उत्तराखंड के इस अद्भुत मंदिर के बारे में प्रचलित एक मान्यता के कारण रोज़ सैकड़ों भक्त पहुंचते हैं

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Surkanda Devi Temple
Miracle temple of Maa Surkanda Devi in Tehri Garhwal. All about Surkanda Devi temple in Tehri district of Uttarkhand.

Photo Credits: Twitter

Tehri Garhwal: धार्मिक स्थल के रूप मे देवभूमि उत्तराखंड को आध्यात्मिक केंद्र माना जाता रहा है। यहां पर जो मंदिर है उनमे पूरे वर्ष भर श्रद्धालुओं की लंबी लाइन लगी रहती है। हर समय यहा श्रद्धालुओं का तांता रहता है। हम जानते है कि हिन्दू धर्म में विशेष रूप से वैष्णव और शैव परंपरा प्रचलित है।

इसके अलावा शाक्त परंपरा को भी हिन्दू संस्कृति में विशेष स्थान दिया गया है। शाक्त परंपरा में स्त्री को दैवीय शक्ति का स्वरूप मानकर उपासना पूजा अर्चना किया जाता है। आज हम आपको शाक्त परंपरा से ही सम्बन्धित एक मन्दिर की बात बताने वाले है।

यह मन्दिर जिसकी हम बात करेंगे वह देवभूमि उत्तराखण्ड (Uttrakhand) में मोजूद है। जिस मंदिर के बारे मे हम बताने जा रहे है। वह मंदिर टिहरी जनपद (Tehri Janpad) में आता है। इस मन्दिर को सुरकंडा देवी के अद्भुत मंदिर (Surkanda Devi Temple) नाम से लोग जानते है। यह मन्दिर बहुत ही प्रसिद्द वैभवशाली मंदिर है। जोकि 51 शक्ति पीठ में गिना जाता है।

सुरकंडा देवी का मंदिर जौनुपर के प्रसिद्द पर्वत सुरकुट पर्वत में स्थित है। सुरकुट पर्वत पर स्थित इस मंदिर में देवी माता काली जी की प्रतिमा स्थापित है। जिस पर लोगों की असीम श्रद्धा है। इस मन्दिर से सम्बन्धित कई मान्यता है। आज हम इस मन्दिर से सम्बन्धित सबसे प्रसिद्ध कहानी के बारे मे बताएंगे।

उत्तराखण्ड में स्थित है प्रसिद्ध सुरकंडा देवी का मन्दिर

पुराण केदारखंड तथा स्कंद की मान्यता के अनुसार इस मन्दिर में राजा इंद्र ने माता काली की उपासना की थी। उपासना कर इंद्र ने अपना खोया साम्राज्य भी हासिल किया था। आपको बता दे, यह स्‍थान 3000 मीटर की समुद्रतल से ऊंचाई पर स्थित है। चूंकि यह स्थान अधिक ऊंचाई पर स्थित है, इस कारण इस स्थान से गंगोत्री बद्रीनाथ, केदारनाथ तथा यमनोत्री यह सभी चारों धाम की पहाड़ीया इस मन्दिर से नजर आती हैं।

आपको बता दे कि इस मन्दिर परिसर में भगवान शिव तथा भगवान हनुमानजी के भी समर्पित मंदिर स्थित है। इस मन्दिर से सम्बन्धित ऐसी मान्यता है कि अगर गंगा दशहरे या फिर नवरात्रि में इस मंदिर में आकर देवी माता के दर्शन किए जाए तो भक्त की सारी मनोकामना पूरी होती है।

देव वृक्ष कि पत्तियों के प्रसाद से सम्बन्धित है प्रसिद्ध मान्यता

इस मन्दिर की कुछ विशेषताएं भी प्रसिद्ध है। सुरकंडा मंदिर की कुछ विशेषता जो लोगों द्वारा बताई जाती है, वह माता के प्रसाद से सम्बन्धित है। कहते है कि जो भी श्रद्धालु इस मन्दिर के प्रसाद को ग्रहण करता है। उसके सभी कष्टों का निवारण माता खुद करती है।

कहते है यहा प्रसाद के रूप में मिलने वाली रौंसली की पत्तियां बहुत ही औषधीय गुणों से परिपूर्ण होती हैं। प्रसाद से सम्बन्धित जो धार्मिक मान्यता है, उसके अनुसार प्रसाद की इन पत्तियों से भक्तगण के घर में हमेशा सुख समृद्धि बनी रहती है।

इस पत्ती के वृक्ष को उस क्षेत्र में देववृक्ष के नाम से जाना जाता है। चूंकि इस पेड़ से सम्बन्धित धार्मिक मान्यता है यही कारण है कि इस पेड़ की लकड़ी का उपयोग किसी भी प्रकार से इमारती या फिर दूसरे व्यावसायिक कार्य में उपयोग नहीं किया जाता है।

ट्रैकिंग करके इस मन्दिर में पहुचा जा सकता है आसानी से

यह सुरकंडा मंदिर प्रसिद्ध धनोल्टी स्थल के बिल्कुल ही समीप में स्थित है। जिस वजह से यहां पर रूकने के लिए हर प्रकार के ऑप्शन है। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए चढ़ाई सड़क रास्ते से ही स्टार्ट हो जाती है।

अगर ट्रैकिंग से किसी भी प्रकार की समस्या नहीं है, तो यहा पहुंचने में कोई भी दिक्कतों का सामना आपको नहीं करना होगा। यहा 2 किमी की ट्रैकिंग करके पहुंचा जा सकता है।

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