Indore: सोशल मीडिया पर तो हर दिन कुछ न कुछ वायरल होते रहता है, कुछ मनोरंज के लिए, तो कुछ मोटिवेट करने के लिए। भारत देश में हर दिन लाखो युवा सफलता पाने के लिए तैयारी कर रहे हैं। वह अपने सपने और करियर में सफलता के लिए रणनीति बना रहे है।
पहले का समय कुछ और था लोग मजदूरी और कृषि से अपना पेट पाल लेते थे। परंतु वर्तमान समय में जनसंख्या बढ़ गई है और साधन भी नियमित ही बचे है, साथ ही लोगो को सरकारी नोकरी के मायने समझ आ गए है। जिससे लोगो में प्रतिस्पर्धा का माहोल बन गया है। हर दिन हर एक परीक्षा के लिए लोगो में कंप्टीशन बढ़ रहा है।
पहले तो 12वी के प्रतिशतों से नोकरी मिल जाती थी। परंतु अब हर एक पोस्ट के लिए इंट्रेस्ट एग्जाम क्लियर करना होता है। भारत में राज्य स्तर से लेकर संपूर्ण भारत स्तर तक के परीक्षाएं आयोजित की जाती है। UPSC, NDA, NET, GATE, IIT और कई सारे एग्जाम सबसे कठिन एग्जाम होते है।
डिफेंस के क्षेत्र का सबसे कठिन एग्जाम UPSC जिसमे लाखो युवा कर वर्ष एक उम्मीद के साथ बैठे है, देश का हर युवा खाकी वर्दी का सपना देखता है और सपना उसी का पूरा होता है, जो निरंतर प्रयास करता है। ऐसी ही एक बेटी है, जिसने 6 बार असफलता के बाद भी सातवीं बार में अपना लक्ष्य पूरा किया आइए जानते है, उसकी सफलता का सफर।
UPSC परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षा कहा गया है। क्योंकि यह परीक्षा 3 हिस्सो में पूरी होती है। यदि एक हिस्से में भी असफल हुए, तो आपको दोवारा से पहले हिस्से से शुरू करना पड़ता है, इसलिए यह परीक्षा सबसे कठिन परीक्षा है।
सिविल सेवा परीक्षा में सफलता पाना अपने आप में ही एक सबसे बड़ी कामयाबी है। इस सफर में कई सारी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। तब जाकर सफलता मिलती है। इन सब का उदाहरण स्वयं IAS पल्लवी वर्मा (IAS Pallavi Verma) है। जो UPSC वर्ष 2020 में ऑल इंडिया में 340 वी रेंक प्राप्त कर पल्लवी वर्मा से आईएएस पल्लवी वर्मा बन गई। इस सफलता के लिए इनका सफर बहुत मुस्किल था। काफी इंतजार के बाद 7वें प्रयास में वे सफल हुई है।
इंदौर की पल्लवी वर्मा
मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) राज्य के इंदौर (Indore) जिले की निवासी पल्लवी वर्मा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा इंदौर जिसे उद्योग नगरी भी कहते है। से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने बायोटेक्नोलॉजी से अपना स्नातक पूर्ण किया। वे परिवार की पहली ऐसी लड़की थीं जो यूनिवर्सिटी गई और पढ़ाई की।
अपनी पढ़ाई पूरी कर पल्लवी चेन्नई चली गई और वहा पर करीब एक वर्ष तक सॉफ्टवेयर टेस्टर (Software Tester) के पद काम किया। इसके बाद वर्ष 2013 से उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा (Civil Service Exam) की तैयारी प्रारंभ कर दी और पूरी तरह खुद को समर्पित कर दिया।
सातवे प्रयास में मिली कामयाबी
पल्लवी का सफर बिलकुल भी आसान नहीं था। उनको लगातार असफलता ही हाथ लग रही थी। परंतु वे गबराई नही बस अपनी मेहनत करते रही। 2013 से उनका सफर शुरू हुआ और 2020 तक चला।

इस सफर में वे 3 बार प्रीलिम्स 2 बार मेन्स और 2 बार इंटरव्यू में असफल हुई। परंतु उनकी हिम्मत और हौसला कबीले तारीफ है। सफलता के इतने करीब पहुंचने के बाद असफलता को फेस करना बहुत मुस्किल होता है। 2020 में उनका 7वा प्रयास सफल रहा। उन्होंने ऑल इंडिया में 340 रैंक (UPSC CSE 2020 with AIR 340) प्राप्त कर अपना लक्ष्य पूरा कर आईएएस ऑफिसर बनी।
पल्लवी की मां एक कैं-सर की मरीज है।
किस्मत तो तो इस बार भी पल्लवी के साथ नही थी। जब वे UPSC 2020 की परीक्षा के लिए फार्म भर रही थी तब पल्लवी की माता कैं-सर की बीमारी से लड़ रही थी। मां का इलाज, की-मोथेरिपी के बाद की परेशानी और घर की जिम्मेदारियों में फसी पल्लवी ने शांति से काम किया। मां की सेवा और पढ़ाई दोनो को बहुत अच्छी तरह निभाया। अपनी काबिलियत से उन्होंने हर मुसीबत को फेस करते हुए आगे बढ़ती रही। अखिरकार वे सफल हुई।




