बिहार अब मक्का उत्पादन में देश का दूसरे नंबर का राज्य बना, इन देशों में बिहारी मक्के की भारी डिमांड

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Maize pronunciation in Bihar
Maize pronunciation in Bihar is very good. Mecca of Bihar is in high demand. Bihar produced Makka is demand in Australia, Japan, London.

Demo File Photo

Purnia: अमेरिका में सबसे ज्यादा मक्के का उत्पादन होता है। यह विश्व का पहला मक्का (Maize) उत्पादक देश है। भारत में पशु आहार के लिए मक्का का उत्पादन (Maize Production) होता है। मक्के की फसल में सबसे ज्यादा पानी की जरुरत होती है। भारत में विश्व का कुल मक्का उत्पादन का 20 प्रतिशत मक्का उत्पादन होता है।

मक्का रबी की फसल है, इसे वारिश के मौसम में लगाया जाता है। जून से जुलाई में मक्का की बुबाई होती है और अगस्त से सितंबर में फसल तैयार हो जाती है। लोगों को बारिश के मौसम में भुट्टे बेहद पसंद होते है। मक्के से बहुत सारी चीज़ें बनने लगी है और पंजाब का प्रिये भोजन आप सब ने तो सुना ही होगा मक्के की रोटी और सरसों का साग होता है।

आज की कहानी में हम बात करेंगे, बिहार (Bihar) की जो मक्का उत्पादन के लिए देश में दूसरे नंबर पर है। अभी तक बिहार सबसे गरीब देशो मेसे एक था। पर अब नहीं बिहार हर क्षेत्र में खुद को आगे कर रहा है। तो आइए हम बात करते है। कि किस तरह मक्का का उत्पादन (Mecca Production) हो रहा है।

बिहार का पूर्णिया गांव मक्के का हब बना

भारत का बिहार राज्य का एक जिला पूर्णिया (Purnia) जहा से प्रतिवर्ष विदेशों और दूसरे राज्यों में करीब 30 लाख टन से भी ज्यादा मक्का भेजा जा रहा है। पूर्णिया जिला अब मक्का का हब बन चूका है। विदेशों में भी अब बिहार के मक्के की डिमांड है।

फ्रांस, आस्ट्रेलिया, लंदन, सिंगापुर और जापान जैसे देशों की कई सारी कंपनियां यहां से करीब दो-तीन लाख टन मक्का प्रतिवर्ष खरीदता हैं। मक्के से ढेर सारी खाद्य सामग्री, दवा और सौंदर्य प्रसाधन बनाए जाते हैं। पूर्णिया, जलालगढ़ और रानीपतरा के रेलवे स्टेशन पर बने रैक प्वाइंट से प्रतिवर्ष लगभग दो लाख टन मक्का दूसरे देशो में भेजते है।

बिहार बना मक्का उत्पादन में देश का दूसरा राज्य

पूर्णिया जिले के किसानों के लिए मक्का (Makka) की फसल सबसे बड़ी नकदी फसलो में से एक बन चुकी है। बिहार राज्य में आने वाले जिले पूर्णिया, अररिया, कटिहार और किशनगंज जिलों में पिछले वर्ष की रबी के मौसम में करीब एक लाख 50 हजार हेक्टेयर भूमि में मक्के की फसल लगाई गई थी।

Money Presentation Image

इस वर्ष रबी के मौसम में केवल पूर्णिया जिले में ही 80 हजार हेक्टेयर से भी ज्यादा भूमि पर मक्के की फसल लगाई गई है। यहाँ की जलवायु मक्के के लिए अनुकूल है, उसी लिए यहाँ सभी सीजन में मक्के की खेती की जाती है और यहाँ पर मक्के की पैदावार भी काफी ज्यादा होती है। अब बिहार मक्का उत्पादन में भारत का दूसरा राज्य है।

105 करोड़ की लागत से एथेनाल फैक्ट्री लगाई अब उम्मीद भी इसी फैक्टरी से है

पूर्णिया जिले में 105 करोड़ रूपए की लागत पर एथेनाल प्लांट लगाया गया है। पिछले ही महीने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस प्लांट की ओपनिंग भी की है। इस प्लांट से हर रोज 65 हजार लीटर एथेनाल का उत्पादन होगा है।

एथेनॉल उत्पादन में मक्का और ब्रोकेन राइस कच्चा माल बनेंगे। जिससे मक्के की खपत बढ़ेगी और किसान मक्का और धान उत्पादन से काफी लाभ कमा सकेगा। प्रतिदिन 165 टन मक्का अथवा 135 टन ब्रोकेन राइस की खपत इस प्लांट से होगी। ऐसे में बिहार के किसानों को मक्का अथवा टूटा चावल किसी अन्य प्रान्त में भेजने की जरूरत नहीं होगी। वर्तमान में इस प्लांट में ब्रोकेन राइस से एथेनाल निर्माण का काम आरंभ हो चूका है।

पूर्णिया जिला बना मक्के का सबसे बड़ा बाजार

पूर्णिया जिला अब मक्का के व्यवसाय (Makka Business) के लिए बिहार का सबसे बड़ा मार्किट बन गया है। यहाँ की गुलाबबाग मंडी में पूर्णिया जिले के साथ साथ अररिया, कटिहार, किशनगंज, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा जैसे जिले के किसान और व्यापारी मक्का बेचने के लिए आते हैं।

विदेशी कंपनियों की ने जब अपना इंटरेस्ट यहाँ पर दिखाया, तो लोगो में प्रतिस्पद्र्धा ज्यादा हो गई है। यहां पर रेल मार्ग से ज्यादा सड़क मार्ग के द्वारा मक्का विदेशों तक पहुचाया जाता है। पूर्णिया जिले के लोगों ने अपना व्यवसाय अरबों में पंहुचा दिया है। अब बिहार भी तरक्की कर रहा है।

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