रेलवे ने नौकरी से मना किया, फिर UPSC टॉप कर बनीं पहली नेत्रहीन IAS अधिकारी

0
1272
IAS Pranjal Patil Success Story
IAS Pranjal Patil Success Story. Blind IAS officer Pranjal Patil story. A Blind female student have cracked UPCS exam: Ek Number News

Image Credits: Twitter

Bhopal: कहते है ना की सफलता किसी की मेहताज़ नहीं होती है। आंखों को मानव जीवन का सबसे अनमोल अंग कहा जाता है। ऐसे में जिस शख्स को आँखों की रौशनी नहीं होता है, उसे ही इनके ना होने का दर्द हमेशा अंदाजा होता। ऐसे में बिना आंखों के देश की सबसे कठिन परीक्षा में सफलता पाना अपने आप में हैरान करता है। हालांकि कड़ी मेहनत और एकाग्रता से लक्ष्य की ओर बढ़ने वाले शख्स के लिए ये भी बड़ी बात नहीं लगती है।

यह कहानी एक ऐसी महिला की हैं, जो देश की पहली नेत्रहीन महिला आईएएस (IAS Pranjal Patil) अधिकारी बन गई हैं। उनका नाम प्रांजल पाटिल है। जहाँ इस परीक्षा में अधिकतर लोग सफल नहीं हो पाते हैं, ऐसे में प्रांजल ने नेत्रहीन होते हुए ना सिर्फ इस परीक्षा में सफलता पाई, बल्कि उन्होंने दो बार इस परीक्षा को पास किया और अच्छी रैंक भी प्राप्त की।

महाराष्ट्र के छोटे से शहर उल्लास नगर की रहने वाली प्रांजल पाटिल को बचपन से ही पढ़ाई का बहुत शौक था। पहले बचपन में प्रांजल की आंखें एकदम ठीक थी। लेकिन एक हादसे ने उनकी जिंदगी बदल दी। जब वो 6वीं कक्षा में पढ़ाई कर रही थी, तब उनकी क्लास की एक स्टूडेंट ने गलती से प्रांजल की आंख में पेंसिल घुसा दिया। इस दुर्घटना में उनकी एक आंख खराब हो गई थी।

इस घटना से वो निकल भी नहीं पाईं थी कि एक साल के अंदर ही उनकी दूसरी आंख की रोशनी भी चली गई। दोनों आखों की रोशनी जानें के बाद वो पूरी तरह से टूट चुकी थीं। फिर हिम्मत जुटाकर खुद को संभालते हुए उन्होंने अपनी पढ़ाई आगे ज़ारी रखी। आखिर में उनकी मेहनत रंग आई और सफलता की सीढ़ी चढ़ी।

उन्होंने दूसरों पर बोझ बनने की बजाय आत्मनिर्भर होना स्वीकार किया। आखों की रोशनी का दर्द भुलाकर उन्होंने ब्रेन लिपि के माध्यम से पढ़ाई करने का दूसरा विकल्प चुना। बचपन में जिस लगन के साथ प्रांजल पढ़ाई करती थी, उसी लगन के साथ उन्होंने तरीका बदलकर पढ़ाई करना शुरू कर दिया।

https://twitter.com/Tris_0580/status/1385959603930759173

अपनी पढ़ाई के लिए प्रांजल ने टेक्नोलॉजी का सराहा लिया। इसमें उन्होंने एक विशेष सॉफ्टवेटर की सहायता से पढ़ाई करना शुरू कर दिय। इस सॉफ्टवेयर में खासियत थी कि ये किताबों को पढ़-पढ़कर सुनाता था। इस सॉफ्टेवयर में वो किताबों को स्कैन कर देती थी, जिसके बाद ये उनके लिए पढ़कर सुनाने लगता था।

इसकी मदद से उन्होंने अपनी UPSC की तैयारी पूरी की। प्रांजल एक अखबार को बताती हैं कि उन्हें इस तरह से पढ़ाई करने में काफी दिक्कत होती थी, लेकिन सफलता की राह में उन्हें ये मुश्किलें तो झेलनी ही थी। इतनी मुश्किल से पढ़ने वाली प्रांजल ने दोबारा साल 2017 में प्रयास किया और 124 वीं रैंक के साथ परीक्षा पास कर ली। उन्होंने जो सोचा था, उसे पूरा करके आज सफल हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here