माँ-बेटी की इस जोड़ी ने 50,000 से शुरू किया बिज़नेस, अब सालाना 15 करोड़ रुपये का व्यवसाय हो रहा

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Hetal and Lekhinee Desai
This mother-daughter duo launched an ethnic wear brand from home and earned Rs 15Cr. Mother-daughter duo Hetal and Lekhinee Desai business.

Photo Credits: Lekhinee Desai on Social Media

Mumbai: पुराने समय और अभी के समय में बहुत अंतर आ चुका है। पहले बेटियो की शादी की उम्र हुई और माता पिता को लगने लगता कि बस शादी करके बेटी का फर्ज अदा करके वे फुर्सत हो जाएंगे। परंतु माता पिता अपनी बेटी के सपने और शौक को कभी पहचान नहीं पाते। ऐसे में भारत की 25 प्रतिशत महिलयो के सपने सिर्फ सपने ही रह जाते।

आज के समय में लोग अपनी कला से करोडो रूपये कमा लेते है। यदि आज की महिलाएँ इतनी काबिल है तो पुराने समय की महिलाओं में भी तो क़ाबिलियत हुआ करती थी। आधुनिक समय की महिलाए शिक्षा और ज्ञान से आज बहुत बड़ी बड़ी कंपनी की मालकिल बनी हुई है।

प्राइवेट सेक्टर से लेकर सरकारी सेक्टर तक महिलाए अपना परचम लहरा रही है और पुराने समय की महिलाए भले खूब पढ़ लिख नहीं पाती थी, परंतु वे कला में निपुर्ण होती थी। जैसे खाना, सिलाई, बुनाई कढ़ाई आदि। आज की कहानी भी एक ऐसी माँ बेटी की जोड़ी पर है, जिसने अपनी माँ के साथ मिलकर 15 करोड़ का व्यापार खड़ा कर लिया आइये जानते है, उनके संघर्ष से सफलता तक का सफर।

50 हजार रुपये की लागत से शुरू किया व्यापार आज 15 करोड़ तक पहुच गया

इंसान अपने जीवन में हर वो काम कर सकता है जिसे वो चाहता है। बस जरुरत विश्वास और मेहनत की होती है। किसी भी काम को करने की कोई उम्र नहीं होती है। कहते है जब जागो तभी सवेरा। एक माँ बेटे की जोड़ी है, जिन्होंने केवल 50000 रूपये से अपना व्यापार शुरू किया और आज अपने व्यापार को 15 करोड़ तक पहुचा दिया।

Money in India
Money Presentation Photo

कहते है काम कोई भी छोटा या बड़ा नहीं होता बस जरुरत हमें एक अच्छी शुरुआत की होती है और यही बात को ध्यान में रख कर हेतल और उनकी बेटी लेखनी ने कपड़ो का व्यापार शुरू किया। हेतल देसाई की उम्र 58 वर्ष है और वे स्वयं कपडे डिजाइन करती है। लेखनी देसाई (Lekhinee Desai) ने कभी मार्किट से अपने लिए कपडे नहीं ख़रीदे। उन्होंने हमेसा अपनी माँ के डिजाइन किए हुए कपडे पहने है।

आज की इस फैशन की दुनिया में कई तरह के कपडे आते है। फिर भी लेखनी ने माँ के द्वारा बनाए कपडे ही पहने। लेखनी बताती है कि जब भी वे बाहर अपनी माँ (Hetal Desai) के डिजाइन किए हुए कपडे पहन कर कही जाती थी तो लोग उनसे पूछा करते थे की ये कपडे कहा से लिए है।

लेखनी की माँ की ग्राहक बॉलीवुड की गायक कविता कृष्णमूर्ति रही

लेखनी वर्ष 2016 को याद करते हुए कहती है कि मुझे ऐसा लगा की माँ अब फ्री रहती है और अकेले बोर होते रहती है। इसी लिए उनके खाली समय का उपयोग करना चाहिए। जिससे माँ व्यस्त रहेंगी और बोर नहीं होंगी। इसलिए उन्होंने अपनी माँ के टेलेंट को बिज़नेस में कन्वर्ट करने का फैसला लिया। उनकी माँ पहले भी कुछ समय एक दर्जी के पास डिजाइनर से सम्बंधित कार्य कर चुकी थी।

उस वक्त वे बॉलीवुड की गायक कविता कृष्णमूर्ति का काम किया करती थी। उसके बाद जब उनकी बेटियों का जन्म हुआ, तो वे उनके पालन पोषण में व्यस्त हो गई। और उन्हें काम छोड़ना पड़ा। एक बार फिर वे अपना काम शुरू कर रही थी, पर इस बार अकेले नहीं, उनकी बेटी के साथ।

1800 और 1700 से शुरू है कुर्ते और साड़ी के मूल्य

लेखनी ने अपनी माँ के नाम से सोशल मीडिया में फेसबुक पेज बनाया है और वे इस पेज पर उनकी माँ के बनाए हुए कपडे और डिजाइन की पिक्चर्स पोस्ट करती है। शुरुआत तो थोड़ी कठिन थी, परंतु जब उन्हें पहला ऑर्डर गोवा से मिला, तो लेखनी की ख़ुशी का तो ठिकाना ही नहीं था।

इसके बाद से ही उनका काम दिन दोगुना रात चौगुना बढ़ने लगा। काम बढ़ते ही उनको अब कुछ कारीगरों की जरूरत पड़ने लगी। देखते ही देखते उनके साथ कम से कम 100 से भी अधिक कारीगर जुड़ गए हैं। उनके द्वारा निर्मित कुर्ते का मूल्य 1880 से शुरू है और साड़ी का मूल्य 1700 से शुरू है।

सोशल मीडिया से मिली मदद

सोशल मीडिया से ही उन्हें व्यापार (Indian Ethnic Company) में इतनी सफलता मिल सकी है। उन्हें देश के अलावा भी विदेशों से आर्डर आ रहे हैं। न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, जापान, यूके जैसे देशों से भी ओर्डर आते है और वे उन्हें पूरा भी करती है।

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