के लिए बांस लाल मिट्टी और घास का उपयोग किया है, उन्होंने मिट्टी को खास तरह से प्रोसेस किया। मिट्टी में भूसी, गुड़ और हरड़ आदि के वृक्ष से प्राप्त रस को मिलाया और गौ मूत्र और गोबर को मिला कर उसे ईट और बांस के साथ चिपकाने योग्य बनाया।

सैकड़ों वर्ष पुरानी तकनीक (Ancient Technology) को बनाया हथियार

आधुनिक युग की तरह पुराने समय में एसी फ्रिज कूलर नहीं हुआ करते थे, ऐसी स्थिति में भी पुराने समय के घर गर्मी में ठंडा और ठंडी में गर्म हुआ करते थे। आज इस युगल ने उसी तकनीक का इस्तेमाल करके अपने घर का निर्माण किया। युगा और सागर ने बॉटल और डॉब तकनीक का प्रयोग किया जो आज से करीब 700 वर्ष पूर्व की तकनीक है।

इस तकनीक से बांस और मिट्टी को प्रभावी ढंग से जोड़ा जाता है। यह तकनीक युगा और सागर के घर में थर्मल इंसुलेशन और साउंड इंसुलेशन को नियंत्रित करती है। इस सिस्टम को कॉब वॉल सिस्टम भी कहा जाता है। इससे ठंडी के मौसम में दीवारें गर्म और गर्मी के मौसम में दीवारें ठंडी होती हैं हम कह सकते हैं कि घर का बातानुकूलन नियंत्रित रहता है।

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