94 साल की दादी खुद कमाती है लाखों रुपये, इनकी बनाई बर्फियां खूब बिक रही है, सफलता उम्र की मोहताज़ नहीं

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Harbhajan Kaur Barfi
Meet Harbhajan Kaur, the 94-years-old 'Young Entrepreneur' Smiling face with heart-shaped eyes Age is just a number proved by a grandmother from Chandigarh who began her journey of becoming an entrepreneur four years ago at the age of 90, she sells homemade besan ki barfi and pickles.

Photo Credits: Twitter

Delhi: किसी ने ठीक ही कहा है की काम करने की कोई उम्र नहीं होती है। अगर कोई काम सही दिशा में और लगन से किया जाये, तो सफलता तो निश्चित है। यहाँ बात हो रही है 94 साल की हरभजन कौर की। इन दादी के अपने हाथों से बनाई बेसन बर्फी चंडीगढ़ के साप्‍ताहिक ऑर्गेनिक मार्केट में खूब बिक रही हैं। करीब तीन साल पहले उन्‍होंने बर्फी बेचकर अपनी जिंदगी की पहली कमाई की थी, जो आज लाखों में हो रही है।

हरभजन कौर पंजाब में अमृतसर के के पास तरन-तारन में जन्‍मी थी। फिर शादी के बाद अमृतसर, लुधियाना रही और लगभग 10 साल पहले पति की मृत्यु के बाद वे कुछ समय से अपनी बेटी के साथ चंडीगढ़ में रहने लगी। एक दिन बेटी ने बांटों ही बांटों में उनके दिल की थाह लेनी चाही और पूछ लिया “कोई मलाल तो नहीं न है आपको, कोई चाहत तो बाकी नहीं, कहीं आने-जाने या कुछ करने-देखने की इच्‍छा बाकी हो तो बताओ।” बस यही वो दिन था।

वे इस सवाल का इंतज़ार ही कर रही थी। उन्होंने कहा की मैंने इतनी लंबी उम्र गुज़ार दी और एक पैसा भी नहीं कमाया। माँ की बात पर बेटी ने सवाल किया की आप क्या कर सकती हो, कैसे कमाना चाहोगी वो पहला रूपया। इस सवाल का उत्तर मां ने कहा की ”मैं बेसन की बर्फी बना सकती हूँ। घर में धीमी आंच पर भुने बेसन की मेरे हाथ की बर्फी को कोई तो ख़रीददार मिल ही जायेगा।” बस फिर शुरूआत हुई एक बड़े व्यापर की।

वही के नज़दीकी सैक्‍टर 18 के ऑर्गेनिक मार्किट से परिवार वालों ने संपर्क किया और वहां से मिला 5 किलो बेसन बर्फी का पहला ऑर्डर। परिवार वालों ने सोचा की माँ को कुछ अच्छा लगा होगा। लेकिन वो तो अब अपने इस काम को आगे बढ़ाने की मन बना बैठी थी। कुछ ही समय में मुहल्ले-पड़ोस, परिचितों तक बर्फी की मिठास पहुंचने लगी और हरभजन कौर ऑर्डर पर अपने घर की रसोई में और कई चीज़ें भी बनाने लगी, जैसे मिठाई, बादाम का शरबत, लौकी की आइसक्रीम, दाल का हलवा, टमाटर चटनी, अचार और अन्न। अब माँ की ऑर्डर लिस्‍टऔर भी लम्बी हो गई।

अब बुढ़ापे के इस दौर में ऑर्डर पूरा करने की रफ्तार धीमी होती है, मगर इस ज़ायके का लाज़वाब स्‍वाद हर कोई चखना चाहता है और लाइन लगी रहती है। दादी सारा काम खुद ही करती है। घर में काम के लिए आने वाली सहायिका या बेटियों-नातिन को कुछ भी छूने या हाथ बंटाने की भी छूट नहीं होती।

जिस बेसन बर्फी के दम पर हरभजन कौर ने इस उम्र में यह काम शुरू किया है उसे बनाना उन्‍होंने अपने पिता से सीखा था, मतलब करीब सौ साल पुरानी रेसिपी का स्‍वाद आज भी कायम है। अपनी कुछ रेसिपी वे अपने शैफ नाती को सौंप चुकी है, जो अपने रेस्‍टॉरेंट में पंजाब की इस खान-पीन विरासत को हमेशा के लिए सुरक्षित कर चुका है।

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