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Pune: बिना उद्देश्य के जीवन का कोई मतलब नहीं होता। आज पुरे विश्व में जो कुछ भी है और जो भी इंसान है वो अपना एक उदेश्य के लिए है। हर किसी के उद्देश्य अलग अलग है। एक युवा अपना उद्देश्य बनाता है कि उसे जॉब करना है।
एक गृहणी का उद्देश्य है कि वो अपने परिवार को अच्छे से चला सके। वातावरण में मौजूद पेड़ पौधों का उद्देश्य है कि उन्हें वातावरण की कार्बनडाई ऑक्सिइड को ग्रहण कर ऑक्सीजन देना है। देश का हर युवा पढ़ने लिखने बाद जॉब के लिए तैयारी करता है। उसे कौन सी जॉब चाहिए वो उसपर विचार कर अपना लक्ष्य निर्धारित कर लेता है।
किसी ने एक बात कही थी। की जो इंसान गरीब पैदा हुआ वो उसकी गलती नहीं है। परंतु जो इंसान गरीब ही मर जाए वो उसकी गलती है। ये जरुरी नहीं होता की बड़े सपने सिर्फ पैसे वाले ही देख सकते है। एक गरीब भी अपने आप को पैसे वाला बनाने के लिए उन सपनो को देख सकता है।
किसी के मन में कुछ कर गुजरने का जज़्बा हो तो वो हर काम कर सकता है जो उसके लिए नामुमकिन सा हो। आज हम बात करेंगे एक रिक्शा चालक के बेटे की जो खुद एक वेटर था, आज वो आईएएस अधिकारी (IAS Officer) है। आइये हम उसके इस संघर्ष (Struggle) से भरे सफर की बात करेंगे।
पिता का पेशा रिक्शा चालक और बेटा आईएएस अधिकारी
हम रोजाना कोई न कोई कहानी सुनते ही है कैसे बना आईएएस अधिकार इतना संघर्ष किया एक आईएएस बनाने के लिए। यह वर्दी संघर्ष मांगती है। यह वर्दी जात पात धर्म और गरीबी में फर्क नहीं करती इसे तो संघर्ष की आग में तपा हुआ व्यक्ति चाहिए है।
अक्सर लोग गरीबी का रोना रोते है परंतु आज की कहानी उन लोगों के लिए जबाब है। यह कहानी है अंसार शेख की जिन्होंने अपने हालातों को सुधारने के लिए कड़ी मेहनत की और जिंदगी ने उनको बेहद अच्छा तोफा दिया।
अंसार की जिंदगी में गरीबी, भूख और हर तरह का अभाव है, परंतु उनके पास एक बहुत अच्छी चीज है जो इन सब को मात देंगी वो है उनके हर हालात में पढ़ाई करने की लगन। इसी लगन ने आज उन्हें आईएएस ऑफिसर बनने में मदद की वे बेहद जुनूनी पर्सनालिटी के है। अंसार अहमद शेख ने महज 21 वर्ष की उम्र में यूपीएससी की परीक्षा (UPSC Exam) पास किया और 371वीं रैंक प्राप्त किया। आज वे एक IAS अफसर है।
वही दूसरी तरह उनके जीवन के बारे में बात करे। तो आपको बता दे अंसार महाराष्ट्र राज्य के जालना जिले के एक छोटे से गांव के निवासी हैं। उनके पिता पेशे से एक ऑटो चालक (Auto Driver Father) है और उनकी मां मजदूरी (Labour) करती थीं। काफी गरीब परिवार था।
आज अंसार ने जिस गरीबी में उन्होंने पढ़ाई की है, उस स्थिति में तो लोग पढाई छोड़ देते। अंसार के साथ भी यही स्थिति बनी थी आस पड़ोस रिश्तेदार उन्हें खूब ताने मारा करते थे की माँ बाप दिन भर मजदूरी करते है। और इन लाड-साहब को बस पढ़ना है। अंसार कहते है कि उनके पिता ने और रिश्तेदारों ने उनसे पढ़ाई छोड़ने के लिए कई बार कहां था।
12वीं में सत प्रतिशत नंबर हासिल करके सब का मुह बन्द कर दिया
एक इंटरव्यू में अंसार शेख (IAS Ansar Shaikh) कहते है की लोगों के भड़कावे में आकर अब्बा ने मुझे पढ़ाई छोड़ने को कहा था ।और पढ़ाई बन्द कराने के लिए वह मेरे स्कूल आ पहुचे थे। लोगो ने उन्हें इस कदर भड़काया था कि वे किसी की सुनने को तैयार नहीं थे।
#Maharashtra | Ansar Shaikh, son of an auto-driver, cleared IAS in his 1st attempt, scoring All-India Rank of 361 and becoming one of India's youngest IAS officers
Congratulations pic.twitter.com/r1wYUSibyJ
— Voice For Men India (@voiceformenind) January 14, 2021
अंसार के टीचर ने उन्हें खूब समझाया और बताया कि अंसार एक बेहद काबिल विद्यार्थी है। इसके बाद उन्होंने दसवीं की पढ़ाई पूरी की। और जब कक्षा 12वीं में 91 प्रतिशत अंक प्राप्त कर उन्होंने घरवालो से लेकर बाहर वालो तक का मुह बंद कर दिया उसके बाद से किसी ने उन्हें पढ़ाई के लिए नहीं रोक।
वेटर की जॉब की अपनी फीस भरने के लिए
अंसार (Ansar Shaikh) बताते है कि उनके अब्बा प्रतिदिन मात्र सौ से डेढ़ सौ रुपये बस कमाते थे। जिससे परिवार का खर्चा काफी मुश्किल से चलता था। और ऐसे में फीस के लिए पैसे की उम्मीद पिता से करना कोई मतलब नहीं थी। 12वीं के बाद अंसार अहमद शेख ने पुणे के फेमस फर्गुसन कॉलेज में एडमिशन ले तो लिया, परंतु फीस भरने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे।
21 Years old IAS officer Ansar Shaikh, India's youngest IAS, from Jaalna Maharashtra.@IASassociation @PMOIndia pic.twitter.com/KmYU2f9BIr
— Lab of Eroticism and Love (@laboferoticism) August 22, 2017
तब अंसार के छोटे भाई ने उनकी मदद की और अंसार भी फीस भरने के लिये एक होटल में वेटर की जॉब करना लगा। उन्हें वहां पर तीन हजार रुपये तन्खा दिया जाता था। इस होटल में अंसार ने अपनी कैपेसिटी से ज्यादा काम करते थे। टेबल पोछने से लेकर रात के समय होटल का फर्श साफ करते थे। पर वे खुश थे क्योंकि नकी कॉलेज की फीस भर पाएगी।
पहले ही एटेम्पट में अपनी सीट रेसर्व कर ली
कॉलेज के पहले साल में ही अंसार के प्रोफेसर ने उनकी काबिलियत दिखी। उन्हें UPSC सिविल सर्विस की तैयारी करने के लिए सजेशन दिया। इस बात को अंसार ने मानी और कॉलेज की पढ़ाई के साथ ही उन्होंने UPSC की कोचिंग करने का विचार बनाया।
IAS Shaikh Ansar Ahmed appointed SDO of Dinhata, Coochbehar. Ansar is the youngest IAS officer in India and the son of an auto driver from Maharashtra.
Ansar worked 12 hours a day for three years to achieve his IAS dream. Shaikh was allocated West Bengal cadre. DOB 01.06.95. pic.twitter.com/pBmue5miSl
— I Love Siliguri (@ILoveSiliguri) July 31, 2019
फाइनली अंसार अहमद शेख की कड़ी मेहनत और संघर्ष का फल मिला और उन्होंने पहले ही प्रयास में साल 2015 में यूपीएससी की परीक्षा पास की और आईएएस की लिस्ट में अपना नाम दर्ज किया। अंसार ने ऑल इंडिया में 371वीं रैंक प्राप्त की है। आज वे एक काबिल आईएएस है। अंसार उन सभी युवा के लिए प्रेरणा हैं। जो आर्थिक स्थिति, समाज और जाति धर्म में फसे हुए है।



