एक महिला प्राइमरी शिक्षिका के IAS अधिकारी बनने का सफर, रोज़ 8 KM पैदल चलकर पढ़ाने जाती थी

0
1151
Seerat Fatima IAS
Primary school teacher Seerat Fatima cracks UPSC exam. Primary School Teacher Cracks UPSC, Makes Father's Dream true. success story ias SEERAT FATIMA Rank 810 in UPSC exam.

Image Credits: Social Media

Delhi: कहते हैं की कलम और ज्ञान की दम पर सब कुछ हासिल किया जा सकता है। इस किस्से में भी कुछ ऐसा ही हुआ। हम बात कर रहे प्रयागराज के जसरा की रहने वाली प्राइमरी शिक्षिका की, जो रोज़ 8 किलोमीटर पैदल चलकर बच्चों को पढ़ाने जाती थी। फिर वापस आकर सिविल सर्विसेज की तैयारी करती थी। बच्चों की शिक्षा को लेकर उनकी लगन और यूपीएससी परीक्षा को लेकर उनकी ललक ने उन्हें IAS अधिकारी बना दिया।

IAS अधिकारी बनकर इस शिक्षिका ने अपने परिवाल का नाम रोशन किया, बल्कि पूरे शिक्षक समाज को भी सम्मानित किया है। सीरत फ़ातिमा (Seerat Fatima IAS) उत्तर प्रदेश में प्रयागराज के जसरा गाँव की रहने वाली है। वे मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता लेखपाल हैं। अपने कई भाई-बहनों में सीरत सबसे बड़ी थीं। इसलिए उनके ऊपर काफी जिम्मेदारियां थी।

फ़ातिमा एक ऐसे गाँव से है, जहाँ लोग पढ़ाई लिखाई पर बहुत कम ध्यान देते हैं और लड़कियों की शिक्षा पर कोई ख़ास ध्यान नहीं दिया जाता है। फ़ातिमा बचपन से ही पढ़ाई लिखाई में काफी तेज थी। उनको अपने छोटे भाई-बहनों की भी देखभाल करनी होती थी। घर की परीस्थिति इतनी अच्छी नही थी कि उनके घर वाले उनको शहर पढ़ने के लिए भेज पाते हालांकि फ़ातिमा (Seerat Fatima IAS) ने सारी परेशानियों और जिम्मेदारियों के बीच अपनी पढ़ाई जारी रखी।

उन्होंने गांव से ही बाहरवीं की परीक्षा पास की। फिर साइंस से ग्रेजुएशन किया। उनके पिता ने भी पढ़ाई पूरा समर्थन किया। फ़ातिमा की पढ़ाई के प्रति लगन देखकर उनके पिता बहुत खुश रहे थे। फातिमा एक हिंदी अखबार को बताती हैं कि उनके पिता की इच्छा थी कि उनकी बेटी एक दिन बड़ी अफसर बने। सीरत के पिता जब लेखपाल की नौकरी कर रहे थे, तब उन्हें शुरुआती दिनों में अधिकारियों की डांट झेलनी पड़ती थी।

शीरत के पिता Media में बताते हैं कि उन्हें अधिकारियों का ये बर्ताव बिलकुल पसंद नहीं आता था। उन्हें अधिकारियों के इस रवैये से बहुत गुस्सा आता था। अफसरों की मनमानी भरी बातें सुनकर सीरत के पिता ने ठान लिया था कि वो अपने बच्चों को अधिकारी बनाएंगे। एक ऐसा काबिल अधिकारी जो छोटे पद पर कार्यरत लोगों का भी सम्मान करे।

फातिमा ने साइंस से ग्रेजुएशन करने के बाद B.Ed करने का निर्णय किया, क्योंकि आईएएस की तैयारी में उन्हें काफी समय लग सकता था और वह कुछ ऐसा करना चाहती थी जिससे घर की आर्थिक स्थिति में कुछ मदद हो सके। इसलिए उन्होंने प्राइमरी स्कूल में शिक्षिका बनने का निर्णय लिया। इससे उनकी आर्थिक स्थिति में कुछ बदलाव आया और अब वह फ्री होकर IAS की तैयारी कर सकती थी।

फातिमा का यह सफर यहीं नही रुका। शिक्षिका बनने के बाद भी उनको काफी संघर्ष करना पड़ा। वह रोज़ घर से 8 किलोमीटर पैदल जाकर स्कूल में बच्चों को पढ़ाती थी। उसके बाद आकर खुद से आईएएस की तैयारी हुए अपनी पढाई करती थी। इसी प्रकार उन्होंने कई महीने पढ़ाई और शिक्षण की नौकरी की।

फातिमा ग्रेजुएशन करने के बाद से ही आईएएस की तैयारी में लग गई। उनकी मेहनत औऱ लगन सफल सही दिशा में चल रही थी। उन्होंने आईएएस का एग्जाम पास भी किया और साबित कर दिया की परिस्थितियां कैसी भी हो कभी दिक्कतों से घबराना नहीं चाहिए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here