पानी की कमी होने पर 62 वर्ष के भोलानाथ ने अपने जुनून से अकेले तालाब खोद डाला

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Awesome Story of Water Man of Dhanbad: Farmer Bholanath Dug water Pond. This man dug a pond all by himself.

File Image used

Delhi: धनवाद के महरायडीह गांव में रहते हैं किसान भोलानाथ सिंह। अब 60 वर्ष के हो चुके हैं, लेकिन उत्साह युवक से कम नही है। जिद, जुनून और धुन के पक्के भोलानाथ बोलने से ज्यादा काम करने में भरोसा रखते हैं, इसलिए ज्यादा बातें नहीं करते, अपने काम में लगे रहते हैं।

अपने गांव पहुंच कर उन्होंने देखा कि घर एवं आसपास की महिलाएं करीब दो-तीन किलोमीटर दूर जाकर पानी लाती है। इस घटना से मानो उनके मन में एक व्यथा हलचल उत्पन्न हुई। इसके बाद उन्होंने अपने घर के खलिहान में एक कुआं खोद डाला। अभी तक उनके द्वारा तीन तालाब बनाये जा चुके है। करीब 100 फीट चौड़ा एवं 26 फीट गहरा एक तालाब से गांव के लोग अपने जरूरतों को पूरा करते हैं।

कृषि कार्य में भी तालाब के पानी का उपयोग करते हैं। इसके अलावा भी उन्होंने गांव में ही दो छोटा- छोटा तालाब बनाये है। यहां भी इसमें भी प्रचुर मात्रा में पानी रहता है। खबरों के मुताबिक तन-मन से फौजी दिमाग का भोलानाथ सिंह ने कहा कि जल के बिना जीवन की कल्पना नहीं हो सकती है। जब हमारे गांव की बहू-बेटी को प्रचुर मात्रा में पानी प्राप्त नही होगा उनको पानी लाने के लिए कई किलोमीटर दूर जाना पड़ेगा। तो फिर तरक्की किस बात का।

उन्होंने अपने गांव में पानी का विकट परिस्थिति देखी तो इसका हल खोजने में लग गए। ढाई साल पहले एक दिन बहुत विचार विमर्श कर इस परिणाम पर पहुंचे कि बारिश में व्यर्थ बह जाने वाली पानी को स्टोर कर वह पूरे गांव के किसानों के लिए पानी का इंतजाम कर सकते हैं।

इस पर उन्‍होंने गांव के लोगों से उनकी राय ली, लेकिन लोगों ने उनकी बात पर ध्यान ही नही दिया। इसके बाद भोलानाथ अकेले ही पानी के लिए पसीना बहाने में लग गये। उनके पास खेती लायक थोड़ी जमीन है। इसी के एक हिस्से पर उन्होंने अकेले ही तालाब खोदना स्टार्ट कर दिया।

रोज सुबह घर से कुदाल-फावड़ा लेकर निकलते और दिनभर तालाब खोदने के बाद शाम होते तक घर को निकल जाते। इस बात को जान कई बार घरवालों से लेकर समाज और गांव के लोगों ने उनकी हंसी भी उड़ाई, लेकिन वह अपनी बात पर अड़े रहे।
भोलानाथ ने चार साल 3 महीने की हाड़तोड़ मेहनत कर 1998 में 50 फीट व्यास का तालाब तैयार कर लिया।

तालाब तैयार हुआ तो लोगों ने उनकी मेहनत की खुले दिल से सराहना की। साथ ही उनकी मेहनत और जुनून के कायल हुए। आज फसलों की सिंचाई से लेकर अन्य कार्यों के लिए इस तालाब का उपयोग पूरा गांव करता है। भोलानाथ को इस बात की संतुष्टि रहती है कि उनकी मेहनत काम आई। तालाब की वजह से आसपास का जलस्तर भी पहले से बेहतर हुआ है।

एक तालाब खोदने में सफल होने के बाद भोलानाथ अब अपने खेत में दूसरा तालाब खोदने में जुट गए हैं। इस बार तालाब 100 फीट व्यास का है, लेकिन इसकी खोदाई भी वह अकेले अपने दम पर कर रहे हैं। मकसद यही कि गांव व खेतों में बारिश का पानी व्यर्थ न बह जाए।

जानकारी के मुताबिक भोलानाथ बताते हैं कि ढाई साल पहले 100 लोगों की आबादी वाले इस गांव में पानी की विकट परिस्थिति थी। लोग पानी के लिए तरसते यह। इसके विपरीत बारिश के दिनों में पानी व्यर्थ बहता था। गांव के लोग दो किलोमीटर दूर तालाब पर नहाने जाते व वहां से पानी लेकर आते थे। मैं जब भी ऐसा देखता इस समस्या का को हल निकालने के लिए लग जाता। एक दिन मन में विचार आया कि क्यों न जल को स्टोर कर के रखूं।

इसके बाद 1994 में अकेले ही घर के पास ही एक तालाब की खोदाई करना स्टार्ट कर दी। इस काम मे किसी का साथ नही मिला फिर भी अपने ऊपर भरोसा रख अपने काम मे लग जाते और चार साल तक अपने काम से पीछे नही हटे। कुदाल-फावड़ा चलाते-चलाते हाथों में छाले पड़ जाते थे, तो कुछ दिन छाले ठीक होने का इंतजार करते और ठीक होते ही आपने काम मे फिर लग जाते।

पंचायत प्रधान नाजाद अंसारी ने कहा कि पूरे क्षेत्र के लिए पूर्व फौजी भोलानाथ सिंह एक मिसाल हैं। भोलानाथ सबके लिए एक प्रेरणा का स्त्रोत बन गए। सरकार को इस तरह के लोगों को सम्मानित करना चाहिए। अपनी लग्न और जुनून से ही तालाब खुदाई कर पानी की विकट परिस्थिति का हल निकल कर सभी को प्रेरणा दी।

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