बिहार की इस बेटी ने माउंट एवरेस्ट की 18 हजार फीट की ऊंची चोटी पर तिरंगा फहराकर कारनामा किया

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Anisha Dubey Jamui
Bihar Jamui’s Anisha Dubey hoisted the tricolor on Mount Everest, Anisha Dubey climbed 18000 feet of Mount Everest in 13 days.

Jamui: देश की बेटियां इतनी आगे बढ़ रही हैं, जिसका अंदाजा हम कर भी नहीं सकते। लोग कहते हैं कि कुछ काम लड़कियों और औरतों के बस की बात नहीं होती, परंतु बेटियों ने इस बात को साबित किया है कि उनसे कोई भी काम नहीं छूट सकता हैं।

शरीर की मजबूती ही व्यक्ति का उपहार होता है, जिसके बल पर व्यक्ति हर काम को अंजाम देता है। लोग कहते हैं कि लड़कियां कमजोर होती है, परंतु वे यह क्यों भूल जाते हैं कि एक बच्चे को जन्म देने पर कई हड्डियां एक साथ टूटने जितना दर्द सहन करती है। तो फिर बेटियां कमजोर कैसे हुई।

आज हम एक ऐसी ही बेटी के बारे में बात करेंगे, जिसने अपनी हिम्मत से माउंट एवरेस्ट की 18000 फीट ऊंची चोटी पर भारत का तिरंगा लहरा कर भारत की शान बढ़ाई हैं।

आपको बता दें जमुई (Jamui) की रहने वाली बिटिया अनीशा (Anisha Dubey) एक बहुत अच्छी पर्वतारोहण हैं, उन्होंने एवरेस्ट बेसकैंप से 18 हजार फीट (18000 Feet High) की चढ़ाई की। तो आइए विस्तार से जाने इस बेटी के बारे में और किस तरह उसने इस चढ़ाई को पूरा किया।

जाने पर्वतारोहण अनीशा की कहानी

बिहार (Bihar) राज्य के अंतर्गत आने वाला 1 गांव जिसका नाम जमुई है, वहां की रहने वाली अनीशा दुबे बचपन से ही पर्वतारोहण और पेंटिंग का शौक रखती थी। अनीशा की उम्र 24 वर्ष है और वे माउंट एवरेस्ट (Mount Everest) की चोटी को फतह कर चुकी हैं यह हमारे देश के लिए बहुत ही गर्व की बात है कि अनीशा ने दूसरे देश में हमारे देश का तिरंगा लहराए।

बिहार की शान अनीशा जब छोटी थी, तभी से ही उनके अंदर ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों मैं चलने और ऊंचाइयां उन्हें खूब भाती थी, इसीलिए उन्होंने इसी क्षेत्र में काम करने का विचार किया और आज वे सफल हुई।

कहते हैं ईश्वर हर व्यक्ति के अंदर एक छुपी हुई कला भेजता है, जो किसी के माध्यम से उस व्यक्ति के बाहर दिखाई पड़ती है, यही कला अनीशा दुबे में भी रहे, जो उनके परिवार ने समझी और उसे निखारा।

18000 फीट ऊंचाई पर जाने के पश्चात अब 19 फीट की ऊंचाई जाने की तैयारी

अनीशा ने 18000 फीट की ऊंचाई पर तिरंगा फतह करने के बाद अब उनका प्रयास 19 फीट ऊंची जो देश की सबसे ऊंची चोटी है, पर तिरंगा फतह करने की तैयारी चल रही है। उनका कहना है कि वे किसी भी कीमत पर नहीं रुकना चाहती वह केवल आगे बढ़ना चाहती है।

वे अपने देश के तिरंगे को उस चौथी और सबसे ऊंची चोटी पर लहराते देखना चाहती हैं। देश के प्रति लगाओ अनीशा का बचपन से है, वह अपने देश के लिए बहुत कुछ करना चाहती हैं और उनकी तैयारी इसी दिशा में आगे चल रही है।

घर लौटी तो हुआ भव्य स्वागत

माउंट एवरेस्ट की 18000 फीट ऊंची पहाड़ी पर तिरंगा फतह करने के बाद जब अनीशा अपने घर याने जमुई लौटी, तो वहां के लोगों ने उनका भव्य स्वागत किया फूलों की माला के साथ उन्हें सम्मानित किया गया।

अनीशा बताती हैं कि जब वे माउंट एवरेस्ट के शिखर की चढ़ाई कर रही थी। उस समय वहां का मौसम बहुत ही ज्यादा खराब था इसकी वजह से उन्हें कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ा।

वे इन मुश्किलों में लड़ते हुए भूखे पेट केवल चढ़ाई करने पर मग्न थी। वह माउंट एवरेस्ट की सबसे ऊंची शिखर पर हमारे देश का तिरंगा लहराते हुए देखना चाहती थी, इसीलिए उन्होंने अपने कठिन परिश्रम से इस सफलता को हासिल किया।

पिता के खोने के बाद मां बनी ताकत

आपको बता दें कि अनीशा दुबे के सिर से उनके पिता का साया उनके बहुत बचपन में मात्र 2 वर्ष की उम्र में ही उठ गया था। पिता के जाने के बाद मां ने ही एक मां के साथ-साथ पिता का भी फर्ज निभाया पिता की तरह उनका पालन पोषण किया और मां की तरह संस्कार दिए।

अनीशा बचपन से ही पेंटिंग करने की शौकीन थी, इस क्षेत्र में उन्हें ढेर सारे पुरस्कार मिले मां के आशीर्वाद ने बेटी को आगे की तरफ बढ़ने का हौसला दिया इसीलिए आज वे एक अच्छी पर्वतारोही बन सकी।

आपको बता दें कि 18000 फीट की ऊंचाई चढ़ने के पहले भी अनीशा ने हिमाचल प्रदेश के माउंट पतालसू की 14000 फीट ऊंची चोटी पर चढ़कर हमारी देश की आन बान शान को लहराया (Hoisted Tricolor) था। भारत की इस बेटी को हम ढेर सारी शुभकामनाएं देते हैं और उनके उज्वल भविष्य की कामना करते हैं।

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