
Jodhpur: हर कोई सफल इंसान बनना चाहता है, लेकिन चाहने से कुछ नहीं होता है, उस चाह के पीछे कड़ी मेहनत और कई मुश्किलों का सामना भी करना पड़ता है। जो मुश्किलों का सामना करते हुए मेहनत करते रहते हैं, वह ही सफल हो पाता है।
ऐसे ही राजस्थान (Rajasthan) के जोधपुर जिले के एक युवक ने एक सपनों की उड़ान देखी थी और इस सपने की उड़ान को पूरा करने के लिए उन्हें काफी मेहनत करनी पड़ी। जोधपुर (Jodhpur) से लगभग 96 किलोमीटर दूर हरलाया गांव के बेटे ने झोपड़ी से निकलकर वायु सेना अधिकारी (Indian Air Force Officer) बन सभी के लिए एक मिसाल कायम किया।
पांच बहनों के इकलौते भाई है निंबा
जोधपुर के हरलाया गांव के निंबाराम कड़वासरा का जन्म 2001 में हुआ था। पांच बहनों के इकलौते भाई है निंबा और चार बड़ी बहनों की शादी हो चुकी है। वहीं छोटी बहन और निंबा की अभी शादी नहीं हुई है। निंबा जब नवीं क्लास में पढ़ते थे। उसी समय उनके पिता की मृत्यु हो गई और घर में काफी मुश्किलें आने लगी। जिसके चलते निंबा को पढ़ाई छोड़ने जैसी नौबत आ गई लेकिन मां के हौसले ने बेटे को भी हौसला दिया और उससे अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए कहा।
चेन्नई में ट्रेनिंग
निंबा वायु सेना ज्वाइन करना चाहते थे, इसीलिए उन्होंने कर्नाटक के बेलगांव के सांभर स्थित ट्रेनिंग स्कूल में प्रशिक्षण लेना शुरू किया और सितंबर 2019 के बैच में 2620 में से 902 वी रैंक पर एयर फोर्स ग्रुप एक्स तकनीक पद पर चयन हुआ और 4 जुलाई 2020 को निंबा सामरा स्थित एयरमैन ट्रेनिंग स्कूल के लिए रवाना हुए। यहां दिसंबर 2020 तक बेसिक ट्रेनिंग होगा और फिर चेन्नई में ट्रेनिंग होगी इसके बाद पोस्टिंग की जाएगी।
मेहनत और लगन से परिवार वाले खुश
निंबाराम की इस कामयाबी से परिवार में सब खुश और सभी उनकी मेहनत की तारीफ कर रहे हैं। निंबा का बचपन झोपड़ी में बीता है, लेकिन उन्होंने अपनी कमियों को कभी अपनी कमजोरी नहीं बने दिया। निंबा ने 89% से 10 वीं और 90% अंक से बारहवीं बोर्ड परीक्षा पास की थी।
इंडियन फोर्स का फॉर्म भरा
आईआईटी करने के लिए सीकर के एक कोचिंग में दाखिला ले लिया था। इसी दौरान डिफेंस सर्विस की तैयारी करने लगे। इंडियन फोर्स का फॉर्म भरा और कड़ी मेहनत की बदौलत 2019 में उनका चयन भी हो गया उनकी कड़ी मेहनत और लगन से परिवार वाले खुश हैं साथ ही भारत को भी ऐसे बेटे पर गर्व है।
हमें भी निंबाराम से सीख लेनी चाहिए, जिन्होंने कभी भी अपनी कमियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दी और अपने हौसले को बुलंद रखा। इसी बुलंद हौसले का नतीजा है कि आज वह एयर फोर्स में चयनित हो गए हैं।



