यह बेटी अपने क्षेत्र में मैट्रिक परीक्षा पास करने वाली पहली लड़की बनी, गांव के बच्चों को प्रेरणा दे रही

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Girl Student
First girl who qualified matric in this Bihar village. Girl Student Indira became first 10th pass girl student in Dubey Tola Village Bihar.

Patna: मैट्रिक या दसवीं की परीक्षा (10th Exam) हमारे देश में लगभग सभी पढ़े होते हैं और ये पढ़ाई के सफर में अहम भी मानी जाती है यह ऐसी परीक्षा है, जिसे हर कोई पास करता है। स्कूल लाइफ में इसका महत्व हैं, अक्सर ये कहते सुना है, की दसवीं कक्षा में अच्छे नंबर लाना, मैट्रिक की परीक्षा है फेल नहीं होना।

इसलिए हमारे भारत देश में हर कोई मेट्रिक (Matric) पढ़ा होता है, लेकिन आप यह जानकर हैरान होंगे कि हमारे देश में एक ऐसी भी जगह है, जहां के लोग पढाई से बहुत दूर हैं और आज तक कोई भी मैट्रिक की परीक्षा पास नहीं कर सका है। ये बात सुन के आप हैरान होंगे, लेकिन अजीब ही सही पर बात पूरी तरह से सच है, हम बात करेंगे एक ऐसे गाँव की जहाँ के लोग पढ़ ही नहीं पाते।

संसाधनो का आभाव भी पढ़ने के जस्बे को तोड़ नहीं पाया

हमारे भारत देश में सरकार शिक्षा के क्षेत्र में बहुत काम कर रही है, शहर शहर और गाँव गाँव में अभियान चलाये जा रहे हैं की हर कोई पढ़े और साक्षरता बढे। लेकिन फिर भी किसी किसी के लिए पढ़ाई बहुत कठिन हो जाती है, क्योंकि जहाँ संसाधनों की कमी हो, वहां पढाई कैसे करें और पढ़ने के लिए प्रेरित भी कौन करे।

ऐसे माहौल में यदि कोई पढ़ना चाहे, तो उसके हौसले बहुत बुलंद होंगे और मन में विश्वास के साथ बाहरी कठनाइयों को किनारे करते हुए पढ़ने का जस्बा होगा तभी पढाई हो सकेगी, क्यों की आसपास पढाई का कोई वातावरण ही नहीं है, ऐसे में हम बताने जा रहे हैं एक ऐसी लड़की के बारे में जिसकी लगन और मेहनत से वो मेट्रिक पास हो गयी।

निरक्षर लोगो के बीच साक्षरता की पहल

आज हम आपको जिस गांव के बारे में बात कर रहे हैं, उसका नाम दुबे टोली है, दुबे टोली भारत के बिहार राज्य में एक गांव (Bihar Village) है, इस गांव में एक विशेष समुदाय के लोग काफी ज्यादा है। इस गांव के लोगों के बारे में बताएं तो इस गांव में लगभग ढाई सौ घर होंगे, जहां लगभग 1000 लोग तो रहते होंगे।

इन हज़ार लोगों में से 90 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जो एक ही समुदाय से सम्बन्ध रखते हैं। लगभग सौ लोग ही हैं, जो पंडित या फिर जाट या और दूसरे जाती के हैं। इस गांव में शिक्षा इतनी ज्यादा पिछड़ी है कि, आज साल 2022 के समय में जहाँ देश में शिक्षा का स्तर इतने ऊँचा उठा है। उसके बाद भी, इस गांव में आज तक कोई मैट्रिक तक भी की नहीं पढ़ा कितनो ने शाला तक नहीं देखि होगी की कैसी होती है।

हुआ समुदाय और गांव का नाम रोशन

इस गांव का नाम अचानक से चर्चाओं में आने लगा गया, जब इस गांव की ही एक लड़की ने मैट्रिक की पढ़ाई कर परीक्षा पास कर ली। ये लड़की जिस के बारे में हम बात कर रहे हैं उस लड़की का नाम इंदिरा (Indira) है।

इंदिरा ने मैट्रिक की परीक्षा पास कर ली है। जैसे ही इंदिरा ने मैट्रिक की उसके बाद से इंदिरा और उसका गांव चर्चा में आने लगा हर तरफ से लोग इस गांव के बारे में चर्चा कर रहे हैं, क्योंकि मुसहर समाज में इतना पढ़ लिख जाना बहुत बड़ी बात है।

इंदिरा को जब उसके रिजल्ट के बारे मे फोन पर दूसरी तरफ से सूचना दी गयी कि वह पास हो गई है, तो इंदिरा ज़ोर से रो पड़ी। इंदिरा ने रिजल्ट पर बात करते हुए कहा, मैं बहुत ज्यादा खुश हूं। मैं परीक्षा परिणाम को लेकर बहुत टेंशन में थी। बार बार सोच कर मन घबरा रहा था, इंदिरा ने आगे भी पढ़ने की इच्छा जताई है और कहा कि वह शिक्षक बन ने की चाह रखती है।

अब बदलेगी मुसहर समुदाय की तस्वीर और बढ़ेगी साक्षरता

आपको जानकारी के लिए बता दें कि बिहार (Bihar) के दुबे टोली गांव (Dubey Tola Village) में मुसहर जाती की जनसंख्या सबसे ज्यादा है। आज भी भारत देश में मुसहर समुदाय के लोग पढ़ाई लिखाई से काफी दूर है।

ऐसा माना जाता है कि मुसहर समुदाय में शिक्षा की बहुत कमी है और भारत सरकार ने कई महादलित समुदाय के लिए शिक्षा के कई योजनाओं को अभियान के रूप में शुरू किया है, लेकिन इसके बाद भी इस समुदाय में पढ़ने लिखने और साक्षर लोगों की बहुत कमी है। साक्षरता की इस कमी को इंदिरा शिक्षक बन के और दूसरों को प्रेरणा दे कर दूर करेंगी।

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