रानी कमलापति कौन थीं, उनके नाम पर देश के पहले वर्ल्ड क्लास स्टेशन हबीबगंज का नाम बदला गया

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Who is Rani Kamlapati
Who is Rani Kamlapati and Why Habibganj Railway Station (Bhopal) has been renamed as Rani Kamlapati Railway Station. She was the widow Gond ruler of Nizam Shah, chief of Ginnorgarh. Story of Rani Kamlapati Bhopal.

Photo Credits: Twitter

Bhopal: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के हबीबगंज स्टेशन (Habibganj Railway Station) का नाम बदलकर अब रानी कमलापति (Rani Kamlapati Station) कर दिया गया है। हाल ही में मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार के भेजे गए प्रस्ताव को केंद्रीय गृह मंत्रालय से मंजूरी मिल गई।

MP राज्य सरकार ने अपने भेजे गए प्रस्ताव में तर्क दिया था कि 16वीं सदी में भोपाल क्षेत्र हिन्दू गोंड शासकों के अधीन था और गोंड शासकों ने यहाँ राज किया। गोंड राजा सूरत सिंह के बेटे निजाम शाह से रानी कमलापति का विवाह संपन्न हुआ था।

फिर रानी कमलापति ने आगे चलकर बड़ी बहादुरी और वीरता के साथ कई आक्रमणकारियों से लोग लिया था और राजपथ चलाया था। मुगल साम्राज्य के पतन के बाद भोपाल से 50 किलोमीटर दूर बने गिन्नौरगढ़ (Ginnorgarh) की छोटी रियासत खूब फली फूली। राजा निजाम शाह (King Nizam Shah) गिन्नौरगढ़ के शासक थे। निजाम शाह एक गोंड राजा (Gond king) थे। अभी का भोपाल उस वक़्त बहुत छोटा सा गांव मात्र था और यहाँ निजाम शाह का राज था।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है की निज़ाम शाह की 7 पत्नियां थीं। इनमें से एक पत्नी रानी कमलापति थी। संतों में राजा की सबसे पसंदीदा पत्नी कमलापति थीं। यहीं से रानी कमलापति की कहानी (Rani Kamlapati Story) शुरू होती है। रानी कमलापति बेहद सुन्दर और बुद्धिमान थीं।

सब कुछ सही चल रहा था की षड्यंत्र के काले बादल मंडराने लगे। कहा जाता है की निजाम शाह को उनके एक भतीजे आलम शाह ने जहर देकर उनके प्राण निकलवा दिए और रस्ते से हटा दिया। ऐसे में स्वयं को बचाने के लिए रानी कमलापति अपने बेटे नवल शाह के साथ गिन्नौरगढ़ से भोपाल के रानी कमलापति महल में आ गई थीं। भोपाल के इतिहास में रानी कमलापति को बहुत मान सम्मान से देखा जाता है और उनके किये गए कार्यों को याद किया जाता हैं।

भोपाल में रहने के दौरान रानी कमलापति ने अपने पति राजा निज़ाम शाह के एक दोस्त मोहम्मद खान (Mohammad Khan) से मदद मांगने के लिए सन्देश भेजा। भोपाल का इतिहास बताता है की मोहम्मद खान ने रानी से 1 लाख रुपये लेकर राजा के कातिल उनके भतीजे के प्राण ले लिए और उनका बदला पूरा किया। परन्तु अपनी डील (Rani Kamlapati and Mohammad Khan Deal) के अनुसार रानी कमलापति उनका बदला लेने वाले मोहम्मद खान को तय रुपये नहीं अदा कर सकी। ऐसे में उन्होंने अपनी रियासत का कुछ भाग मोहम्मद खान को दिया।

हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम रानी कमलापति करने पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया है। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा की आदिवासी साम्राज्ञी रानी कमलापति के नाम पर हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नामकरण करने के लिए मैं प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद देता हूं। वे गोंड समुदाय का गौरव हैं। वे अंतिम हिंदू साम्राज्ञी थीं।

भोपाल में जिस महल में रानी कमलापति रहती थी आज भी वह महल भोपाल में मौजूद है और उसे Rani Kamlapati Palace कहा जाता है। आपको बता दें की भोपाल शहर के नाम को भी भोजपाल करने की मांग उठ चुकी है। इस वक़्त भोपाल शहर राजा भोज (King Bhoja) के राज में फला फूला था और कहते हैं की बड़े तालाब का निर्माण राजा भोज ने ही करवाया था।

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