ठेले पर स्नैक्स बेचकर पिता ने बेटी को पढ़ाया, एक कमरे वाले घर से बेटी ने UPSC Exam टॉप किया

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Deepesh Kumari UPSC
Deepesh Kumari from Rajasthan secured AIR 93 in CSE 2021 in her second attempt. Her father sells snacks on a handcart on the streets.

Bharatpur: भारत में करीब 25 प्रतिशत आबादी बहुत गरीब है। पिछले कुछ सालों से तो लोगो को ठीक से रोजगार भी नहीं मिल पा रहा जिसका सीधा असर उनके जीवन में देखने को मिलता है। बड़े बड़े शहरों में तो जमीन पूरी तरह खत्म हो गई है।

जमीनों पर तो लोगो ने 50-50 मंजिल ईमारत खड़ी कर दी है। लोग वहां जमीन का दाम नहीं पूछते उस ईमारत में बने फ्लैटों का दाम पूछते है। ऐसे में जिसकी जमीन उनके पूर्वजों की दें है, वही उनके हाथ है, बाकी कुछ भी नहीं। शहरों में रहना इतना आसान नहीं है वहां लोग पानी भी मोल का पीते है।

ऐसी स्थिति गरीबो को और गरीब बना देते है। जरुरी नही होता की बड़े ख्वाब सिर्फ बड़े लोग ही देख सकते है या सिर्फ बड़े लोगो के ही ख्वाब पुरे हो। गरीबो के भी सपने होते है और उनके सपने भी पुरे होते है। सफलता आमिर लोगों की गुलाम नहीं होती सफलता तो सिर्फ कठोर परिश्रम मांगती है।

ऐसी ही एक कहानी है एक गरीब परिवार की बेटी की, जिसने UPSC टॉप कर के अपने साथ साथ अपने परिवार और जिले का भी नाम रोशन कर दिया और सभी के लिए प्रेरणा बन सामने आई। आइये जानते है विस्तार से।

UPSC टॉपर दीपेश कुमारी की कहानी

किसी महान पुरुष ने कहा है कि मेहनत करो पर फल की चिंता न करो वो जब भी मिलेगा बहुत मीठा होगा है। अगर आपकी मेहनत और लगन सच्ची है। तो आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। यूपीएससी रिजल्ट (UPSC Result) आते ही कई सारी कहानिया सामने आती है। जो वास्तव में एक कहानी ही लगती है। लोगो का संघर्ष एक दम सपने जैसा लगता है।

ऐसी ही कहानी दीपेश कुमारी (Deepesh Kumari) की भी है, जिसे सुन कर यकीन नहीं होता, वो कहावत सही है कि दिन कभी एक जैसे नहीं होता कब राजा रंक और रंक राजा बन जाता है। एक पिता ने अपनी बेटी के लिए दिखा था ये सपना की उनकी बेटी खूब पढ़ लिखकर कोई बढ़िया सी नोकर करे और परिवार का नाम रोशन कर दे। दीपेश अपने पांच भाई बहनो में सबसे बड़ी है।

उन्होंने यूपीएससी परीक्षा (UPSC Exam) में जीत हासिल करके अपने पिता का देखा सपना पूरा किया है। दीपेश कुमारी ने संघ लोक सेवा आयोग की UPSC परीक्षा 93वीं रैंक (93 Rank) से पास की है, जो टॉप 100 के अंतर्गत आती है, इन्होंने अपने परिवार के साथ साथ राजस्थान का नाम भी ऊंचा कर दिया है।

राजस्थान की शान बनी दीपेश कुमारी

इनके पिता (Father of Deepesh Kumari) पिछले 25 वर्षो से ठेला पर सब्जी बेच कर अपने परिवार पाल रहे हैं और बच्चों को पढ़ा रहे है। इन सब में उनके पिता ने अपना पूरा जीवन बिता दिया है।

एक कमरा, एक रसोई और परिवार में सदस्य 7 के साथ विपरीत परिस्थितियों से लड़ते हुए एक ठेला चालक की बेटी ने अपने अथक परिश्रम से वो सफलता प्राप्त की है, जो हर किसी के बस की बात नहीं होती।

बेटी बनी आईएएस फिर भी पिता ठेला (Thela) लेकर अपने काम के लिए निकल गए

यूपीएससी का रिजल्ट घोषित होने के बाद ये जानते हुए की बेटी ने सफलता प्राप्त कर ली है। फिर भी पिता गोविन्द अगले दिन अपने ठेले को लेकर अपनी रोजी कमाने के लिए निकल गए। शहर की गलियों में घूमते वक़्त काफी सारे लोगों ने उनको देख लिया।

सभी लोग उनकी बेटी के आईएएस ऑफिसर (IAS Officer) बनने की ख़ुशी में ढेरों बधाइयां देने लगे। बेटी की सफलता पर पिता कहते है। जीवन में सुख और दुख आते रहते हैं। परंतु लोगों को अपनी मेहनत नहीं छोड़नी चाहिए।

दीपेश कुमारी एक काबिल विद्यार्थी थी

दीपेश कुमारी कक्षा 10 तक की पढ़ाई राजस्थान (Rajasthan) राज्य के भरतपुर (Bharatpur) शहर के एक स्कूल शिशु आदर्श विद्या मंदिर से की है। वे काफी इंटेलिजेंट है, उन्होंने कक्षा दस में 98 प्रतिशत अंक और कक्षा 12 में 89 प्रतिशत अंक प्राप्त किये है। उन्होंने UPSC की तैयार दिल्ली से की और दूसरे ही प्रयास में सफलता प्राप्त कर ली और आज वे काबिल आईएएस ऑफिसर है।

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