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Bhopal: आज सभी भारतीय और खेल प्रेमी बहुत खुश है। भारतीय महिला हॉकी टीम (Indian Women Hockey Team) ने टोक्यो ओलंपिक 2020 (Tokyo Olympics 2020) के सेमीफाइनल (Semi Finals) में जगह बना ली है। टीम इंडिया ने क्वार्टर फाइनल में ऑस्ट्रेलिया (Australia) जैसी पक्की टीम को 1-0 से हराया। बता दे की ऐसा पहली बार है, जब भारत की महिला हॉकी टीम ने ओलंपिक के सेमीफाइनल में स्थान बनाया हो।
इस मैच में भारत की तरफ से गुरजीत कौर ने एक मात्र गोल किया, लेकिन भारत की जीत गोलकीपर सविता पुनिया (Savita Punia Indian Women Hockey Goal Keeper) ने पक्की की। अपने शानदार प्रदर्शन के बाद गोलकीपर सविता को ‘ग्रेट वॉल ऑफ इंडिया’ (The Great Wall of India) कहा जा रहा है। उन्होंने इस मैच में नौ गोल शॉट (9 गोल) बचाकर ऑस्ट्रेलिया का एक भी गोल नहीं होने दिया। इनमें 7 पेनाल्टी कॉर्नर और 2 फील्ड गोल के शॉट शामिल हैं।
ख़ास बात यह है की डिफेंस की बात बेहत अहम् है, क्योंकि पूल राउंड के अपने आखिरी मैच में करो या मरो के मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारत का डिफेंस काफी कमजोर दिखा था। भारत ने इस मैच में चार गोल किए थे, लेकिन तीन गोल खाए भी थे। हर राउंड में अफ्रीकी टीम भारत की बढ़त को बराबर करने में सफल हो रही थी। ऐसे में तीन बार की ओलंपिक गोल्ड चैंपियन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत ने उन खामियों से सीख ली और इतिहास बना दिया।
Pride🖤#TeamIndia pic.twitter.com/SMMEi2xTAy
— Nevin K Titus ⚡️ (@Nevinktitus) August 2, 2021
भारत ने अपने पिछले मुकाबले से सबक लेते हुए ऑस्ट्रेलिया को वापसी का मौका नहीं दिया। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हाफ टाइम तक भारत 1-0 से आगे था। ऑस्ट्रेलियाई टीम गोल करने की हरसंभव प्रयास कर रही थी, परन्तु सविता और भारतीय डिफेंडरों के सामने वह कुछ न कर पाई। कंगारू टीम ने तीसरे क्वार्टर के शुरू में स्टीवर्ट ग्रेस के प्रयासों से मौका भी बनाया, फिर भी भारतीय गोलकीपर ने मारिया विलियम्स के शॉट को रोक कर यह प्रयास असफल कर दिया। ऑस्ट्रेलिया ने इसके बाद दो पेनल्टी कार्नर हासिल किए, लेकिन सविता की अगुआई में भारतीय डिफेंडर्स बड़ी निडरता के साथ आगे बढ़ी।
भारतीय महिला हॉकी टीम ने ओलंपिक में इतिहास रचा
भारतीय महिला हॉकी टीम (Indian Womens Hockey Team) ने पहली बार ओलंपिक के सेमीफाइनल में जगह बनाई। महिला टीम केवल तीसरी बार ओलंपिक में खेली है। 2016 रियो ओलंपिक (2016 Rio Olympics) में टीम 12 वें नंबर पर रही थी। इसके अलावा 1980 में टीम चौथे नंबर पर रही थी।
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बता दे की भारत की दिवार बनी हरियाणा (Haryana) की रहने वाली सविता पुनिया ने 2008 में अंतरराष्ट्रीय सर्किट पर अपनी शुरुआत की। सविता ने केवल 17 साल की उम्र में जूनियर टीम में काफी उम्मीदें दिखाकर राष्ट्रीय टीम में जगह बना ली। 2013 में उन्होंने भारतीय महिला हॉकी टीम की तरफ से महिला एशिया कप में खेला। इसके फाइनल में पुनिया ने पेनल्टी शूटआउट में दो महत्वपूर्ण गोल बचाए, जिससे भारत को कांस्य पदक जीतने में मदद मिली।
सविता (Savita Punia Indian Women Hockey Goal Keeper) इंचियोन में 2014 एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीतने वाली टीम का भी हिस्सा बनी। सविता ने 36 साल के लंबे अंतराल के बाद महिला टीम को रियो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कराने में भी बड़ी अहम् भूमिका निभाई थी। इस तरह वे भारतीय महिला टीम की एक अहम् खिलाड़ी बन गई।
Take a bow to Champ🎉🥳🙌🏑#SavitaPunia pic.twitter.com/g4FM4Z8QVo
— . (@hanu_mevada) August 2, 2021
मीडिया रिपोर्ट्स बताती है की जब सविता 2003 में कोच सुंदर सिंह खरब के नेतृत्व में सिरसा में हरियाणा सरकार की हॉकी नर्सरी में शामिल हुई, तो वह हमेशा अपने गांव जोधका से हरियाणा रोडवेज की बसों में अपने गोलकीपिंग किट ले जाया करती थीं। वह हमेशा अपने पिता से शिकायत करती थीं कि बस कंडक्टर उसके किट को अपने पैरों से छू रहे हैं या दो किट की वजह से उसे बस में चढ़ने से मना कर रहे हैं।
सविता पुनिया हरियाणा के सिरसा जिले के गांव जोधकां से हैं
31 साल की सविता पुनिया हरियाणा के सिरसा जिले के गांव जोधकां की रहने वाली हैं। उनके गांव में हॉकी का इंफ्रास्ट्रक्चर और वो सुविधाएं नहीं थी। इसके बाद दादा उन्हें सिरसा स्थित साई सेंटर में लेकर गए और यहीं से उनके हॉकी करियर की शुरुआत हुई। 2008 में उन्हें पहली बार इंटरनेशनल मुकाबला खेलने को मिला। उन्होंने अपनी गोलकीपिंग को सुधारने के लिए लड़कों के साथ हॉकी खेली। लड़के ताकत के साथ ड्रैग फ्लिक करते थे।तेज रफ्तार से आती बॉल को रोकने के लिए भी ताकत और तेजी की जरूरत होती थी।
सविता पुनिया भारतीय हॉकी टीम की गोलकीपर ।
ऑस्ट्रेलिया जैसी दिग्गज टीम को एक बार भी गोल करने का मौका नही दिया।
महिला हॉकी टीम की गोल कीपर पुनिया के द्वारा 8 पैलनटी कॉर्नर रोकने की वजह से सैमी फाइनल में जगह बना पाई ।#SavitaPunia pic.twitter.com/49SBcsNe3k— Rakesh Godara (@RakeshGodaraINC) August 3, 2021
सविता की माता जी लीलावती ने हाल ही इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बेटी को लेकर एक जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था वो टोक्यो में मेडल जीतें या ना जीतें वो हमेशा यह सुनिश्चित करती है कि अपनी पुरानी गोलकीपिंग किट गांव की जरूरतमंद खिलाड़ियों को दे। मां को उम्मीद है कि सविता इस बार ओलंपिक से मेडल लेकर ही लौटेंगी और उनके खेल से कई और सविता प्रेरित होंगी।
महिला गोलकीपर सविता को ‘ग्रेट वॉल ऑफ इंडिया’ (The Great Wall of India) कहा गया
सविता की जबरदस्त प्रदर्शन के बाद सोशल मीडिया पर फैंस खुशी से खुले नहीं समा रहे है। फैंस ने उनकी तुलना पुरुष हॉकी टीम के गोलकीपर श्रीजेश से की। भारत में ऑस्ट्रेलिया के हाई कमिश्नर बैरी ओ फैरेल ने टीम इंडिया को बधाई देते हुए सविता को द ग्रेट वॉल ऑफ इंडिया के नाम से संबोधित किया। उन्होंने ट्वीट किया कि भारत की महिला हॉकी टीम ने ऑस्ट्रेलिया को हराते हुए पहली बार ओलंपिक के सेमीफाइनल में पहुंचकर इतिहास रच दिया है।
फाइनल से पहले भारतीय टीम का सामना अर्जेंटीना से चार अगस्त को होगा। टीम के हालिया प्रदर्शन से 41 साल में पहली बार महिला हॉकी में पदक की उम्मीद जगी है। इसस पहले भारतीय टीम मास्को ओलंपिक 1980 में चौथे स्थान पर रही थी, लेकिन केवल 6 टीमों ने हिस्सा लिया था और मैच राउंड रोबिन आधार पर खेले गए थे।



