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Sangrur: हाल ही सोशल मीडिया में इस अफसर को गेहूं की फसल की कटाई करते हुए देखा गया। मुंह पर सूती कपड़ा और हाथ में दाती लेकर डीसी साहब ने खेतों पर गेहूं काटकर सबको आश्चर्य में डाल दिया। रामवीर सिंह अपने सरकारी आवास में एक गाय भी रखते हैं, ताकि अपने हाथों से वो दूध निकाल सकें।
रामवीर सिंह (IAS Ramvir Singh) का मानना है कि इंसान को कभी भी अपना पुराना समय नहीं भूलना चाहिए। अपनी जिंदगी में कड़ी मेहनत औऱ लगन से आईएएस अफसर (IAS Officer) बनने की कई कहनियां हमने के कहानियों से रूबरू करवाया है। ये कहानी सबसे अलग है। आज हम जिस आईएएस अफसर की बात कर रहे हैं उनके बारे में आपको बता दें कि एक बड़े प्रशासनिक पोस्ट पर होने के बावजूद वो खेती भी करते हैं।
कौन है किसान का IAS बेटा
ये हैं 2009 बैच के आइएएस अधिकारी रामवीर सिंह (Deputy Commissioner)। संगरूर में जिला उपायुक्त (डीसी) तैनात रामवीर सिंह आज भी जमीन से जुड़ा रहना पसंद करते हैं। प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ वह खेतों में काम करते हुए देखे जा सकते हैं। रामवीर सिंह, इंसान बेशक कामयाबी की सीढ़ियां चढ़कर किसी भी मुकाम पर पहुंच जाए, लेकिन अपनी विरासत बचाने और अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए उसे हमेशा अपनी जमीन और परंपरा से जुड़े रहना चाहिए।
खेती को अलविदा कहकर बेशक आज युवा पीढ़ी विदेश का रुख कर रही है, लेकिन अपनी मिट्टी व खेती (Kheti) को बचाकर रखना हर किसान परिवार के बेटे का कर्तव्य है। अपने फर्ज से कभी पीछे नही हटना चाहे दुनिया की कितनी बड़ी सोहरत ना मिल जाये। रामवीर कहते हैं कि वह एक किसान परिवार (Farmer Family) से हैं, जिसे वह कभी नहीं भूलते।
वह आज भी अपने परिवार समेत खेतों में काम करते हैं। बैसाखी पर खेतों में सोने की तरह लहरा रही गेहूं की फसल की कटाई का समय है, तो रामवीर भी दरात (दाती) लेकर व चेहरे पर सूती कपड़ा बांधकर मजदूरों के साथ गेहूं की कटाई करने में जुट हुए हैं।
इतना ही नहीं, संगरूर स्थित सरकारी रिहायश पर गायों का दूध निकालने से लेकर गेहूं की फसल की संभाल तक वह स्वयं कर रहे हैं। यह कार्य करने के पीछे उनका एक ही उद्देश्य है कि नई पीढ़ी अपने परिवार की परंपरा को भूले नही। अपनी परंपरा को आगे बढ़ाएं।
दिल्ली स्थित जेएनयू (JNU) से राजनीति शास्त्र में ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने एमए की पढ़ाई की थी। उन्होंने सिक्योरिटी रिलेशंस में एमफिल भी की है। पढ़ाई-लिखाई में मेधावी रामवीर सिंह आईएएस अधिकारी बनने से पहले आईआरएस अधिकारी के तौर पर सेलेक्ट हुए थे।
खेती बनी आनन्द देने वाली
रामवीर सिंह एक कुशल प्रशासनिक अधिकारी होने के अलावा एक बेहतरीन किसान भी हैं। सरकारी रिहायश की जमीन पर जैविक खेती कर रामवीर सिंह (IAS Ramvir Singh Organic Farming) युवाओं पीढ़ी के लिए किसी प्रेरणा से कम नही है। पंजाब के संगरूर में उपायुक्त है रामवीर सिंह, बचा हुआ समय खेतो में बिताते है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रामवीर सिंह पंजाब के संगरूर जिले में उपायुक्त के पोस्ट पर है। वो प्रशासनिक कार्यो को काफी अच्छे तरीके से निर्वाह करते है और सब कुछ अच्छा ही चल रहा है। मगर जब उनका ऑफिस का काम खत्म हो जाता है और वो फ्री हो जाते है तो फिर वो अपना बचा हुआ समय खेतो में जाकर के खेती आदि करने में बिताते है और ये करने में उनको बहुत आनंद की अनुभूति होती है।
पिता से मिली शिक्षा
ये काम करने की प्रेरणा उन्हें अपने पिता से मिली। आईएएस अफसर रामवीर सिंह के पिता भी एक सरकारी नौकरी में ही थे और जब वो रिटायर हो गये तो फिर उन्होंने खेती करने का काम स्टार्ट कर दिया। पहले तो पिता के पीछे पीछे किया था, लेकिन फिर उन्हें इसमें मज़ा आने लगा और देखते ही देखते वो इस काम में बहुत ही अधिक रम गये।
इतने बड़े पद पर होने के बाद भी उनको खेती करने में कोई झिझक नही है। आज आईएएस रामवीर सिंह खेती (IAS Ramvir Singh Farming) के मामले में बहुत ही शानदार काम करते है और लोगो के बीच में एक मिसाल कायम कर चुके है।
लोकप्रियता सबसे हट के है
कही न कही वो जमीन से जुड़े इंसान की तरह है, जो अपनी मिट्टी को छोड़ना पसंद नही करता है और कही न कही इस कारण से ही लोगो के बीच में भी उनकी लोकप्रियता सबसे हट के है। लोग उनको मानते है और उनकी कही बातो को अधिक ध्यान दिया करते है।
Mr. Ramvir, a 2009-batch IAS officer, assumed the charge as Deputy Commissioner,Sangrur on Tuesday here at District Administrative Complex.
Before joining at Sangrur, Mr. Ramvir has been working as MD PUNSUP and he had also served as DC in several districts. pic.twitter.com/FAHOOURDeX— DC Sangrur (@dc_sangrur) June 16, 2020
आखिर उन्होंने जो किया है वो किसी पहचान का मोहताज नही है। देश में ऐसे कई अफसर है जो अपने अपने क्षेत्र में अनूठी पहचान छोड़ रहे है और लोग उनको पसंद भी करते है, मगर रामवीर सिंह जैसे लोग इसे एक दायित्व और शौक की तरह करते है जो उनको और भी अधिक लोकप्रिय बना देता है।
कीमती समय व्यर्थ नही जाने देते
रामवीर सिंह ने बताया कि दिन का समय ऑफिस कामकाज में गुजर जाता है। इसके बाद अनाज मंडी में गेहूं की चल रही खरीद का भ्रमण करने निकल पड़ते हैं। शाम को घर लौटने के बाद वह सरकारी रिहायश परिसर स्थित खेत में निकल पड़ते हैं। यहां गेहूं की फसल ही नहीं, बल्कि सब्जियां व फल की भी काश्त होती है, जिनकी कांट-छांट करने सहित इनकी संभाल में अपना कीमती समय व्यतीत करते है।
बच्चों को अपनी मिट्टी से जोड़ने में कामयाब
रिहायश के एक हिस्से में दुधारू पशु रखे हुए हैं, जहां से वह सुबह उठकर रोजाना गायों का दूध निकालते हैं। इससे न केवल उन्हें मानसिक सुकून मिलता है, बल्कि उन्हें इस बात की भी खुशी है कि वह अपने बच्चों को अपनी मिट्टी से जोड़ने में कामयाब हुए हैं। बच्चों को यह पता चलता है कि आखिर वे कैसे परिवार से तालुकात रखते हैं।



