अजब गजब मध्यप्रदेश में VVIP पेड़ भी है, जिसकी सुरक्षा में गार्ड लगे हैं और हर साल 15 लाख खर्च आता है

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VVIP Tree Raisen MP

Raisen: मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) को ऐसे ही नहीं कहा था है की अजब है MP, गजब है MP। मध्यप्रदेश को भारत का दिल कहा जाता है और यहाँ जंगल और पेड़ पौधों की भरमार है। हरियाली के मामले में यह प्रदेश बहुत हरा भरा है। आज भी हम मध्यप्रदेश के एक पेड़ (VVIP Tree in Madhya Pradesh) की बात कर रहे हैं। यह पेड़ मीडिया और सोशल मीडिया में पहेली बना हुआ है।

मध्यप्रदेश के रायसेन (Raisen) के सलामतपुर (Salamatpur) में इस पेड़ की सुरक्षा में 24 घंटे गार्ड तैनात रहते हैं। इस पेड़ का एक पत्ता भी गिरता है, तो प्रशासन चौकस हो जाता है। यह पेड़ इतना महत्वपूर्ण है कि हर 15 दिन में इस पेड़ का मेडिकल चेकअप भी होता है।

ऐसे में इस पेड़ की निगरानी और रखरखाव में हर साल करीब 15 लाख रुपये का खर्च हो रहे है। यह पेड़ मध्य प्रदेश प्रसाशन को किसी भी हालत में बचाना ही पढ़ रहा है। आपको बता दे की श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति महिंद्रा राजपक्षे ने इस स्थान पर 21 सितंबर, 2012 को बोधि वृक्ष को रोपा था।

यह एक बोधि वृक्ष (Bodhi Tree) है, जिसकी बौद्ध धरम में बहुत अहमियत है। इसे श्रीलंका के तब के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने रायसेन के पास रोपा था। आज यह इतना बड़ा हो चूका है। कहा जाता है कि भगवान बुद्ध को इसी पेड़ के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ था। इसके अलावा भारत के सम्राट अशोक भी इसी पेड़ के सहारे शांति की खोज में गए थे।

आपको बता दे की श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति महिंद्रा राजपक्षे ने इस स्थान पर 21 सितंबर, 2012 को बोधि वृक्ष (Bodhi tree) को रोपा था। यह एक बोधि वृक्ष है, जिसकी बौद्ध धरम में बहुत अहमियत है। इसे श्रीलंका के तब के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने रायसेन के पास रोपा था। आज यह इतना बड़ा हो चूका है। कहा जाता है कि भगवान बुद्ध को इसी पेड़ के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ था। इसके अलावा भारत के सम्राट अशोक भी इसी पेड़ के सहारे शांति की खोज में गए थे।

आपको बता दें की इस पेड़ को 15 फीट ऊंची जालियों से घेर कर सुरक्षित किया गया है और दो सुरक्षा गार्ड 24 घंटे इसकी निगरानी करते रहते हैं। एक ऐसा अनुमान है की कोई पेड़ को नुकसान न पहुंचा पाए। यदि इस पेड़ का एक पत्ता भी गिरता है, तो अधिकारी तत्काल पेड़ के पास पहुंच जाते हैं। प्रति 15 दिन में पद की मेडिकल जांच की जाती है और खाद और पानी भी बराबर मात्रा में दिया जाता है। सांची नगर परिषद, पुलिस, राजस्व और उद्यानिकी विभाग लगातार इस का ख़याल रख रहा है।

अगर आप भी एक पेड़ को देखना चाहते हैं, तो आपको मध्यप्रदेश में भोपाल के पास सांची आना होगा। भोपाल से सांची लगभग 50 किमी की दूरी पर स्थित है। हवाई मार्ग से सांची पहुंचने के लिए आपको भोपाल में राजाभोज हवाई अड्डा सबसे नजदीकी पड़ेगा।

जानकारी हो की रायसेन जिले में सांची एक पर्यटन स्थल है और यहाँ का साँची स्तूप (Sanchi Buddhist complex) बहुत फेमस है। यहां सालों पहले बौद्ध यूनिवर्सिटी की स्थापना की गई। इसी यूनिवर्सिटी की पहाड़ी पर यह बोधि वृक्ष लगाया गया। उस समय के श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के साथ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी उपस्थित रहे थे। इस पेड़ की सुरक्षा पर अब तक सरकार लाखों रुपये खर्च कर चुकी है।

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