अंग्रेजी कमजोर होने की वजह से कॉलेज में मजाक बना, UPSC टॉप कर IAS बन सुरभि ने दिया जवाब

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Anukriti Sharma IAS
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File Photo Credits: Twitter

Delhi: UPSC परीक्षा क्लियर करना आसान काम नहीं होता। इसके लिए सब कुछ त्यागना पड़ता है, घंटों तपस्या करनी पड़ती है। ख़ास कर अगर एग्ज़ाम IAS का हो तो। इस मुश्किल काम को ग्रामीण क्षेत्र की एक लड़की ने कर दिखाया है। इस लड़की ने अपनी मेहनत और लगन से इस बात को साबित कर दिया कि अगर आप एक बार ठान लें, तो बड़े से बड़ा कठिनाई भी आपके रास्ते का कांटा नही बन सकती।

सुरभि गौतम (Surabhi Gautam) को जीनियस कहना ग़लत नहीं होगा। उन्होंने हिंदी बैकग्राउंड से होने की वजह से हीन भावना से लड़ाई की। लगभग हर प्रतियोगी परीक्षा क्रैक की। आज वह एक IAS अधिकारी हैं। सुरभि के घर में इतने लोग थे कि किसी के पास इतना समय नही था कि वे अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दे सकें। हर कोई अपने अपने काम मे व्यस्थ रहता।

वे जब पांचवी कक्षा में थी, तो उनका बोर्ड का रिजल्ट आया, जिसमें उनके मैथ्स में 100 में 100 नंबर आये थे। उनकी कॉपी देखकर टीचर ने सुरभि की तारीफ की और उन्हें मोटिवेट किया की तुम आगे और भी अच्छा कुछ बड़ा करने की हिम्मत रखती हो। वो उनकी जिंदगी का पहला मौका था कि उन्हें किसी ने नोटिस किया था। बस उसी पल वे समझ गईं की अगर थोड़ी भी इंपॉर्टेंस किसी की नज़र में आना है, तो पढ़ाई ही एकमात्र साधन है। उस दिन से सुरभि ने सबसे अलग से अपनी पहचान बनाने के लिए पढ़ाई को माध्यम बनाने की जिद बना ली।

बचपन की बात सच हुई

सुरभि की सफलता (Success) की तो बस अभी शुरुआत हुई थी। उनका दसवीं का परिणाम (Result) आया तो, इस बार उन्होंने मैथ्स के साथ ही साइंस में भी 100 में 100 अंक प्राप्त किए थे साथ ही उनकी अच्छी रैंक भी आयी थी। मीडिया से बातचीत के दौरान उनसे पूछा कि बड़े होकर क्या बनेंगी। सुरभि ने इसके पहले कभी गंभीरता से नहीं सोचा था कि करियर किस क्षेत्र में बनाएंगी।

https://twitter.com/surajkaul4/status/1407346846494871552

उन्होंने वही जवाब दिया कि नहीं पता क्या बनुगी। इस पर उनसे कहा गया कि ये क्या उत्तर हुआ कुछ तो जवाब देना होगा, फिर उनके दिमाग में जो आया कह दिया कि बड़े होकर कलेक्टर बनूंगी, बस अगले दिन अखवार की हेडलाइन में यह छप गया। सुरभि के मन में भी यही बात बैठ गई। जो बड़े होकर उनका सपना बन गई।

पढ़ाई जारी रखने गांव से बाहर जाने वाली बनी पहली लड़की

सुरभि पढ़ाई में लगातार सफलता हासिल कर रही थी और उनको पीसीएम में सबसे ज्यादा अंक लाने के कारण एपीजे अब्दुल कलाम स्कॉलरशिप भी मिल गयी थी। गाँव मे आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए पर्याप्त संसाधन नही थे। लेकिन उनको पढ़ाई जारी रखनी थी। इसके लिए वो कुछ भी कर सकती थी।

12वीं के बाद सुरभि गांव से बाहर इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए गयीं और वहां की पहली लड़की बनी जो गांव से बाहर पढ़ने गयी। क्लास में पहुंची तो उन्हें वहां सब अलग लग रहा था गांव से बाहर निकलकर पढ़ाई करना आसान नही था। उनके लिए अलग इसलिए था क्योंकि उनको अच्छे से इंग्लिश भाषा नही आती थी। सब बच्चे जहां फटाफट इंग्लिश में आंसर कर रहे थे, वहीं सुरभि सवाल का जवाब आने पर भी इंग्लिश न आने की वजह से कोई जवाब नहीं दे पायीं।

लैब में एक्सपेरिटमेंट नहीं कर पायीं क्योंकि उनके लिए सब नया था। वो उनकी जिंदगी का सबसे निराशा से भरा दिन था। हॉस्टल आकर वे खूब रोयीं और घर फोन करके कहा कि मैं आगे पढ़ाई जारी नही रख सकती। उनकी मां ने उनको किसी तरह समझाया। कहा कि अगर तुम वापस आ गयीं, तो गांव की और सभी लड़कियों के लिए हमेशा के लिए रास्ता बंद हो जाएगा। तब सुरभि ने हिम्मत जगाई और उन्होंने संकल्प लिया की चाहे जो हो जाए इंग्लिश पर कमांड करके ही रहेंगी। उस दिन से वे दिन-रात मेहनत करने लगीं और रिजल्ट कुछ ही दिनों में उनके सामने आ गया था।

जीवन भर अच्छे अंक पाने के बावजूद भी उन्होंने कॉलेज में फर्राटे दार English बोलने में दिक्कत का सामना किया। अंग्रेजी ठीक से नहीं बोलने के लिए क्लास में कई बार उनका मजाक उड़ाया गया। लेकिन, फिर भी, उसने उम्मीद नहीं छोड़ी और अपनी सफलता से सबको मुंहतोड़ जवाब दिया। उसने कड़ी मेहनत की और एक ही बार में सबसे कठिन परीक्षा को क्लियर किया।

गांव की टॉपर सुरभि जब स्कूल के बाद कॉलेज में आईं तो उसके सामने कई बड़ी परेशानि थीं। गांव और शहर दोनों जगहों के माहौल में एक बड़ा अंतर था। सुरभि को जो सबसे बड़ी समस्या का सामना करना पड़ रहा था वो थी इंग्लिश। सुरभि की इंग्लिश काफी कमज़ोर थी। उनके कॉलेज में अधिकतर बच्चे इंग्लिश मीडियम स्कूलों से थे और सुरभि हिंदी मीडियम से थीं।

सुरभि के साथ वहीं सब हो रहा था, जो हिंदी मीडियम बच्चों के साथ होता है। लेकिन वो उन आम बच्चों जैसी तो थीं नहीं, कि उनके इंग्लिश फर्राटेदार जैसी हो। उन्होंने उस पर भी जीत हासिल कर ली। सुरभि कहती हैं, मैं गांव में अपनी क्लास में पहली सीट पर बैठने वाली लड़की थी, लेकिन जब शहर में आई तो इंग्लिश न आने की वजह से सबसे पीछे बैठती थी।

मुझे बहुत खराब लगता था। मैं सोचती थी, मैं कहां आ गई। यहां तो मुझे कोई जानता ही नहीं। मेरे लिए ये सबकुछ बहुत नया था, जिसके चलते मैंने खूब मेहनत की। बाकि सबजेक्ट्स के साथ साथ इंग्लिश पर भी अपनी पकड़ बनाई और फर्स्ट सेमिस्टर में ही यूनिवर्सिटी टॉप कर ली और मुझे चांसलर अवॉर्ड मिल गया।

इंग्लिश सुधारने के लिए मैंने बहुत ज्यादा मेहनत की। किताबों से इंग्लिश के वर्ड ढूंढ-ढूंढ कर सीखती थी। रोज़ अंग्रेजी के नये 5-10 शब्द लिखकर दिवारों पर चिपका लेती थी और सुबह उठकर उन्हें देखती थी। सोते समय उन्हें देखती थी और उन शब्दों को उठाकर खुद से बातें करती थी। कोई भी नया अंग्रेज़ी का शब्द सुनने के बाद मन में बार बार रिवाईज़ करती थी। अपनी इन्हीं कोशिशों से मैंने धीरे-धीरे अपनी इंग्लिश सीखी और उसे ग्रामिटिकली इंप्रूव भी किया।

बारहवीं के बाद सुरभि ने स्टेट इंजीनियरिंग का एंट्रेंस की परीक्षा दी। एंट्रेंस एग्ज़ाम में उनके काफी अच्छे नंबर आये, जिससे वो शहर के किसी भी सरकारी कॉलेज में एडमिशन लेने के लिए मान्य हो गईं। सुरभि ने भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन्स में इंजीनियरिंग की। यहां भी उन्होंने टॉप करने की आदत पीछे नही छोड़ी और गोल्ड मेडल हासिल करने के साथ-साथ यूनिवर्सिटी टॉप कर ली।

कॉलेज के बाद सुरभि ने BARC एक साल न्यूक्लियर साईंटिस्ट के तौर पर जुड़ी रहीं, GATE, ISRO अॉल इंडिया दूसरा स्थान मिला, SAIL इस परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर उन्हें कॉल भी आया, MPPSC PRE, SSC LGL, दिल्ली पुलिस और FCI की परीक्षाएं अच्छे नंबरों से क्लियर कीं। 2013 के IES परीक्षा में सुरभि को अॉल इंडिया फर्स्ट रैंक मिली और इन सबके बाद 2016 के IAS परीक्षा में उन्हें अॉल इंडिया 50वीं रैंक मिली। सुरभि की प्रतिभा सभी गांव वालों के लिए गर्व से कम नही थी। उन्होंने हर परीक्षा फर्स्ट अटैंप्ट में ही पास की है, वो भी अच्छे नंबरों कंताबि अपने नाम करती थी।

इंजीनियरिंग कंप्लीट होते ही कॉलेज प्लेसमेंट के समय ही सुरभि को टीसीएस मैं नोकरी मिल गई थी। लेकिन सिविल सर्विसेज की चाहत की वजह से उन्होंने बीच में ही जॉब से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्होंने कई प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की। इस दौरान उनका ISRO, BARC, GTE, MPPSC, SAIL, FCI, SSC और दिल्ली पुलिस जैसे कंपटीशन परीक्षाओं के लिए चयन भी हुआ।

इतना ही नहीं अंग्रेजी की अपनी समस्या को भी उन्होंने धीरे-धीरे दूर कर लिया था। इसके बाद साल 2016 में सुरभि यूपीएससी की परीक्षा (UPSC Exam) में शामिल हुईं। उनहोंने बेहतरीन अंकों के साथ यह परीक्षा पास कर ली और आईएएस अफसर (IAS Officer) बन अपने सपनों को साकार कर लिया।

अंग्रेजी के सीखने की ललक सुरभि (IAS Surabhi Gautam) के ज़ेहन में ऐसी सवार हुई, कि कॉलेज के दिनों से लेकर अब तक उनके सपने हिंदी में आने की बजाय अंग्रेजी में आते हैं। उनकी बातों पर जायें, तो उनके सपनों में लोग हिंदी में नहीं अंग्रेजी में बात करते हैं। कॉलेज के दिनों में सुरभि बाकी के बच्चों की तरह नहीं थी। वो न तो फिल्में देखने जाती थीं और न ही घूमने-फिरने में अपना समय बर्बाद किया करती थीं।

ये सबके करने के लिए उनके सामने पूरी एक उम्र पड़ी थी। पहले वो कुछ बन जाना चाहती थीं। वो जानती थीं, कि वो एक छोटे से गांव से आई हैं और इस तरह कुछ करने का मौका उन्हें अपनी मेहनत के बल पर मिला था। उस मौके को वो गंवाना नहीं चाहती थीं। सुरभि ने कॉलेज के दिनों दोस्तों के साथ समय गंवाने की बजाय अपनी पर्सनेलिटी, अपने बायोडेटा और मार्क्स इंप्रूवमेंट पर फोकस किया। यही उनकी सफलता का सबसे बड़ा हिस्सा रहा।

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