
Bhagalpur: जब कोई स्टूडेंन्ट अपने स्कूल या फिर कॉलेज में ही पढ़ने के बाद टीचर, प्रोफेसर या फिर दूसरी कोई बड़ी पोस्ट में सेलेक्ट होकर जाता है। तो सबसे ज्यादा खुश उस स्कूल या फिर कॉलेज की आथॉरिटी तथा टीचर्स को होती है। सफलता प्राप्त करना हर किसी का सपना होता है।
पढ़ाई, मेहनत यह वह चीजे है, जो एक सफल व्यक्ति बनने के लिये जरूरी मानी जाती है। भले ही हमारे अंदर हजार कमी हो पर अगर हमारा लक्ष्य अडिग है, तो सफलता की नई कहानी लिखने से हमे कोई नही रोक पाता है। जिसमें लक्ष्य के प्रति समर्पण है, वह हालातो से डरता नही है, बल्कि अपनी किस्मत से भी लड़कर उसे हासिल करता है।
आज की हमारी कहानी भागलपुर (Bhagalpur) मे रहने वाले कमल किशोर मंडल (Kamal Kishore Mandal) की है। आज कमल किशोर असिस्टेंट प्रोफेसर (Assistant Professor) है। लेकिन असिस्टेंट प्रोफेसर बनने का उनका यह सफर इतना कठिन और लंबा रहा है कि इसे जानकार कमल पर गर्व करने के लिये आप मजबूर हो जाएंगे।
आज कमल किसोर जिस यूनिवर्सिटी (Tilka Manjhi Bhagalpur University) में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर सेलेक्ट हुये है। उसी यूनिवर्सिटी में कमल किशोर ने एक गार्ड (Guard) तथा चपरासी (Peon) के रूप में काम किया है। कमल किशोर आज 42 वर्ष के है। उन्होने असिस्टेंट प्रोफेसर का पद अपने हार्ड वर्क तथा अपने लगन की बदौलत प्राप्त किया है।
इस लक्ष्य को उनहोंने अपने हालातो से लड़कर हासिल किया है। वह कहते है कि उनके हालात ने ही इस लक्ष्य को हालिस करने की प्रेरणा दी है। आज हम इस पोस्ट में कमल किशोर मंडल जी के सफर के बारे में डिटेल में जानेंगे।
कमल जी ने पॉलिटिकल साइंस से किया है ग्रेजुएशन
आपको बता दे कि पॉलिटिकल साइंस में कमल जी का स्नातक है। कमल बिहार राज्य से बीलोंग करते है उनके परिवार की हालात पहले से ही खराब थी। उनकें पिता चाय की स्टॉल लगाकर घर चलाते थे। घर की हालाते खराब थी लेकिन फिर भी परिवार वालो ने उन्हे ग्रेजुएशन करवाया। लेकिन घर की हालात इतनी खराब थी वह आगे कमल को नही पढ़ा सकते थे।
ऐसे में मजबूरी के चलते कमल को नौकरी की तलाश में 23 वर्ष की उम्र में ही निकलना पड़ा। उन्होंने 2003 से गार्ड की जॉब करना शुरू की। केवल 1 महीने नौकरी करने के बाद कमल का भागलपुर यूनिवर्सिटी में ट्रांसफर हो गया।
वह वहॉ गार्ड की जॉब कर रहे थे। जॉब करते करते ही उनका मन फिर से पढ़ाई करने का किया। 2009 में कमल जी ने एमए की पढ़ाई इस यूनिवर्सिटी से की। 2008 में उनकी नाईट गार्ड से चपरासी में जॉब ट्रांसफर कर दिया गया था।
इस तरह संघर्ष करते हुये आगे की पढ़ाई पूरी की
जब कमल जी ने एमए कर लिया तो पीएचडी करने की परमिशन उन्हें विभाग द्वारा मिल गई। हालांकि यह इजाजत उन्हें इतनी आसानी से नहीं मिली। इसके लिये उकनो काफी समय इंतजार करना पड़ा। 2012 में कमल किशोर जी को पीएचडी करने की परमिशन मिली।
उसके बाद 2013 में उन्होंने पीएचडी की पढ़ाई शुरू की। 2019 में उनका पीएचडी कंपलीट हो गया। उनको पीएचडी की डिग्री से यूनिवर्सिटी द्वारा सम्मानित किया गया। किशोर सुबह सुबह अपनी पढ़ाई करने के बाद में दिन मे ड्यूटी पूरा किया करते थे। उसके बाद में वह रात को अपना पाठ्यक्रम रिवाइस करते थे।
पीएचडी के बाद नेट किया क्वालिफाई
जब उन्होने पीएचडी पास कर ली तो उन्होने नेटी की भी परीक्षा उस समय दी। जिसे पास करके अच्छी जॉब की वह तालाश करने लगे। उन्होंने कई साल तक मेहनत की। कहते है जो मेहनत से पीछे नहीं हटते उनकी मदद स्वयं भगवान करते है। उनकी मेहनत 2020 में रंग लाई।
उन्हें बिहार की यूनिवर्सिटी कमीशन विभाग में 2020 में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद के लिये इंटरव्यू देने बुलाया गया। उनका वहॉं 12 लोगो से कॉम्पटीशन हुआ। इंटरव्यू में 12 लोगो से फाइट करके असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर वह चयनित हुये। 4 पद में से एक पद उनको प्राप्त हो गया।
जहॉं कि चपरासी की जॉब वही मिली असिस्टेंट प्रोफेसर की पोस्ट
इस सफर की सबसे अहम बात यह हुई की जिस कॉलेज में वह एक चपरासी की पोस्ट में कई साल तक कार्य करते रहे। जहॉं से उनहोंने अपनी आगे की पढ़ाई पीएचडी की एमए किया। वही पर उन्हें यह असिस्टेंट प्रोफेसर की पोस्ट दी गई। इसकी घोषणा इस साल ही मई में हुई।
किशोर मंडल जी की कहानी यह बताती है कि लक्ष्य के सामने कभी भी आपकी आर्थिक स्थिति बाधा नही आती। अगर मेहनत करने में आप पीछे नहीं हटते तो भले ही कुछ समय आपको इंतजार करना पड़े पर सफलता मिलती जरूर है।



