गांव वाले उड़ाते मजाक, जहाँ किसानों ने Kiwi का नाम नहीं सुना, वहाँ ‘कीवी क्वीन’ बन कमातीं हैं लाखों

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Sita Devi Kiwi farming
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Photo Credits: Twitter

Duwakoti, Uttrakhand: किसी भी काम को करने का जुनून होना चाहिए। जुनून ही होसलो को मजबूत बनाने का काम करता है। कामयाबी से दूसरे लोग खुश नही होते बल्कि तुम्हारी गलती निकलना शुरू कर देते है। इसके चलते कई लोग अपने लक्ष्य से पीछे हट जाते है। लोग दूसरों की सफलता देख नही सकते तो उनको कमजोर करने का काम शुरू कर देते है, इतने ताने देते है कि वो इंसान अपने आपको अकेला महसूस करने लगता है। लेकिन उसको ये नही पता होता कि वो ताने नही तुम्हरी जीत की ओर का रास्ता है।

हिम्मत और दृढ़ निश्चय के साथ कोई कार्य किया जाए, तो वह काम असफल कभी नहीं होता। इस बात को एक महिला की मेहनत और जुनून ने सच साबित किया है। कहते हैं कि अगर आप कुछ करने की ठान लें, तो फिर कोई बाधा आपका रास्ता नहीं रोक सकती। इस बात को सच कर दिखाया।

पहाड़ की महिलाएं (Hill Woman) अपनी कर्मठता के लिए जानी जाती हैं। जिन गांवों के युवा नौकरी के लिए परदेस चले गए हैं, उन गांवों को आबाद रखने की जिम्मेदारी पहाड़ की महिलाएं अच्छी तरह निभा रही हैं। ख़ास बात यह है कि, मार्च 2020 में उद्यान विभाग ने उनके बगीचे में एक क़्वींटल कीवी का उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है।

मन मे लिया संकल्प

सीता देवी (Sita Devi) ने कीवी की खेती (Kiwi Farming) करने की ठानी तो उन्हीं के गाँव के कुछ लोग उनके हौसले को तोड़ने की साजिश में जुट गए। उनको सफल नही देखना चाहते थे गांव के लोग। कुछ कहते थे कि ऐसी फसल कहां होती है, जिसे जानवर नुकसान न पहुंचाएं और कुछ का कहना था कि कीवी विदेशी फल (Kiwi Fruit) है, परंपरागत फसलों के क्षेत्र में इसकी पैदावार रंग ही नहीं लाएगी। जब सीता देवी ने विदेशी फल कहे जाने वाले कीवी की खेती परंपरागत फसलों वाले क्षेत्र में शुरू की तो लोगों ने उनका मजाक उड़ाया, फिर भी वह अपने रास्ते पर बनी रहीं और कीवी क्वीन (Kiwi Queen) की कहानी (Story) बेमिसाल हो गई।

गांव की बहू-बेटियों के लिए बनी मिसाल

महिलाओं में से एक हैं नई टिहरी की सीता देवी। सीता देवी अपने खेतों में कीवी की खेती करती हैं, इस विदेशी फल की पैदावार से उन्हें अच्छी कमाई हो रही है। गांव वाले अपनी बहू-बेटियों को उनकी मिसाल देते हैं। गृहणी से सफल किसान बनने तक का सफर सीता देवी के लिए चुनोतियाँ से भरा रहा।

सीता देवी नरेंद्रनगर ब्लॉक में एक गांव है, दुवाकोटी (Duwakoti, Uttrakhand) की रहने वाली है। इस गाँव से उनको बहुत लगाव है। उनका परिवार खेती करता था, पर जंगली जानवर फसल को पूरी तरह बर्बाद कर देते थे। खेती में मुनाफा कही से दिखाई नही देता था। फसल में नुकसान ही होता था, लेकिन परिवार की स्थिति उन्हें खेती छोड़ने की इजाजत नहीं दे रहे थे। साल 2018 में उन्हें पता चला कि उद्यान विभाग कीवी की खेती के लिए योजना चला रहा है।

परंपरागत फसलों वाले क्षेत्र में जब सीता देवी ने विदेशी फल कहे जाने वाले कीवी (Kiwi) की खेती प्रारंभ की तो लोगों ने उनकी फसल का मजाक बनाने लगे। लेकिन उन्होंने अपने हौसलों को टूटने नही दिया। अपने मजबूत होसलो से आगे बढ़ती गई। अपने फैसले पर डाटे रहकर जमकर खेती करना शुरू कर दी, मेहनत रंग लाई और सीता देवी बन गई कीवी क्वीन। उद्यान विभाग ने मार्च 2020 में उनके बगीचे में एक क़्वींटल कीवी का उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है।

जानवरो से थी परेशान

नरेंद्रनगर ब्लॉक के दुवाकोटी गांव निवासी सीता देवी कुछ समय से जंगली जानवरों से फसलों को हानि पहुचाते थे। फसल को बर्बाद होता देख सोचती थी कि अब खेती करने में मुनाफा नहीं है, लेकिन परिवार स्थिति इतनी अच्छी नही थी कि खेती करना छोड़ दें। खेती ही परिवार का जरिया था। उसको करना उनकी मजबूरी थी। लेकिन नुकसान को देखते हुए उन्होंने दूसरी तरकीब निकाली। ऐसी फसल के बारे में अध्ययन किया जिसे जानवरो से ज्यादा नुकसान ना हो सके।

इसी बीच वर्ष 2018 में उद्यान विभाग की कीवी को प्रोत्साहन देने की योजना आई, जिसकी जानकारी सीता देवी को मिली तो उन्होंने कीवी की खेती करने का फैसला लिया। विभाग की ओर से कीवी फसल उत्पादन का अध्ययन लेने के लिए उन्हें हिमाचल प्रशिक्षण के लिए भेजा गया। गांव वाले कीवी का नाम भी नही जानते थे। उन्होंने जैसे ही सुना कि सीता देवी कीवी की खेती करने के लिए प्रशिक्षण ले रही है, तो गांव वालों ने उनका मजाक उड़ाया।

सीता देवी की सफलता से दुवाकोटी समेत क्षेत्र के अन्य किसान भी बहुत प्रेरित हुए हैं। उद्यान वाले इसका क्रेडिट सीता की कड़ी मेहनत और उनके जज्बे को देते हैं। सीता ने कीवी के पौधों की देख रेख बच्चों की तरह की। शायद यही वजह भी थी कि दो साल पहले जिन 45 किसानों को उद्यान विभाग ने पौधे दिए, उनमें से केवल सीता देवी के पौधे ही जीवित बचे।

उनका जुनून इस कदर था कि सिंचाई के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका परियोजना NRLP के अंतर्गत उनके बगीचे में पानी के लिए टैंक बनाए गए, जिनकी क्षमता 15000 लीटर के जल भंडारण की थी। इससे उनकी पानी की परेशानी भी दूर हो गई। पौधे अच्छी तरह बढ़ने लगे और सीता देवी की लग्न और मेहनत रंग लायी।

परिवार वालो ने दिया सीता देवी का साथ

सीता देवी के पति की मैक्स गाड़ी है, जो पहाड़ पर सवारी और माल ढोहने का काम करती है। उनके दो पुत्र हैं। एक का मन पढ़ाई में नही लगता था, उसने पढ़ाई को छोड़कर ड्राइवर बन गया, जबकि छोटा बेटा बारहवीं में पढ़ने के बाद अब कंप्यूटर का प्रशिक्षण ले रहा है। उनका परिवार भी जरूरत पड़ने पर उनके काम में हाथ बंटाता है। परिवार वाले उनकी मेहनत की कद्र करते है उनके होसलो को बढ़ाते है। आज सीता का साथ उनके लिए पूरे टिहरी में गर्व का विषय बना चुका है। हर कोई सीता देवी को देखते ही कीवी क्वीन कहकर पुकारने लगता है, तो उन्हें इस बात पर काफी गर्व का अनुभव होता है।

कीवी से मिली पहचान

सीता देवी का मायका टिहरी जिले के जड़धार गाँव में पड़ता है। सीता देवी ज्यादा पढ़ी नही है। शिक्षा के सीमित संसाधन होने के कारण आगे शिक्षा प्राप्त नही कर पाई। उन्होंने महज हाईस्कूल दसवीं कक्षा तक ही पढ़ाई की है। काम पढ़े होने पर उनको शर्मिंदगी लगती थी लेकिन किस्मत को कुछ ओर ही मंजूर था। जो काम आज शिक्षित लोग करने में सफल नही है वो काम कर दिखाया है सीता देवी ने। आज बड़े बड़े लोग उनका सम्मान करते है।

उनकी मेहनत की मिसाल देते है। लेकिन आज अपनी मेहनत और लगन की वजह से वह बड़ी बड़ी डिग्री वालों से अधिक पैसा कमाने में सफल हो गई है। वह इसे अपना हौसला मानतीं हैं। सीता का सपना था कि वो अच्छी शिक्षा प्राप्त करे। शुरू से ही उनका मन कुछ न सीखने में रुचि रखता था। वह पढ़ लिखकर कुछ बड़ा करने का सपना देखतीं थीं।

जब भी उन्हें पढ़ाई करने का मौका मिलता वेयो उसे छोड़ती नही थी। वह कुछ बड़ा करने में सफल भी होतीं, लेकिन वह 19-20 साल की उम्र में उनकी शादी कर दी गई। शादी होने के बाद उनके सारे सपने पीछे छूट गये। घर-परिवार के चलते उनके तमाम सपने दूर हो गए, लेकिन कीवी उनके लिए खुद को साबित करने का एक रास्ता मिला। इस मौके को वो छोड़ना नही चाहती थी। उन्होंने हार न मानते हुए पूरी जान लगा दी और स्वयं को सफल करके दिखाया।

सफलता का मूलमंत्र

सीता देवी (Sita Devi Kiwi Queen) की कम उम्र में शादी हो जाने के बाद वो अपने सपनो से दूर चली गई। लेकिन मन मे अपने सपनो को जिंदा रखा। उनको टूटने नही दिया। अपनी अलग पहचान बनाने वालीं सीता देवी का यह मानना है कि सफल होने के लिए उम्र नही देखी जाती। सफलता कभी ये नही देखती की आप शादीशुदा हैं या नहीं। महिला हैं या पुरुष हैं। कामयाबी हमेशा कड़ी मेहनत और लगन की मोहताज होती है।

सीता देवी का मानना है कि महिला होना ज्यादा अच्छा है, क्योंकि महिला पुरुष से अधिक मेहनती होती है। एक बार मन में कुछ जिद कर ले, तो उसे करके ही छोड़ती है। महिला अपने जीवन काल में बेटी, पत्नी, मां और सबसे ज्यादा एक औरत के रूप में जितनी जिम्मेदारियों को निभाती है, वह इस बात का परिचय होता है कि उनसे ज्यादा शक्तिशाली और मेहनती कोई नहीं है। उन्हें इसीलिए शक्ति स्वरूपा भी माना गया है। उनका कहना है कि महिलाओं को अपनी शक्ति का उपयोग सही दिशा में कर आगे बढ़ना चाहिए। कभी कमजोर नही बनना चाहिए, जो लोग आपका मजाक उड़ाते है वही लोग एक दिन आप पर गर्व करेंगें।

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