
File Photo
Srikakulam: UPSC परीक्षा का नाम सुनते ही हमारे दिमाग मे एक ही प्रश्न आता है, इसको पास करने के लिए बहुत मेहनत करनी होगी। ये अमीर लोगो के सपने है। लेकिन ये सब गलत है कभी भी मेहनत अमीरी गरीबी नही देखती। मेहनत से आप हर मुश्किल परिस्थिति में भी जीत हासिल कर सकते है, लेकिन उसके लिए एक शर्त है, आपके मन मे उसको पाने की जिद होना चाहिए, जिद ही आपको अपने लक्ष्य तक पहुचने में कामयाब होगी।
आंध्र प्रदेश के गोपाल कृष्णा रोनांकी (Gopal krishna Ronanki) पेशे से एक स्कूल शिक्षक थे। उन्होंने अपनी आर्थिक और सामाजिक स्थिति में सुधार लाने के लिए UPSC सिविल सेवा परीक्षा (Civil Service Exam) देने का फैसला लिया, लेकिन यह सफर उनके लिए मुश्किलों से भरा रहा।
परीक्षा पास करने के बाद उन्हें कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग DoPT की ओर से दिल्ली में 20 टॉपर्स के लिए रखे गए सम्मान समारोह में हिस्सा लेने का निमंत्रण मिला, परन्तु उनके पास हवाई यात्रा करने के लिए पैसे नहीं थे। इस समारोह में उपस्थित दर्ज करने के लिए उन्हें एक दोस्त से पैसा उधार लेना पड़ा। विषम परिस्थिति का डट कर सामना किया।
पेट भरने माता पिता ने किया खेतो में काम
यूपीएससी परीक्षा (UPSC Exam) में तीसरा स्थान (3rd Rank) प्राप्त करने वाले ये प्रतिभाशाली शख्स हैं, गोपालकृष्ण रोनांकी। जिन्होंने 11 साल एक प्राइमरी स्कूल में टीचर की नौकरी की। ये श्रीकाकुलम जिले (Srikakulam city) के पालसा ब्लॉक के परसाम्बा गांव के निवासी हैं। इनके माता-पिता खेतों में काम करने वाले गरीब मजदूर हैं। इनकी आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नही थी। इन्होनें सपना तो देखा था कलेक्टर बनने का, पर घर की आर्थिक परिस्थिति को पूरा करने के लिए इन्होनें एक छोटी नौकरी कर ली और अपने परिवार की हेल्प करने लगे।
मन मे सपना तो था, लेकिन पैसों की कमी ने उन्हें कमजोर कर दिया था। फिर भी उन्होंने अपने सपनो को जीवित रखा। गोपाल ने मुख्य परीक्षा में तेलगू साहित्य को वैकल्पिक विषय रखा और आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में टॉप रैंक प्राप्त की। ये सब कर पाना गोपाल के लिए किसी कहावत को सच कर पाना से कम नही था। ये कहावत तो सुनी होगी लोहे के चने चबाने। क्योंकि गोपाल के पिता एक किसान थे और उनकी आर्थिक स्थिति बहुत खराब रहती थी।
गरीबी ने छीनी अच्छी शिक्षा
रोनांकी अप्पा अपने बेटे को शुरुआती शिक्षा अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में दिलाना चाहते थे। एक पिता का सपना तो होता है कि वो अपने बेटे को अच्छी शिक्षा दे। लेकिन गरीबी उनको ये सब करने नही देती। गरीबी एक ऐसी परिस्थिति है, जिसमे इंसान अपने सपनो को पूरा नही कर पाता। गरीबी इंसान को कमजोर बना देती है। मजबूरन गोपाल का एडमिशन सरकारी स्कूल में करवाना पड़ा।
निराशा लगी हाथ
गोपाल (Gopala Krishna Ronanki) अपने परिवार के सपने को सच कर दिखाना चाहते थे और उन्होंने दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से अपनी ग्रैजुएशन पूरी की। गोपाल से अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को देखकर बहुत निराश हो जाते थे। उनको अपने परिवार के लिए कुछ करना था। जिसके बाद उन्होंने श्रीकाकुलम में स्थित एक स्कूल में पढ़ाना शुरू कर दिया लेकिन सिविल की तैयारी के लिए उचित समय नहीं मिल पाने की वजह से गोपाल को यह नौकरी छोडनी पड़ गई।
Ronanki Gopala Krishna who secured 3rd Rank in All India Civil Services interacted with students of AMC along with Dr.P.V.Sudhakar,Principal pic.twitter.com/mTpU98plSA
— AMC VSP (@amcvsp) June 24, 2017
सपनो को पूरा करना था। होसलो को मजबूत कर आगे कदम बढ़ा दिया। कुछ समय बाद Gopala Krishna Ronanki ने हैदराबाद (Andhra Pradesh) आकर तैयारी करने का फैसला किया। उन्होंने सिविल की तैयारी के लिए कोचिंग सेंटर में पढ़ाई करना चाहा, लेकिन पिछड़े इलाके से आने और पास में पैसों की कमी होने की वजह से किसी भी कोचिंग सेंटर ने उन्हें एडमिशन नहीं दिया।
आईएएस बनी (Became IAS) जिद
मीडिया से बातचीत के दौरान गोपाल ने बताया, मैंने देखा कि मेरे माता-पिता दो वक्त का पेट भरने के लिए बहुत मेहनत करते थे। मैं हमेशा समाज और अपने परिवार की उन्नति के लिए काम करना चाहता था। इसलिए मैंने सिविल सेवा में जाने का निर्णय किया। मैंने कड़ी मेहनत करने लगा और आईएएस अधिकारी बनने की जिद ठान ली। आईएएस अधिकारी (IAS Officer) बनना मेरे लिए हमेशा सपना रहा। यह एक सम्मानजनक सेवा है। मैं आंध्र प्रदेश के शिक्षा क्षेत्र के विकास की दिशा में और काम करना चाहूंगा।
संघर्ष से भरा जीवन
गोपाल के भाई ओधुड़ ने बताया कि घर और अपने इलाके में शिक्षा के संसाधनों का अभाव था। शिक्षा के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नही थे। होशियार बच्चों को आगे की शिक्षा के लिए गाँव से दूर जाना पड़ता था। इन सबके बावजूद उन्होंने किस तरह अपनी पढ़ाई जारी रखी हम सभी जे लिए गर्व की बात है। उन्होंने कभी हिम्मत नही हारी।
I m very proud to say that My friend #Gopal krishna Ronanki got 3rd rank in all india civils 2017 pic.twitter.com/K0XtEJX9Cv
— Sudhakar Banisetti (@iamsudhakarB) June 2, 2017
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में अधिकारी के पद पर कार्यरत ओधुड़ ने बताया, मेरा भाई गोपाल कृष्ण पढ़ाई में बहुत होशियार रहा है। इसलिए एक बार वह सिविल सेवा की तैयारी के लिए एक कोचिंग में गया था। वहां उसका मजाक उड़ाया गया और कहा गया कि वह परीक्षा में कामयाब नहीं हो सकता, क्योंकि वह अंग्रेजी या हिंदी नहीं जानता है, परीक्षा कैसे पास कैसे करेगा।
अपने मजाक को अपना जुनून बना लिया। इसके बाद उसने इस परीक्षा में कामयाबी हासिल करने की जिद बना ली और कड़ी मेहनत अपने समर्पण से इसे कर दिखाया। श्रीकाकुलम जिले के पलासा प्रखंड के परासाम्बा गांव के रहने वाले गोपाल ने तेलुगु माध्यम से इस परीक्षा में कामयाबी हासिल की।
गरीबो के लिए काम करना
गोपाल अखिल भारतीय स्तर पर शीर्ष 20 रैंक में शामिल सिविल सेवा परीक्षा के उन टॉपरों में से हैं, जिन्हें आज केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने सम्मानित किया। अंग्रेजी और हिंदी भाषा बोलने में कठिनाई महसूस करने वाले गोपाल ने बताया कि वह अपने राज्य और देश के दूसरे इलाको में रहने वाले गरीबों के लिए काम करना चाहते हैं।
Congratulations Mr. ronanki gopal Krishna all India 3rd rank in civil services pic.twitter.com/bJ2DdmGdc8
— MANINDRA (@MANINDR41523301) May 17, 2018
गरीब बच्चों को देख उनके मन मे यही खयाल आता था। कि गरीबी इंसान को तोड़ देती है। फिर उन्होंने गरीब बच्चों को शिक्षा देंना का संकल्प कर लिया। उन्होंने उन बच्चों को ट्रेनिंग देनी शुरू की जिनके लिए महंगी कोचिंग के लिए पैसे नही थे। आज अनेक गरीब स्टूडेंट्स को वे सही मार्ग पर चला रहे है। अगर सही प्रयास किया जाये और लगन से पढाई की जाये, तो IAS-IPS बनने के लिए UPSC Exam भी Crack किया जा सकता है।



