
Delhi: यदि किसी का ब्रिल पावर मज़बूत हो अर्थात मन में किसी चीज़ के लिए तीब्र लालसा हो, तो उसे पाना आसान हो जाता है। किसी सफलता को पाने के लिए पक्का मन बना लेने से आधा काम वहीँ हो जाता है और अब आधे काम के लिए मेहनत करनी पढ़ती है। कुछ लोगो को अपनी मंज़िल तक पहुँचने के लिए अंग्रेजी भाषा की समस्या आ जाती है।
आज देश में उच्च शिक्षा और UPSC समेत सभी बड़ी परीक्षा और के इंटरव्यू अंग्रेजी भाषा में हो रहे हैं। इसके जिसके चलते हजारों की संख्या में अभ्यार्थी परीक्षा पास करने के बाद इंटरव्यू देने से पहले ही हार मान जाते हैं, लेकिन आज हम आपको एक ऐसे शख्स के बारे में बता रहे हैं, जिसने कभी हार नहीं मानी। उन्हें IAS बनने का अपना सफर पूरा किया।
यहाँ बात हो रही है दिलीप कुमार (IAS Dilip Kumar) की, जिन्होंने UPSC की परीक्षा में सफलता हासिल करने के लिए अपनी पूरी दम लगा दी। दिलीप कुमार ने अपनी तीसरी कोशिश में यूपीएससी (UPSC) की परीक्षा क्रैक कर ली।
अंग्रेजी में दो बार इंटरव्यू दिया
दिलीप कुमार के लक्ष्य (IAS अफसर बनने) के सामने अंग्रेजी बहुत बड़ी मुश्किल थी और उनका रास्ता रोक रही थी। फिर भी दिलीप अपने मकसद पर अडिग रहे। दिलीप ने दो बार यूपीएससी मेन्स एग्जाम क्लियर किया और अंग्रेजी में दो बार इंटरव्यू दिया, लेकिन उनका चयन नहीं हो सका।
दिलीप ने ठान लिटा था की कैसे भी IAS अफसर बनना है, इसलिए उन्होंने इंटरव्यू के माध्यम को चेंज किया और तीसरी बार हिंदी में इंटरव्यू दिया। दिलीप ने साल 2018 में 73वीं रैंक हासिल की थी।
हिंदी में इंटरव्यू देने का मन बनाया
IAS दिलीप कुमार ने एक हिंदी अख़बार को बताया कि उन्हें अंग्रेजी में इंटरव्यू देने के कारण अच्छे अंक हासिल नहीं हो पा रहे थे, इसलिए उन्होंने हिंदी में इंटरव्यू देने का मन बनाया।
ज्ञान हो की यूपीएसी के इंटरव्यू में कुल 275 अंक होते हैं। दिलीप ने बताया कि 2016-17 में अंग्रेजी में दिए इंटरव्यू में उनको 143 अंक मिले थे। परन्तु साल 2019 में हिंदी में इंटरव्यू दिया गया, तो 179 अंग प्राप्त हुए।
दिलीप ने बताया की जब वह पहली बार UPSC का इंटरव्यू देने वाले थे, तब वे कंफ्यूज थे की इंटरव्यू हिंदी में दें या फिर अंग्रेजी में। अंग्रेजी में इंटरव्यू देने के बाद उन्हें 143 अंक प्राप्त हुए थे। इसके बाद उन्होंने अपनी मात्र भाषा हिंदी में इंटरव्यू देने का इरादा कर लिया।
दिलीप बताया की इंटरव्यू के दौरान हिंदी (Hindi language) में अपनी बात को सही तरीके से सही तर्कों के साथ रख पाने के चलते ही उन्हें अच्छे अंक मिले और 73वीं रैंक पाकर वे अपना सपना साकार कर सके। हिंदी में सवालों का जवाब देते समय वे पूरी तरह से आत्मविश्वास में रहे और यह उनके लिए सही साबित हुआ।



