
Photo Credits: Raza Mohammed
Ajmer: हर आदमी अपनी रोजी चलाने के लिए कोई न कोई छोटा बड़ा काम करता है, चाहे फिर वो गरीब हो या आमिर। बचपन से लेकर 25 साल की उम्र तक लोग पढ़ाई करते है और नोकरी के लिए तैयारी करते रहते है। कुछ लोग तो पढ़ाई के साथ साथ पार्ट टाइम नोकरी भी करते है। जरुरी नहीं होता की हर किसी के पास बैठ कर खाने लायक पैसा जमा हो।
कुछ लोग रोज कमा कर अपना पेट पालते है, ऐसे समय में आपदा काल सभी लोगो पर कहर बन कर टुटा, बहुत सारे लोगो को नोकरी चली गई, स्कूल कॉलेज बंद हो गए, आयात निर्यात होना बंद हो गया, लघु उद्योग पूर्णतः समाप्त हो गए साथ ही कई लोगो की जान चली गई और बहुत से बच्चे अनाथ हो गए।
भारत की अर्थ व्यवस्था को काफी बड़ा नुकसान हुआ। बीते 2 वर्षो में लोगो ने काफी कुछ झेला है। एक अच्छी जॉब करने वाले लोग दर दर भटकने पर मजबूर हो गए। अब लोग अपनी परिस्थियां सुधार रहे है।
PM मोदी के द्वारा आत्मनिर्भर होने की पहल से काफी सारे लोगो ने इस पर अमल किया और अपने आपको और अपनी आय को स्वतंत्र बना रहे है। ऐसी ही एक कहानी है एक टीचर (Teacher) की जिन्होंने आपदा काल के बाद अपना मोतियों का व्यापार (Pearls Business) प्रारम्भ किया आइये जानते है, कोन है वो शख्स।
रजा मोहम्मद की कहानी (Raza Mohammed Story)
आपदा काल के दौर पर जिन लोगो ने अपनी लगी लगाई नोकरी को खोया है। उनमे एक नाम और शामिल है रजा मोहम्मद का। आपको बता दें की रजा मोहम्मद अजमेर (Ajmer) सिटी के निवासी है और उनकी उम्र 41 वर्ष है। आपदा काल शुरू होने से पहले वे पेशे से एक स्कूल टीचर थे। जैसे ही आपदा काल शुरू हुआ और पूरे देश में लॉकडाउन लगा, तो सारे व्यवसाय और स्कूल बंद हो गए।
प्राइवेट टीचर और एम्प्लाइज तो जैसे मानो सड़क पर आ गए। यही हाल रजा मोहम्मद (Raza Mohammed) का भी हुआ, परंतु उन्होंने इस कठिन समय से हार नहीं मानी और इस समय की बेहतरी की आस कभी छोड़ी नहीं। साथ ही नए विकल्प खोजने लगे।
इन्ही सब के चलते उन्हें किसी ने मोती की खेती (Moti Ki Kheti) करने का सुझाब दिया। खैर जानकारी तो थोड़ी सी ही मिल पाई थी, परंतु रजा को खुद पर इतना विश्वास हो गया था कि वे अब इस को बहुत ही सरलता से कर लेंगे। आगे चल कर रजा ने खेती करने के लिए प्रशिक्षण लिया और घर पर ही मोती उगाने लगे।
रजा के इस नेक फैसले ने उनकी जिंदगी को आजब बनाने से बचा लिया, उन्होंने अपनी जिंदगी को पूरी तरह बदल लिया। एक प्राइवेट स्कूल का टीचर आज मोती की खेती से साल का 2 लाख रुपए तक कमा लेता हैं।
60 से 65 हजार में की थी शुरुआत आज लाखो के मालिक है
भारत के अजमेर शहर के रसूलपुरा गांव के निबासी रजा बताते है कि डेढ़ वर्ष पूर्व उन्होंने मोती की खेती प्रारम्भ की। पहले एक स्कूल में टीचर थे। आपदा काल के चलते नौकरी खो दी और अब किसान बन गए हैं। शुरुआती दौर में उन्हें बहुत परेशानी का सामना करना पड़ा क्योंकि वे नहीं जानते थे, की मोति की खेती किस प्रकार की जाती है।
इन्ही सब के बीच उन्हें पता चला की राजस्थान निवासी नरेंद्र कुमार गरवा काफी समय से मोती उत्पादित (Pearl Production) कर रहे है और अपना यह टेलेंट दुसरो को भी दे रहे है। इतना जानते ही उन्होंने एक मिनट की भी देर नहीं की और नरेंद्र से बात कर प्रशिक्षण लेने पहुच गए।
प्रशिक्षण लेते ही उन्होंने 60-65 हजार रुपए से अपना काम प्रारम्भ किया। आज उन्होंने सीप से मोती बनाने के लिए स्वयं से एक यूनिट तैयार कर ली है। इस विधि से मोती बनाने के लिए रजा ने अपने खेत में 10 बाई 25 की एक जगह पर तालाब का निर्माण किया और उसमें सभी देशो से ख़रीदे सीप डाल दिए।
मोती की खेती में सबसे जरूरी चीज़
रजा कहते है कि अच्छी पैदावार के लिए प्रत्येक सीप को न्यूक्लियस में डालकर रख देना चाहिए और रेगुलर उसके पानी के पीएच और अमोनिया लेवल जांचते रहना चाहिए। अच्छी तरह देखभाल के बाद कुछ महीने में ही आपकी मेहनत रंग लाएगी और आप देख पाएंगे कि एक सीप के अंदर करीब 2 मोती बन गए है। यह काम बहुत साबधानी और मेहनत का होता है।
अगर अच्छी तरह से सिप्स का ख्याल नहीं रखा गया, तो आपको नुकसान भी झेलना पड़ सकता है। वे कहते है कि शुरुआत में उन्हें कभी नुकसान हुआ उनके 20-25 प्रतिशत सीप खराब हो गए थे। परंतु गलती को सुधारते हुए टेक्नोलॉजी को सीख कर उन्होंने अपने नुकसान की भरपाई कर ली थी। गुणवत्ता के हिसाब से मोतियों की कीमत 200 रुपए से 1,000 रुपए तक हो सकती है।
इस काम के लिए प्रशिक्षण की आवश्यकता है
नरेंद्र कुमार गरवा, जिन्होंने रजा को ट्रेनिंग दी थी। वे रजा के लिए कहते है कि रजा एक बहुत मेहनती इंसान हैं। आज उन्हें उनकी मेहनत का फल मिला और वे अच्छी कमाई कर रहे हैं। मोती की मांग घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मार्केट में काफी ज्यादा हैै।
सबसे अच्छी बात यह है कि मोती की खेती को देश के किसी भी भाग में आसानी से कर सकते है। इसके लिए बस एक तालाब और मीठे पानी की आवश्कयता है। नरेंद्र कहते है कि मोती की खेती एक वैज्ञानिक तरीका है। इसलिए खेती की शुरुआत करने से पहले प्रशिक्षण जरूर लेना चाहिए, जिससे आपको नुकसान भी नहीं होगा और अच्छा प्रॉफिट कमा पाओगे।
सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ़ फ्रेशवाटर एक्वाकल्चर (CIFA) एक मुख्य शाखा है, जो आपको बेसिक से लेकर एडवांस लेवल तक का प्रशिक्षण देती है। गुजरात, बैंगलोर जैसी कई राज्यो में CIFA के ट्रेनिंग सेंटर बने हुए है। यह संस्था लोगों के लिए काफी हेल्पफुल है और सबसे अच्छी बात यह है कि यह ट्रेनिंग फ्री ऑफ़ कॉस्ट दी जाती है। इससे लोगों को काफी राहत होती है।



