
Photo Credits: Jawaharlal Nehru Krishi Vishwavidyalaya
Jabalpur: माना जाता है कि आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है। इसी वाक्य को पूरा करके दिखाया है, मध्यप्रदेश के आदिवासी जिले मंडला (Mandla) के रहने वाले अमृतलाल धनगर ने। वैसे तो हमारे देश के किसान बहुत जुगाड़ू हैं।
एक ऐसा जुगाड़ अमृतलाल धनगर (Amrit Lal Dhangar) ने बनाया है, जिसकी मदद से किसानों को अपने खेतों में फसल बोने के लिए आसानी होगी। वह भी इतने कम पैसों में तैयार किया है, जिसे छोटे से छोटा किसान आसानी से खरीद सकता है।
उन्होंने अपने पास जो भी संसाधन मौजूद थे, उन्हीं की मदद से एक मजबूत और सस्ती सी ड्रिल मशीन बना बना दी। अमृत लाल जी अपनी 5 एकड़ जमीन में ब्रॉडकास्टिंग विधि से धान और गेहूं, चना की बुवाई करते थे। लेकिन वह इस विधि से संतुष्ट नहीं थे, क्योंकि इसमें पौधे से पौधे और कतार से कतार की दूरी कोई निश्चित नहीं होती है।
इस विधि में बीज की भी ज्यादा जरूरत पड़ती है और सारे बीच अंकुरित भी नहीं होते, जिससे उत्पादन पर काफी प्रभाव पड़ता है। इसी समस्या को दूर करने के लिए अमृत लाल जी अपने जिले के kvk (कृषि विज्ञान केंद्र) से संपर्क किया। Kvk (Krishi Vigyan Kendra) ने लाइन विधि से बुवाई करने की सलाह दी।
लाइन विधि
लाइन विधि एक ऐसी विधि है, जिसमें हमारे बीज समान दूरी तथा समान कतार में बोए जाते हैं। जिसमें अंकुरण होने की संभावना 90 प्रतिशत तक बढ़ जाती है और उत्पादन मैं भी काफी इजाफा होता है। बुवाई करने के लिए अमृत लाल धनगर किराए की सीड ड्रिल मशीन का इस्तेमाल करने लगे।
किराया काफी महंगा होने के कारण और मशीन का बार बार इस्तेमाल उन्हें महंगा लगा, तो उन्हें अपनी खुद की सीड ड्रिल मशीन बनाने का विचार मन में आया। तो फिर क्या था आप जानते हैं कि भारतीय किसान कितने जुगाड़ू होते हैं।
अमृत लाल जी के मन में विचार घूम रहा था कि कैसे मैं एक सी ड्रिल मशीन बनाऊं, जिसे देशी हल में जोड़कर मैं अपनी खेती में इस्तेमाल कर सकूं। उन्हें खेती में बार-बार सीड ड्रिल मशीन की जरूरत पड़ती थी। बार-बार मशीन किराय पर लेने से लागत में बढ़ोतरी वह जाती है जिससे मुनाफे में कमी आ जाती है।
अमृत लाल जी ने एक जुगाड़ बना कर तैयार किया। उन्होंने एक 5 लीटर की क्षमता वाला एक एलमुनियम का बर्तन लिया जिसे एक खोखले पाइप से जोड़ दिया और बीज गिरने के पैमाने को सेट करने के लिए उन्होंने एक होल बनाया।
अमृत लाल जी की बनाई हुई सीड ड्रिल मशीन (Seed Drill Machine) को हम पांच अलग-अलग फसलों में बुवाई के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। सीड ड्रिल मशीन को देशी हल में पीछे लगा कर आसानी से बुवाई कर सकते हैं। वजन में हल्की होने के कारण इसे आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं।
अमृत लाल कि इस देसी सीड ड्रिल की बदौलत जिला स्तर पर धान में उच्च उत्पादन प्राप्त किया। इसके लिए उन्हें प्रथम पुरस्कार भी मिला। देसी सीड ड्रिल मशीन के कारण उन्हें साथी दोस्तों किसानों के बीच में एक अलग पहचान मिली।
ड्रिल मशीन बनाने में दूसरे किसानों की मदद करते हैं
अमृत लाल अभी तक 200 से ज्यादा किसानों को मशीन बनाना सिखा चुके हैं। इस मशीन को बनाने मैं मात्र 1500 रुपए की कुल लागत आती है, जो एक छोटे किसान के लिए बिल्कुल सही है। तभी तो बोलते हैं, किसी में काम करने की लगन होती है वह क्या नहीं कर सकता।



