नीरज चोपड़ा ने 100 साल का सूखा किया ख़तम, एथलेटिक्स में दिलाया 2021 का पहला गोल्ड

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Niraj Chopra Gold
Neeraj Chopra Makes History, Wins Gold In Javelin Throw in Tokyo Olympics 2020. Neeraj Chopra wins historic athletics gold as India record best ever haul of 7 medals.

File Image Credits: Twitter

Delhi: भारत के लिए आज का दिन बहुत ही लकी रहा है। आज इतिहास रच दिया है। भारत के एथलीट नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra) ने टोक्यो ओलंपिक में देश कि आज़ादी के बाद हासिल किया गोल्ड मेडल (Gold Medal)। नीरज ने जैवलिन थ्रो (Javelin Throw) प्रतियोगिता में भारत को टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympic) में पहला गोल्ड मेडल दिया है। क्वालीफाइंग राउंड की तरह ही नीरज का प्रदर्शन फाइनल में भी बेहद शानदार खेल प्रस्तुत किया।

उन्होंने एथलेक्टिक्स में मेडल के 100 साल के सूखे को भी खत्म कर दिया है। नीरज ने फाइनल (Neeraj Chopra in Final) मैच में अपना पहला ही थ्रो 87.03 मीटर का भाला (Bhala) फेंका और गोल्ड की उम्मीद जगा दी। इसके बाद दूसरे प्रयास में नीरज ने 87.58 मीटर का थ्रो फेंककर गोल्ड मेडल (Gold In Javelin Throw) हासिल कर ही लिया।

नीरज (Neeraj Chopra) ने इससे पहले क्वालीफाइंग राउंड में भी अपने प्रदर्शन से स्टेडियम मैं सबको हैरान कर दिया था। उन्होंने टेबल में टॉप पर रहते हुए पहले ही प्रयास में 86.65 मीटर का थ्रो फेंका था और 83.65 के क्वालीफिकेशन राउंड को आसानी से पार कर लिया था। नीरज इससे पहले कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियाई चैंपियनशिप में भी गोल्ड पदक हासिल कर चुके हैं।

यही कारण है कि पूरे भारत देश की निगाहें उनके ऊपर टिकी हुईं थीं। टोक्यो ओलंपिक में यह भारत का पहला गोल्ड मेडल है और अब पदकों की कुल संख्या 7 हो गई है, जिसमें एक गोल्ड, 2 सिल्वर और 4 ब्रॉन्ज मेडल भी शामिल हैं। नीरज भारत से ओलंपिक खेलों में गोल्ड मेडल जीतने वाले सिर्फ दूसरे खिलाडी ही हैं। उनसे पहले साल 2008 में अभिनव ब्रिंदा ने निशानेबाजी में भारत को गोल्ड मेडल (Gold Medal For India) दिया था।

ओलंपिक में एथलीट्स खेलों में भारत का पहला गोल्ड मेडल है और इसके साथ ही 23 साल के नीरज चोपड़ा ने इतिहास रच दिया है। नीरज ने अपने पहले दो थ्रो में ही गोल्ड मेडल पक्का कर लिया था। बाकी एथलीटों ने काफी प्रयास किया, लेकिन वह नीरज के 87.58 मीटर के थ्रो के आस पास भी आ नहीं सके।

अदिति अशोक मेडल से चूकीं

टोक्यों ओलिंपिक में गोल्फ के चौथा और फाइनल राउंड में भारतीय गोल्फर अदिति अशोक चौथे स्थान रहीं। इसके साथ ही वह पदक जीतने के साथ-साथ इतिहास रचने से भी चूक गईं। न्यूजीलैंड की लीडिया को से उन्हें कड़ी टक्कर मिली ।लीडिया ने कांस्य पदक। अमेरिका की नैली कोरडा ने गोल्ड और जापान की मोने इनामी ने सिल्वर अपने नाम किया। टोक्यों में खराब मौसम के कारण मैच थोड़ी देर रोकना पड़ा था।

बता दें कि भारतीय गोल्फर ने शनिवार को काफी अच्छी शुरुआत की थी। चौथे राउंड में शुरुआती तीन होल पर पार-4 का स्कोर किया है और पहले स्थान पर पहुंच गई थीं। वह अमेरिका की नैली कोरडा के साथ संयुक्त रूप से पहले स्थान पर थीं। अदिति शुक्रवार को तीन दौर के बाद 12 अंडर 201 के स्कोर के साथ दूसरे स्थान पर थीं। अमेरिका की नैली कोरडा उनसे तीन स्ट्रोक्स आगे थीं, जिन्होंने इस दौर में दो अंडर 69 स्कोर किया था।

भारत के प्रसिद्ध पुरुष रेसलर बजरंग पूनिया ने टोक्यो ओलिंपिंक 2021 में जीता मेन्स फ्रीस्टाइल 65 किलो कैटेगरी कुश्ती प्रतियोगिता में ब्रॉन्ज मेडल ओर किया देश का नाम रोशन। ब्रॉन्ज मेडल के लिए हुए इस मैच में उन्होंने अपने विरोधी कजाकिस्तान के रेसलर दौलत नियाजबेकोव को 8-0 से कारारी हार दी और ये ब्रॉन्ज मेडल हासिल कीये। ये टोक्यो ओलिंपिक 2020 में भारत का छठा मेडल रहा।

बजरंग ने मैच की शुरुआत शानदार उम्दा तरीके से की और 1-0 की बढ़त हासिल कर ली। मैच के हाफ टाइम यानी तीन मिनट में ही बजरंग ने दौलत पर 2-0 की बढ़त हासिल कर ली थी। पहले हाफ में बजरंग पूरी तरह से दौलत पर हावी नजर आए। दूसरे हाफ का खेल शुरू हुआ ओर बजरंग ने फिर से दौलत पर हमला कर दिया और आक्रामक रुख अपनाते हुए 2 अंक अर्जित कर लिए और इस तरह उन्होंने 4-0 की बढ़त बड़े है आसान तरीके से बना ली। इसके ठीक बाद उन्होंने अपनी बढ़त 6-0 कर ली। आखिरी के मिनट में बजरंग और आक्रामक नजर आए और 8-0 से मुकाबला अपने नाम कर लिया।

बजरंग का टोक्यो ओलिंपिक में सफर कुछ इस तरह रहा। उन्होंने राउंड 16 में अपने विरोधी कजाकिस्तान के पहलवान को टेक्नीकल सुपीरियरिटी के आधार पर हराया। ये मैच 3-3 की बराबरी के साथ समाप्त हुआ था, लेकिन इसके बावजूद बजरंग तकनीकी रूप से ज्यादा बेहतर पाए गए और उन्होने जीत हासिल कि।

वहीं क्वार्टर फाइनल में उनका सामना ईरानी पहलवान के साथ हुआ जहां उन्होंने 2-1 से वो मुकाबला अपने नाम किए। इसके बाद सेमीफाइनल में हुए मुकाबले में उन्हें अल्जीरिया के पहलवान के हाथों 5-12 से हार का सामना करना पड़ा और उनका फाइनल में गोल्ड का सपना टूट गया। इस भार वर्ग में वर्ल्ड नंबर वन बजरंग से कुछ ज्यादा ही बड़े की उम्मीद थी, लेकिन उन्होंने ब्रॉन्ज जीता ओर देश का नाम रोशन किया।

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