कुली का सपना था सूट-बूट पहनना, रेलवे स्टेशन के फ्री WiFi के सहारे पास की PCS परीक्षा

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coolie Sreenath K Story
This coolie Sreenath K cracked the Civil Services with just a phone, earphones and free Wi-Fi. Meet the coolie Sreenath K who used railway WiFi to crack Kerala civil services exam: Success Story Hindi.

File Image

Delhi: जब कभी रेलवे स्टेशन में पढ़ाई की बात होती है, तो उस दृष्यको कोई भी भुला नही सकता जिसमे एक स्टूडेंट ने अपनी गरीबी के चलते रेलवे स्टेशन (Railway Station) की स्ट्रीट लाइट के नीचे बैठकर अपनी पढ़ाई जारी रखी। ऐसा ही अब एक ऐसे स्टूडेंट्स की सक्सेस स्टोरी (Success Story) है, जिसमे उसने रेल्वे स्टेशन के फ्री वाय फ़ाय (Free WiFi) का उपयोग कर अपनी कामयाबी के झंडे गढ़ दिये।

जब कभी सिविल सेवा में पास होने वाले स्टूडेंट्स का जिक्र होता है, तो बड़े ही पढ़ाने वाले और किताबों से घिरे रहने वाले छात्रों की तस्वीर मन में सामने आ जाती है। लेकिन केरल पब्लिक सर्विस कमीशन की परीक्षा पास करने वाला एक स्टूडेंट्स रेलवे स्टेशन पर कुली का काम करता है। केरल के एर्नाकुलम रेलवे जंक्शन पर कुली (Coolie) का काम कर अपना जीवन-यापन करने वाले श्रीनाथ ने इस साल केरल पब्लिक सर्विस कमीशन में कामयाबी हासिल की है।

हैरानी की बात है कि श्रीनाथ (Sreenath K) ने यह कामयाबी सिर्फ अपने फोन (Mobile) और ईयरफोन (Earphone) की सहयता से रेलवे स्टेशन पर मिलने वाली फ्री वाई-फाई सेवा की सहयता से पायी है। श्रीनाथ के पास जब भी फ्री टाइम मिलता उसमे वे रेलवे स्टेशन पर अपने फोन और ईयरफोन की मदद से स्टडी मैटेरियल सुनते रहते थे, जिससे उनकी पढ़ाई नही रुकी काम के साथ पढ़ाई भी जारी रहती थी। श्रीनाथ की मेहनत और लगन का ही परिणाम है कि वह इस साल केरल पब्लिक सर्विस कमीशन की परीक्षा पास करने में कामयाब हो गए हैं।

श्रीनाथ (coolie Sreenath K) केरल (Kerala) की पहाड़ी वादियों में स्थित मुन्नार कस्बे के निवासी हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं थी। गरीबी के चलते परिवार में आर्थिक तंगी इतनी थी कि रहने के लिए ना तो अच्छा घर था और ना ही पेट भरने को खाना मिल पाता था। यही कारण था कि उन्हें एक रेलवे स्टेशन पर कुली का काम करना पड़ता था। वो केरल के एर्नाकुलम ERNAKULAM जंक्शन में कुली का काम करते थे।

श्रीनाथ को बचपन से ही पढ़ने का ललक थी। उन्होंने अपने सपने को काम के साथ बनये रखा, सपने को टूटने नही दिया। परिवार में आर्थिक तंगी के चलते कई स्टूडेंट्स अपनी पढ़ाई से पीछे हट जाते है अपने सपने को पीछे छोड़ आगे दूसरी दुनिया मे निकल पड़ते है। लेकिन कुली का काम करते हुए भी श्रीनाथ अपने सपनो से पीछे नही हाटे। अपने सपनो को पूरा काटने के लिए काम के साथ पढ़ाई भी जारी रखी।

उन्होंने अपने कस्बे के ही एक स्कूल से जैसे तैसे हाईस्कूल तक पढ़ाई की, लेकिन घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नही थी कि वह आगे की पढ़ाई कर सके। और उन्हें मजबूरन रेलवे स्टेशन पर कुली का काम करना पड़ा। उन्होंने बताया कि जब वह सूट बूट पहने बड़े अफसर लोगों को देखते थे या फिर उनका समान उठाते थे तो मेरा भी मन ऑफिसर बनने का करता था।

लेकिन दिन भर काम करने के बाद शाम को वह इतना थक जाते थे कि घर जाकर आराम करने लगते थे। ऐसे में पढ़ाई करना या उसके लिए समय निकालना बहुत कठिन हो जाता था। लेकिन वह अपने सपने को ऐसे ही टूटने नहीं होने देना चाहते थे। इसलिए Kerala Coolie Shrinath दृढ़ संकल्प लिया कि अब वह घर जाकर पढ़ाई जारी रखेंगे।

पैसे की कमी और समय ना होने के कारण वो कहीं भी कोचिंग नहीं join कर सकते थे। इसलिए उन्होंने घर पर नोट्स और जरूरत की किताबे खरीद कर पढ़ाई जारी रखी। उन्होंने हाईस्कूल के बाद आगे की पढ़ाई जारी रखी। कुली हर रेलवे स्टेशन में मिल जाएंगे। रेलवे स्टाफ में अगर इन्हें कंसीडर किया जाए तो इनकी पोजिशन सबसे नीचे होती हैं।

केरल के एर्नाकुलम जंक्शन में 5 सालों से कुली का काम कर रहे श्रीनाथ ने अपनी पढ़ाई के लिए किसी किताब की सहयता नहीं ली। वह काम के साथ-साथ स्टेशन का वाई फाई उपयोग कर वीडियो की हेल्प से पढ़ाई करते थे। उनके पास फोन और ईयरफोन के अलावा और कुछ नहीं था। जानकारी के अनुसार श्रीनाथ तीन बार परीक्षा में बैठ चुके हैं, लेकिन पहली बार उसने अपनी तैयारी के लिए रेलवे के फ्री वाईफाई का उपयोग किया।

स्टेशन पर फ्री वाई-फाई की सहयता से वह फोन में इंटरनेट चला कर लेक्चर देखा करते थे और उसके नोट्स बना लिया करते थे। पढ़ाई के दौरान श्रीनाथ लगातार नौकरियों के भी फॉर्म डाला करते थे। उन्होंने दो बार UPSC का फॉर्म डाल कर उसकी तैयारी की। लेकिन उन्हें यूपीएससी में कामयाबी नहीं मिल सकी। लेकिन श्रीनाथ ने हिम्मत नही हारी वह रात-दिन एक कर पढ़ाई करते और सिविल सर्विस की तैयारी जारी करते रहे, आखिरकार उनकी मेहनत, लगन और संकल्प लें उन्हें साल 2018 में कामयाबी दिला ही दी।

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