
Bibhutipur, Bihar अगर आप शांत मन से होकर मेहनत करते हैं, तो आपकी आर्थिक स्थिति कैसी भी हो आप आसानी से सफलता की सीढ़ी छू सकते हैं। कभी भी सफलता अमीरी गरीबी को नही देखती। आपके मजबूत इरादे आने वाली मुश्किलों से लड़ने की ताकत देती हैं। बेहतर भविष्य के लिए जरूरी है कि आप कड़ी मेहनत करते रहें।
खुद को कर बुलंद कर इतना कि हर तकदीर से पहले भगवान इंसान से खुद पूछे बता तेरी ख्वाइश क्या है। हुनार अपनी शिनाख्त खुद कराती है। किसी भी संसाधन की मोहताज नहीं होती। इस कहावत को सच सावित कर दिखाया है बेलसंडीतारा वार्ड 7 निवासी दिनेश पंडित और चंदर देवी के बेटे मनीष कुमार पंडित (Manish Kumar Pandit) ने।
इसने दारोगा बनकर प्रदेश में विभूतिपुर (Bibhutipur) का नाम गर्व से ऊंचा कर दिया। देश सेवा के जुनून बदन पर खाकी वर्दी शोभेगी और चेहरे की चमक बढ़ाएगी। सबसे आश्चर्य की बात तो यह है कि मनीष कई शादी त्यौहार पर हलवाई का काम किया है। दुकान के भीतर पढ़ाई करना ये बहुत बड़ी चुनोती थी, लेकिन उस चुनौती पर खरे उतरकर कामयाबी हासिल की है।
संसाधन की कमी
मनीष के माता-पिता अपने घर के समीप हीं सीमान चौक पर वर्ष 2001 से चाय नाश्ता की दुकान को चलाते हैं। लोग कहते हैं कि जब सुख सुविधाओं से संपन्न युवा अपनी कीमती समय को बेकार की जगह बिता रहे होते हैं।
ऐसे में सुविधाओं से वंचित इस छात्र ने दृढ़ संकल्पों के साथ सभी प्रकार की रुढियों को पार करते हुए करियर की बुलंदियों को अपने नाम किया। चाय वाले के बेटे के जोश, जज्बे और मेहनत के हिमालय भी बौना पड़ गया है। परिणाम आने के बाद दारोगा में चयन होने की खबर सुन लोग बधाई देने में जुटे है।
भाई बना सफलता का रास्ता
यह चाय वाले के बेटा का उदाहरण दूसरों के लिए प्रेरणादायी है। मनीष ने रघुनंदन सेठ उच्च विद्यालय सिघियाघाट से वर्ष 2011 में मैट्रिक की परीक्षा द्वितीय श्रेणी, जनता महाविद्यालय सिघिया बुजुर्ग से वर्ष 2013 में इंटरमीडिएट की परीक्षा प्रथम श्रेणी और वर्ष 2016 में ग्रेजुएशन की परीक्षा द्वितीय श्रेणी से पास की है।
दुकानदारी का काम देखते हुए आसपास के युवाओं के साथ संजीत स्मृति क्लब से प्रेक्टिस करते रहे। इस क्रम में भारतीय रेल के ग्रुप डी और एएलपी/टेक्निशियन में सफल नही हो पाए। लेकिन हार नही मानी। भारतीय रेलवे में कार्यरत चचेरे भाई सुधीर कुमार पंडित से प्रेरणा लेकर अपने होसलो को फिर से मजबूत किया।
फिर एक बार सफलता के मार्ग (Success Path) पर निकल पड़े। मनीष के माता पिता की मानें तो लाखों मुसीबतें झेलकर पुत्र की पढ़ाई करवाने के बाद आज सारे क्लेश समाप्त हो गए। आज उन्हें बेटे की सफलता पर गर्व है और सब एक साथ ख़ुशी से जीवन यापन कर रहे है।



