स्वतंत्रता सेनानी ने स्वदेशी कंपनी Ashok Leyland खड़ी कर भारतीय सेना की ताकत ऐसे बढ़ा दी थी

0
5868
Ashok Leyland Story
Success Story of Raghunandan Saran who is the Founder of Ashok Leyland. How Ashok Leyland company made Indian Army more strong.

Delhi: जब भी हम बात बड़ें ट्रको कि या फिर बसों कि बात करते है। तो विभिन्‍न कंपनियों के नाम लेने से पहले हम अशोक लेलैंड कंपनी की पहले बात करते है। क्‍योंकि इस कंपनी ने अपना साम्राज्‍य इस क्षेत्र में इतना बड़ा कर लिया है, कि सबसे पहले इसी कंपनी नाम जुबान पर आ जाता है।

इसका साम्राज्‍य जितना बड़ा है। उतनी ही इंटरेसिटंग इस कंपनी की शुरूआत की कहानी है। अशोक लेलैंड (Ashok Leyland) कंपनी के वाहन हमें सड़कों पर अक्‍सर दौड़ते दिखते है। हमारी सेना में भी इस कंपनी के ट्रकों का उपयोग किया जाता है।

इसी वजह से हमारे देश में इस कंपनी को सबसे बड़ी भारी वाहन निर्माता कंपनी का दर्जा दिया जाता है। आज हम इस पोस्‍ट के जरिये, आपको अशोक लेलैंड कंपनी के सफर के बारे में बताएंगे। आइये इस कंपनी के विषय में विस्‍तार से चर्चा करते है।

मोटर वर्कशॉप के शख्‍स ने शुरू कि कंपनी

इस कंपनी को एक मोटर वर्कशॉप (Motor Workshop) में काम करने वाले व्‍यक्‍ति ने बनाया था। इस शख्‍स ने अपनी मेहनत से इतना बड़ा एम्‍पायर खड़ा किया। ऐसा माना जाता है कि भारत में पहली डबल डेकर बस (Double Decker Bus) तथा पहली ट्रक अशोक लेलैंड कंपनी की ही देन है। हम जिस शख्‍स की कहानी आपको बताने वाले है। वह इस कंपनी का सिर्फ निर्माता नहीं है। बल्‍कि वह एक स्‍वतंत्रता सेनानी (Freedom Fighter) भी रहे है।

देश के प्रधानमंत्री की बात मानकार किया इन्‍वेस्‍ट

जब हमारा देश 1947 में आजाद हुआ उस समय हमारे देश भारत कि आर्थिक स्थिति बहुत ही खराब थी। इसे मजबूत बनाने की चुनौती उस सबसे बड़ी थी। इस चुनौती से बाहर निकलने के लिए सबसे सही तरीका भारत को अमीर उद्योग की और बढ़ाने का था।

इसलिए उस समय के तत्‍काल प्रधानमंत्री पण्डित जवाहरलाल नेहरू ने 1948 में पंजाब राज्‍य के स्‍वतंत्रता सेनानी से आधुनिक उद्योग में पेसे लगाने को कहा। यह स्‍वतंत्रता सेनानी देश में अपना योगदान देने के लिए पहले से ही बहुत आतुर थे। अत: उन्‍होंने देश के प्रधानमंत्री की बात को मानी और आधुनिक उद्योग में पैसे इंन्‍वेस्‍ट किये।

स्‍वतंत्रता सेनानी रघुनंदन सरन ने बेटे का नाम दिया कंपनी को

हम जिस स्‍वतंत्रता सेनानी की बात कर रहे है। उनका नाम रघुनंदन सरन (Raghunandan Saran) जी है। जो कि देश के आजाद होने के पहले रावलपिंडी में रहा करते थे। वही पर वह अपने पिताजी की मोटर वर्कशॉप चलाते थे। रघुनंदन जी के पिताजी अपने शहर के अमीर शख्सियत में से एक थे।

इस वजह से रघुनंदन जी का भी सम्‍मान हुआ करता था। लेकिन रघुनंदन जी अपने दम पर कुछ करके अपनी मेहनम से सम्‍मान पाना चाहले थे। इसलिए जब देश के आजाद होने के बाद उन्‍हें देश के लिए कुछ करने का मौका मिला तो वह पीछे नहीं हटे 1948 में उन्‍होंने पण्डित जवाहर लाल नेहरू जी की बात मानकर आधुनिक उद्योग में पैसे इन्‍वेस्‍ट करके नया बिजनेस में कदम रखा।

रघुनंदन जी ने अपनी कंपनी शुरू की जिसका नाम उन्‍होंने अपने बेटे अशोक के नाम पर रखा। उन्‍होंने अशोक मोटर्स नाम से कंपनी शुरू कर दी इसका नाम अशोक लेलैंड ब्रिटिश कंपनी लेलैंड से हुये एग्रीमेंड की वजह से पड़ा।

ब्रिटिश कंपनी लेलैंड से समझोते की वजह नाम हुआ परिवर्तित

इस कंपनी को कमर्शियल व्‍हीकल बनाने में सहायता हो इसलिए ही इस कंपनी ने ब्रिटिश लेलैंड कंपनी के साथ एग्रीमेंट किया था। अशोक लेलैंड कंपनी को मद्रास सरकार ने भी सहायता दी। जिस वहज से आज वह इस मुकाम पर पहँच पाई है। इस कंपनी ने ही देश का पहला ट्रक तैयार किया था।

तमिलनाडू में इस कंपनी के प्‍लांट ने सबसे पहले ट्रक कॉमेट 350 नाम का ट्रक बनाया था। इस ट्रक को कंपनी ने मैंगलोर टाइल को बेचा था। इसके बाद कंपनी को 1000 ट्रक बनाने का लाइसेंस दिया गया था। धीरे धीरे अशोक लेलैंड कंपनी कामयाबी के शिखर में पहुँचने लगी। लेकिन रघुनंदन जी अपनी कंपनी की कामयाबी अपनी आंखो से नहीं देख पाए।

सक्‍सेस देखे बिना मृत्‍यू को प्राप्‍त हुये रघुनंदन

1953 में अशोक लेलैंड कंपनी के मालिक रघुनंदन जी की मृत्‍यू हो गई। एक एयर क्रैश में उनकी जान चली गई। उनकी मृत्‍यू हो जाने के बाद में इस कंपनी की बागडोर राज्‍य मद्रास तथा कंपनी के कुछ शेयरधारको ने ले ली। 1954 में अशोक मोटर्स और लेलैंड मोटर्स दोनों ही ऑफिशियल तरीके से पार्टनर बन गये और इस कंपनी को अशोक लेलैंड नाम से जाना जाने लगा।

ट्रक के निर्माण के बाद इस कंपनी ने नई कामयाबी उस समय प्राप्‍त की। जब कपंनी ने डबल डेकर बस बनाने का सोचा। 1967 मे इस कंपनी ने डबल डेकर बस बनाई, जो भारत की सड़को पर दोड़ने लगी। इस बस को हमारे देश भारत में स्‍वयं की तकनीक से ही विकसित किया गया था।

1970 में इसी कंपनी ने देश की सेना के लिए दस हजार ट्रक बनाये। अशोक लेलैंड ने इतने मजबूत और आधुनिक ट्रक सेना को बनाके दिए कि इस कंपनी की चर्चा हर जगह होने लगी। इसके साथ ही यह कंपनी कामयाबी के शिखर पर पहुँच गई।

आज हिंदूजा ग्रुप है कंपनी का मालिक

मोटर वर्कशॉप चलाने वाले एक स्‍वतंत्रता सेनानी रघुनंदन की कंपनी आज इतनी कामयाब है कि वह पूरे विश्‍व में तीसरी सबसे अधिक बस बनाने वाली कंपनी है। इसके साथ ही यह कंपनी दसवी सबसे ज्‍यादा ट्रक बनाने वाली कंपनी में अपनी जगह बनाये हुए है। इस कंपनी ने वर्ष 2011 में जॉन डियर अमेरिकी कंपनी के साथ में हाथ भी मिलाया है।

वही आज की बात की जाये तो इस कंपनी का मालिकाना हक हिंदुजा ग्रुप (Hinduja Group) के पास है। क्‍योंकि कंपनी के 51 प्रतिशत शेयर हिंदुजा ग्रुप के पास है। आज की बात करें तो अशोक लेलैंड कंपनी हिंदुजा ग्रुप का बड़ा ब्राण्‍ड बन गया है। आज यह कंपनी कमर्शियल वाहन, मल्‍टी टाइप बस और ट्रक निर्माण के लिए प्रसिद्ध है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here