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Kottayam: महिला के अधिकारों की रक्षा में शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। शिक्षा जीवन जीने का एक अनिवार्य भाग है, चाहे वह लड़का हो या लड़की हो। शिक्षा महिलाओं को जीवन के रास्ते को चुनने का अधिकार देने का प्रथम कदम है, जिस पर वह आगे बढ़ती है।
एक शिक्षित महिला में कौशल, जानकारी, प्रतिभा और आत्मविश्वास होता है, जो उसे एक बेहतर मां, कर्मचारी और देश का नागरिक बनाती है। महिलाएं हमारे देश की आबादी का लगभग आधा हिस्सा हैं। पुरुष और महिलाएं सिक्के के दो पहलूओं की तरह हैं और उन्हें देश के विकास में योगदान करने के समान अवसर की जरूरत होती है।
शिक्षा एक ऐसा शक्तिशाली शब्द है, जो कुछ भी करा सकता है। बच्चा 3 साल की उम्र से शिक्षा प्राप्त करना शुरू करता है और 25 साल तक करता है। ऐसा इस लिए कहा जाता है कि 25 साल तक दिमाग में कोई भी चीज़ जल्दी घुस जाती है, परंतु ऐसा नहीं है, लगन और कुछ कर दिखाने की चाह उम्र नहीं देखती एक कहावत है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती, इंसान जब चाहे तब सब कुछ सीख सकता है।
इस कहाबत को सही साबित कर दिखाया केरल (Kerala) की एक महिला ने जिनकी उम्र 104 साल है। उन्होंने ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसको करने की कोई सोच भी नहीं सकता है। दादी के इस उम्र में उनके काम से उन लोगो के लिए प्रेरणास्रोत बनी है, जो एक उम्र के बाद जीवन के मकसद से भटक जाता है या कुछ नया करने से हिचकिचाते है। दिल जुनून और जस्बा हो तो हर काम आसान है।
शिक्षा मंत्री से मिली ढेर सारी बधाई
भारत के केरल राज्य की एक महिला जिसका नाम कुट्टियम्मा है। ये केरल राज्य की शान बन गई है। इस उम्र में बुजुर्ग महिला कुट्टियाम्मा (Kuttiyamma) द्वारा केरल राज्य साक्षरता मिशन के तहत एक परीक्षा को अच्छे अंकों से पास कर इतिहास रचा।
इन्होने 100 में से 89 प्रतिशत अंक प्राप्त किये जिसने सभी को हैरान कर दिया है। अच्छे प्रतिशत के साथ पास होना अपने आप में ही एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। बुजुर्ग महिला को सफलता (Old Woman Success) प्राप्त करने पर राज्य के शिक्षा मंत्री वी शिवाकुट्टी ने उन्हें बधाई दी है।
उन्होंने ट्वीट कर बताया कि किस तरह उन्होने यह सफलता प्राप्त की और कुट्टियम्मा को उनकी मेहनत और सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं। एक प्रदेश के शिक्षा मंत्री ने सार्वजनिक तौर पर उनकी हिम्मत की तारीफ की।
परीक्षा की तैयारी के लिए ली थी ट्यूशन
पुराने समय में लड़कियों को ज्यादा शिक्षित नहीं किया जाता था। एक रिपोर्ट्स के अनुसार केरल की अयरकुन्नन पंचायत ने साक्षरता परीक्षा योजन के तहत यह परीक्षा आयोजित की। इसका उद्देश्य शिक्षित लोगो की संख्या बढ़ाना है।
केरल: कोट्टयम में रहने वाली एक 104 वर्षीय वृद्ध महिला ने राज्य साक्षरता मिशन की परीक्षा में 89 अंक हासिल किए।
उनकी शिक्षिका रेहना ने बताया, "कुट्टियाम्मा को पढ़ाई का शौक है। वह सीखती और लिखती हैं, उन्होंने केरल राज्य साक्षरता मिशन की परीक्षा में 100 में से 89 अंक प्राप्त किए।" pic.twitter.com/eFS6Z1m5rr
— ANI_HindiNews (@AHindinews) November 15, 2021
इस परीक्षा में जिले के बहुत सारे नागरिकों ने भाग लिया था। जिसमें कुट्टियम्मा भी शामिल थीं। 104 साल की यह महिला हर स्थिति में इस परीक्षा को पास करना चाहती थी। उन्होंने इस परीक्षा के लिये कुछ महीनों पहले साक्षरता प्रेरक से ट्यूशन लेना शुरु कर दिया था। जिसका नतीजा बहुत अच्छा निकला।
कम उम्र में हो गई थी शादी
पुराने समय में महिलाओं की शादी बचपन में ही हो जाती थी। जिससे न तो वह शिक्षा प्राप्त कर पाती थी और न ही अपना बचपन जी पाती थी और यही कुट्टियम्मा के साथ हुआ बचपन से ही उनको पढ़ाई का बहुत शौक था। परंतु वह कभी स्कूल नहीं जा पाए और 16 वर्ष की उम्र में उनकी शादी टी के कोन्ति नामक व्यक्ति से कर दी।
केरल ने शिक्षा पर बिना शोर इतनी संजीदगी से काम किया है कि वहां की जनता मेट्रोमैन की बेहूदी बातों को अपने वोट से खारिज़ कर देती है! अब कोट्टायम की 104 वर्षीय कुट्टियाम्मा की इस निश्छल मुस्कान को ही देख लीजिए.. कुट्टियाम्मा ने 'केरल साक्षरता मिशन' परीक्षा में 89/100 अंक झटके हैं।❤️ pic.twitter.com/BIhfb5deyZ
— Gaurav Nauriyal | گورو نوڈیال | கௌரவ் நோடியால் (@naudiyal_gaurav) April 12, 2022
इसके बाद उनका जीवन एक गृहणी के रूप में बिता। उन्हें कभी शिक्षा प्राप्त करने का मौका नहीं मिला। लेकिन उनके दिल में पढ़ने की चाह थी और वे पढना चाहती थी। उम्र के इस मोड़ पर उन्हें मौका मिला और उन्होंने इस मौके पर अपना नाम अंकित किया।
उम्र की मार और परिवारिक जिम्मेदारियां
कुट्टियम्मा की सीखने की चाह ने उन्हें एक शिक्षित महिला बना दिया। जानकारी के अनुसार, उम्र के इस पड़ाव में उन्हें सुनने में परेशानी जाती है। इसलिए उन्होंने परीक्षा के दौरान टीचर्स से निवेदन किया था कि वे थोड़ा तेज़ बोलें, जिससे उनकी यह परेशानी हल हो सके।
केरल की कोट्टयम में रहने वाली कुट्टियाम्मा ने राज्य साक्षरता मिशन की परीक्षा में 100 में से 89 अंक हासिल किए.
उनकी शिक्षिका रेहना ने बताया कि उनको पढ़ाई का बहुत शौक है.#Kerala #kottayam #Kuttiyamma@vijayanpinarayi @CMOKerala pic.twitter.com/zxoViF6Bl9— ZEE HINDUSTAN (@Zee_Hindustan) November 15, 2021
कुट्टियम्मा की कामयाबी से उनके परिवार के सभी सदस्य काफी खुश हैं। जानकी, गोपालन, राजप्पन और रवींद्रन कुट्टियम्मा के बेटे से बात चीत के दौरान उन्होंने बताया कि उनकी मां हमेशा से पढ़ना चाहती थीं। परंतु घर-गृहस्थी की जिम्मेदारियों ने उन्हें बांध रखा था। जिसके कारण वे अपने सपने कभी पूरे नहीं कर सकीं। अब वे बहुत खुश है ये जानकर कि चारो तरफ उनकी चर्चा है। प्रदेश के शिक्षा मंत्री ने भी ट्वीट कर शुभकामना दी और उनके हौसले को बढ़ाया है।



