प्लास्टिक और बांस की बोतल से बना दिया ‘पंपिंग सेट’, बिना बिजली-डीजल के पानी देती मशीन

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Odisha Farmer Mahur Tipiria
Odisha Farmer Mahur Tipiria Makes Sustainable Irrigation System and Pumping Set. Bamboo sticks and plastic bottles used by farmer to create irrigation system.

Mayurbhanj: भारत एक कृषि प्रधान देश है और किसान देश का अन्न दाता है। खेती करने में बड़ी बड़ी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। खेती की सिचाई बिजली पर ही निर्भर रहती है। बिजली ना मिलने पर खेतो में सिचाई नही हो पाती जिसके कारण फसल भी सही से उत्पन्न नही हो पाती। इन सब परेशानी को देखते हुए टिपिरिया ने इस यंत्र का अविष्कार किया। जिसमें बिजली का रोल ही ना हो।

बिना बिजली के भी खेतो में सिचाई की जा सके। इस यंत्र को कंटाखैरी नदी के तट पर लगाया है। इस यंत्र के साथ बड़ी बात यह है कि इसे चलाने के लिए किसी इलेक्ट्रिक मोटर, टेक्निकल उपकरण या सौर ऊर्जा की आवश्यकता नही पड़ती है।

वैज्ञानिक भी हैरान

यह कहानी ओडिशा के बारीपाडा जिले की है। इसे किसी चमत्कार से कम नहीं कहेंगे कि तंगहाली में एक किसान ने ऐसा आविष्कार किया कि बड़े-बड़े वैज्ञानिक भी देखते रह गये। यह कहानी मयूरभंज (Mayurbhanj) के माहुर टिपिरिया (Mahur Tipiria) की है, जिन्होंने बांस और प्लास्टिक की बोतलों (Plastic Bottles) के सहारे ऐसा यंत्र (Machine) बनाया, जो पानी की बूंद के लिए तरस रहे कई खेतों में सिंचाई (Watering on Farms) करता है।

कौन है उसके आविष्कारी

35 साल के माहुर टिपिरिया मयूरभंज (Mahur Tipiria From Mayurbhanj Odisha) जिले के सुकरुली के रहने वाले हैं। डीजल की बढ़ती महंगाई और बिजली की कमी को देखते हुए उनके दिमाग मे एक अद्भुत विचार आया। उनको पता नही था कि ये कितना सही है इसका इस्तेमाल सही भी होगा या नही।

आइडिया को साकार करने के लिए टिपिरिया ने बांस की कुछ बल्लियां (Bans Balli Bamboo) लीं और बेकार पड़ी प्लास्टिक की बोतलें (Plastic Bottles) इक्ठा की। जो इनके अविष्कार को सफल बनाने में कारगार थी। इन सब को मिलाकर उन्होंने सिंचाई का एक यंत्र बना दिया। इसे पंपिंग सेट (Pumping Set Machine) तो नहीं कह सकते, लेकिन इसका काम उससे कम भी नहीं।

इस यंत्र (Sustainable Irrigation System) को चलाने जे लिए किसी प्रकार की बिजली की आवश्यकता नही पड़ती है। बिना बिजली के भी इसका उपयोग कर सकते है। इसमें बिजली की कोई झंझट नही है। अधिकतर यंत्र के उपयोग में बिजली का ही इस्तेमाल होता है। जिससे बिजली गोल होने पर उसका इस्तेमाल नही किया जा सकता।

दरअसल टिपिरिया ने बांस और प्लास्टिक की बोतलों को आइरन रॉड (Iron Road) से जोड़ते हुए पानी खींचने का यंत्र (Water Pumping Machine) बना दिया। अब उनकी मेहनत और लग्न को देखते हुए पूरे ओडिशा में यह सुर्खियों का विषय बन गया है।

आइडिया ने बनाया सबसे लोकप्रिय

मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, माहुर टिपिरिया का यह यंत्र उनके तीन एकड़ खेत की सिंचाई करने में सफल साबित हुआ है। बिना किसी झंझट के सिंचाई आसानी से हो जाती है। महज दूसरी क्लास तक की पढ़ाई करने वाले टिपिरिया आज बड़े-बड़े वैज्ञानिकों के लिए किसी प्रेरणा से कम नही है।

उनके अविष्कार को देख बड़े बड़े लोग भी हैरान है। लोग उनके इनोवेशन आइडिया को अद्भुत बता रहे हैं और उनकी मेहनत की सराहना भी कर रहे है। टिपिरिया के अनुसार उनके सामने यह यंत्र बनाने के अलावा कोई और विकल्प नहीं था क्योंकि खेती ही उनका आसरा है जिसे वे हर हाल में बनाए रखना चाहते हैं। किसी भी कीमत पर वो खेती का काम बंद नही करना चाहते थे।

बिजली की झंझट नही

टिपिरिया ने इस यंत्र को कंटाखैरी नदी के तट पर लगाया है। इस यंत्र के साथ बड़ी बात यह है कि इसे चलाने के लिए किसी इलेक्ट्रिक मोटर, टेक्निकल उपकरण या सौर ऊर्जा की आवश्यकता नहीं पड़ती है। इसे बनाने के लिए एक महीने की मेहनत लगी और 15 दिन पहले ही इस वाटरव्हिल ने काम करना स्टार्ट कर दिया।

टिपिरिया के अनुसार, खरीफ की फसल के बाद खेत परती पड़े रहते थे और सिंचाई की कमी के चलते खेती भी नहीं हो पा रही थी। रबी फसल की तैयारी करनी थी, लेकिन इसके लिए किसी बिजली से चलने वाली मोटर की आवश्यकता पड़ती ताकि सिंचाई की जा सके।

इन परेशानियों को देखते हुए इस आईडिया पर काम किया और आज वाटरव्हिल के रूप में यह यंत्र सबके सामने है। कभी सिंचाई की कमी से जूझते टिपिरिया आज तीन एकड़ के खेतों में सरसों, गेहूं और सब्जियों की खेती बिना किसी झंझट के आसानी से करने लगे हैं। नदी के तट पर जहां यह यंत्र लगाया गया है, वहां से मात्र 300 मीटर की दूरी पर टिपिरिया के खेत हैं।

खेतों ने लगी क्यारी तक ऐसे पहुंचता है पानी

मयूरभंज के इस किसान को लगा कि जुगाड़ू यंत्र बनाने में किसी रॉकेट साइंस की आवश्यकता नहीं और हम अपने आसपास की बेकार पड़ी चीजों से ही बड़े काम के यंत्र बनाकर उनका उपयोग कर सकते हैं। टिपिरिया ने ऐसा यंत्र बनाया है वह एक तरह का वाटरव्हिल है, जो गुरुत्वाकर्षण के नियमों पर कार्य करता है। आइरन रॉड और बांस से पिरोई हुई बोतलें तालाब से पानी खींचती हैं और नीचे की तरफ फेंकती हैं। फिर इस पानी को क्यारी के माध्यम खेतों तक पहुंचाया जाता है।

इस विचार से पहले टिपिरिया प्रवासी श्रमिक के तौर पर ओडिशा से बाहर कार्य करते थे। लेकिन आपदा के चलते बहुत दिक्कत का सामना करना पड़ा। अब इस यंत्र की हेल्प मिलने से वे खुश हैं और अपने घर पर रहकर ही खेती करने को तैयार हैं। टिपिरिया के इस आविष्कार को देखने के लिए आसपास के जिले के किसान उनके घर पहुंच रहे हैं और इस नई तकनीक के बारे में इन्फॉर्मेशन ले रहे हैं। टिपिरिया को इस अनोखे आविष्कार के लिए सम्मानित किए जाने की तैयारी है।

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