
Raipur: संस्कृत भाषा (Sanskrit Language) पौराणिक भाषा है हमारे देव ग्रंथ जैसे भगवत गीता, रामायण, महाभारत भी इसी भाषा में लिखे गए है। देश में कई विद्यालय है जिसमे मुख्यता संस्कृत पढ़ाई जाती है। पंडितो के लिए यह भाषा काफी खास होती है, क्योंकि उनके द्वारा कराई जाने वाली पूजा में सभी श्लोक संस्कृत में होते है।
हिंदी भाषा की उत्पत्ति संस्कृत भाषा से ही मानी जाती है। प्राचीन काल में संस्कृत ही बोली जाती थी, परंतु धीरे धीरे समय बदला और लोगो की सोच भी। लोगो ने हिंदी के साथ अंग्रेजी बोलना भी प्रारंभ कर दिया। देश में अंग्रेजी भाषा को ज्यादा अहमियत दी जाने लगी।
तो सरकार ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया उन्होंने कहा कि हम भारत देश के वासी है और हिंदी हमारी भाषा है इसी लिए हिंदी भाषा को ज्यादा मान्यता मिलनी चाहिए इसके साथ ही संस्कृत विषय भी अनिवार्य कर दिया । इसी बीच एक बिटिया ने संस्कृत विषय में 100 में से 100 अंक प्राप्त कर एक रिकॉर्ड बना लिया। तो आइए जानते है कौन है वह बिटिया।
देश में सीबीएसएसी ने घोषित किया रिजल्ट
विद्यार्थियों के लंबे इंतजार को खत्म करते हुते सीबीएसई ने 12वीं के रिजल्ट की। घोषणा कर दी है। साथ ही टॉपर्स की सूची भी सामने आई। देश में एक बार फिर लड़कियों ने बाजी मार ली। इस बार फिर लड़के पीछे रह गए।
12वीं के परिणाम की घोषणा होते ही टॉप करने वाली बेटियो के घर जाकर उनका इंटरव्यू लिया गया। जिससे अभिभावकों ने भी अपने बच्चों के बारे में जानकारी दी। एक इंटरव्यू उस बेटी से भी लिया गया, जिसने 99 प्रतिशत अंक प्राप्त किए है और संस्कृत विषय में 100 में से 100 अंक हासिल कर एक अलग ही तरह का इतिहास रचा है। इस बेटी का नाम शांभवी है और इन्हे संस्कृत से काफी ज्यादा लगाव है।
छत्तीसगढ़ की शांभवी
छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) राज्य की राजधानी रायपुर (Raipur) जिले की निवासी शांभवी ने कक्षा 12वी की परीक्षा सीबीएसई से दी। जब रिजल्ट की घोषणा हुई, तो उन्होंने इस परीक्षा में 99 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। उनके अंको का आवंटन हुआ तो पता चला कि उन्हें संस्कृत विषय में 100 में से 100 अंक मिले है।
इसी कारण से शांभवी (Shambhavi) लोगो में चर्चा का विषय बनी है। बच्चो की परीक्षा के अच्छे परिणाम से उनका घर खुशियों से भरा हुआ है, शांभवी के घर का मंजर भी कुछ इसी तरह है। उनके घर में भी सभी लोग उनकी सफलता से खुश है और खुशी में झूमते हुए नजर आ रहे है। परंतु एक बात सोचने वाली है की उन्हें संस्कृत से इतना लगाव कैसे है, जबकि स्टूडेंट संस्कृत विषय से भी डरते है।
इंटरव्यू के माध्यम से उनसे पूछा गया की आपको संस्कृत विषय इतना पसंद क्यो है, तो उन्होंने अपने उत्तर में कहा की उनके घर परिवार का पूरा वातावरण संस्कृत का ही है। वे बताती है की उनके स्कूल में पहले संस्कृत विषय नहीं पढ़ाया जाता था पर जब उन्होंने बोला, तो स्कूल मे संस्कृत विषय की कक्षाएं भी लगने लगी। शांभवी के दादा जी भी उन्हे घर पर संस्कृत पढ़ाया करते थे। इसलिए आज वे संस्कृत में शत प्रतिशत ला सकी।
घर में संस्कृतमई माहौल है
शांभवी कहती है की उन्हें उनके परिवार में बचपन से ही संस्कृत का माहोल मिला है। जब वे छोटी थी तो उनके दादा जी संस्कृत में रामायण और श्लोक पढ़ा करते थे और वे बड़े ध्यान से उनको सुनती थी। तभी से ही उनका संस्कृत के प्रति लगाव बढ़ा और उनके दादा जी ने उन्हे संस्कृत सीखने में मदद भी की।
रायपुर छत्तीसगढ़ की बेटी ने संस्कृत में हासिल किए 100 में से 100 अंक, लडक़ी के लिए स्कूल में स्पेशल शुरू हुआ था संस्कृत कोर्स। pic.twitter.com/ujw50wLzlH
— sanatanpath (@sanatanpath) August 6, 2022
अब उन्होंने कॉलेज में भी संस्कृत विषय चुना है। वे बताती है की संस्कृत उनका सबसे खास सब्जेक्ट है। शांभवी को संस्कृत पढ़ने में कोई परेशानी नहीं होती। उन्होंने प्रोफेशनल टीचर से संस्कृत सीखी है। और उनके दादा जी ने खुद उन्हे पढ़ाया है। आज उनकी मेहनत सफल हुई और उन्होंने यह सफलता प्राप्त की।
शांभवी का सपना एक रिपोर्टर बनने का है
शांभवी ने अपने करियर के बारे में बताते हुए कहा की वे एक रिपोर्टर बनना चाहती है और वे अब पत्रकारिता की पढ़ाई करेंगी। शांभवी ने अपने जेसे और भी विद्यार्थियों तक अपना मैसेज पहुंचाते हुए कहा की। जो इस परीक्षा में जो असफल हुए है या फिर परीक्षा देने जा रहे हैं।
वे अपना मन लगाकर पढ़ाई करें और अपना 100 प्रतिशत दें तो उन्हे सफलता जरूर मिलेगी और कभी भी किसी भी परीक्षा में हार नही मानना चाहिए हमेशा प्रयासरत रहने वाला व्यक्ति ही सफल होता है।



