बहु ने निभाया बेटे का दायित्व, बीमार ससुर को कंधो पर उठा कर ले गयी हॉस्पिटल

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Bahu ne bimar sasur ko kandhe par uthakar aspatal: Ek number news

Delhi: पिछले डेढ़ साल से महामारी के कारण दुनिया भर में ना जाने क्या क्या देखने को मिला है। ना जाने इस महामारी में कितने लोगों ने अपने करीबी को खो दिया। जहाँ एक कुछ दिल को ओतप्रोत कर देने वाली घटना सामने आई तो कही अच्छी बाते भी देखने को मिली। जो दुसरो के लिए हमेशा के लिए एक मिसाल बन गयी है।

ऐसा ही एक मामला हमारे सामने आया है, जिसे सुन कर हर कोई इस बहादुर महिला की तारीफ करते हुए नही रुक रहा। जिसने भी सुना दिल खोलकर तारीफ की। महामारी के दौर में कई ऐसी सच्ची कहानियां हैं, जो न सिर्फ मिसाल दे रही हैं, बल्कि बुरे समय में कैसे दूसरों के काम आया जाए ये सिखा रही हैं।

एक ऐसी ही कहानी आई है असम के राहा के भाटीगांव से। यहां एक बहू अपने बीमार ससुर को कंधे पर उठाकर अस्पताल ले गई, ताकि उनका इलाज सही वक्त पर हो सके। जानकारी के मुताबिक 75 वर्षीय थुलेश्वर दास का बेटा सूरज शहर में नौकरी करता है। बेटे की ना मौजूदगी में बहू निहारिका ही अपने ससुर की देखभाल करती है।

पिछले दिनों जब थुलेश्वर दास महामारी की चपेट में आ गए थे, तो डॉक्टरों ने उन्हें अस्पताल में एडमिट कराने की सलाह दी थी। घर से हॉस्पिटल का रास्ता कुछ दूरी पर था, निहारिका ने ससुर को ले जाने के लिए लोगों से मदद की उम्मीद की लेकिन किसी ने उसका साथ नही दिया। हर जगह से निराशा ही हाथ लगी थी। जब काफी समय तक उसे निराशा ही हाथ लगी तो उसने खुद ही ससुर को हॉस्पिटल ले जाने का फैसला लिया।

महामारी के दौर में कई कहानियां ने लोगो को तोड़ दिया था। कुछ कहानियों ने नई सीख दी हैं जो न सिर्फ प्रेरणा दे रही हैं, बल्कि बुरे समय में कैसे दूसरों की देखभाल कर ये भी सिखा रही हैं। एक स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारी ने थुलेश्वर को जिला के केयर सेंटर ले जाने के लिए कहा, जबकि निहारिका को ट्रीटमेंट के लिए घर पर रहने का सुझाव दिया गया।लेकिन निहारिका ने अपने ससुर को अस्पताल में अकेला छोड़ने से साफ माना कर दिया।

बहू बेटी ही नहीं बन सकती बल्कि बेटे के दायित्व को भी अच्छे से निभा सकती है। पूर्वोत्तर के राज्य असम की इस बहू ने रिश्तों के प्रति समर्पण की ऐसी मिसाल कायम की है कि हर कोई उसे सलाम कर रहा है। यह बहू अपने महामारी से संक्रमित ससुर को कंधे पर उठाकर अस्पताल ले गई, ताकि उनका ट्रीटमेंट समय पर हो सके। इसके बाद वह स्वयं महामारी की चपेट में आ गई, लेकिन इससे पहले वह सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी थीं रिश्तों के प्रति, कर्तव्य के प्रति श्रद्धा का प्रतीक बन चुकी थी।

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