एक बेटे ने पैदल ही कांवड़ पर बैठा कर अपने माता पिता को गाजियाबाद से हरिद्वार दर्शन करवाये

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Shravan Kumar of Kaliyuga
Shravan Kumar of Kaliyuga: Son brought his parents from Ghaziabad to Haridwar on foot after sitting in palanquin.

Ghaziabad: कहते है हर जगह भगवान नही रह सकते इसलिए भगवान ने माता पिता बनाए। दुनिया का सबसे पवित्र रिश्ता माता पिता का अपने बच्चो से होता है। जब भी बच्चो को कोई तकलीफ होती है, तो मां को सबसे पहले पता चलता है और पिता उस तकलीफ की ढाल बन जाते है।

एक मां जिंदगी और मौत से लड़कर अपने बच्चे को जन्म देती है, उसके बाद जब तक वो चलना नही सीखता तब तक उसे अपने सीने से लगा कर रखती है। बड़ा होने पर पिता अपने बच्चे की हर जरूरत पूरी करते है। वे कभी अपने बच्चे को किसी चीज को कमी नही होने देना चाहते। माता पिता का दर्जा भगवान से भी ऊंचा है।

माता पिता अपने बच्चे से जुड़े सभी फर्ज पूरे करते है, तो बच्चो का फर्ज भी माता पिता (Mother Father) के लिए होता है। बच्चे माता पिता का बूडपे का सहारा होता है। परंतु कुछ बच्चो को अपने माता पिता बोझ लगते है, तो वे उन्हे वृद्ध आश्रम छोड़ आते है मां बाप का त्याग वे भूल जाते है।

हम सब ने रामायण में श्रवण कुमार की गाथा सुनी थी वर्तमान में देखने भी मिल गई। आपको बता दें विकास गहलोत नाम के एक शख्स ने कांवड़ मेले (Kanwar Mela) में श्रवण कुमार (Shravan Kumar) की तरह अपने माता-पिता को गंगा स्नान करवाकर हरिद्वार के लिए निकल गया। आइए विस्तार से जानते है पूरे माजरे को।

भक्ति का एक नया रूप

हम जानते है कि कांवड़ मेला श्रद्धालुओं के लिए यात्रा धर्म, आस्था, श्रद्धा, विश्वास, भक्ति संग आध्यात्मिक शक्ति के लिए एक खास पर्व है। कावड़ मेला यात्रा श्रद्धालुओं के लिए काफी खास मोका होता है वे इस मेले को बहुत ही अच्छे से एंजॉय करते है। कावड़ लेकर जाने वाले लोगो को संख्या बहुत ज्यादा है।

श्रावण मास जो सभी माह में सबसे ज्यादा पावन माह है, इस महीने के दो हफ्तों तक चलने वाली कावड़ यात्रा में भक्त की धार्मिक मान्यताओं और रीति रिवाज के मुताबिक कांवड़ में गंगाजल लेकर अपनी मंजिल तक जाते हैं।

इन्ही सब के बीच एक ऐसे बेटा भी देखने मिला, जो अपने माता पिता को ही ईश्वर मानता है। वो बेटा अपने माता-पिता को कावड़ यानी पालकी पर बैठाकर पैदल हरिद्वार गए। उनके माता-पिता उनका दर्द न देख सके इसलिए उसे छुपाने के लिए उन्होंने अपने माता पिता की आंखों पर एक कपड़ा बांध दिया।

वर्तमान का श्रवण कुमार

उत्तर प्रदेश राज्य के गाजियाबाद शहर के विकास गहलोत गर्मी के मौसम में मीलों का रास्ता तय करके भगवान शिव के जलाभिषेक करने के लिए जिस तरह पहुंचे उन्हे देख सभी ने उनकी भक्ति और आस्था की सराहना की।

आपको बता दें गाजियाबाद जिले के एक कस्बे करीमपुर के रहने वाले 24 वर्षीय युवा विकास गहलोत ने सावन के महीने में माता-पिता को गंगा स्नान करवाने के लिए हरिद्वार लेकर पहुंचे। गंगा स्नान के पश्चात कावड़ जल लिए अपने माता पिता को पालकी पर बैठाकर अपनी मंजिल की तरफ निकल पड़े।

विकास (Vikas Gehlot) ने पालकी को बांस की जगह लोहे से बनवाया था। एक तरफ मां और दूसरी तरफ पिता को बैठा कर कंधो पर उस पालकी को उठा कर यात्रा की। पिता अपने साथ 20 लीटर गंगाजल से भरा कैन रखें हुए है।

विकास गहलोत बताते है कि उनके माता-पिता ने कावड़ यात्रा करना चाहते थे, परंतु अब माता-पिता की उम्र इस बात की इजाजत नहीं देती की वे पैदल चल कर यह यात्रा कर सके। जिसके बाद विकास ने पिता की इच्छा का मान रखते हुए उसका विकल्प निकाल। विकास श्रवण कुमार की तरह चल कर गाजियाबाद से अपने लक्ष्य तक पहुंचे।

माता पिता की आंखों पर है भगवा रंग का कपड़ा

विकास जब अपने माता पिता को पालकी पर बैठा कर ले जा रहे थे, उस वक्त उन्होंने उनकी आंखो पर भगवा रंग का कपडा बांध दिया था। जिससे उनके माता पिता बेटे के कंधे का दर्द न देख सके और उन्हे तकलीफ न हो।

विकास चाहते है की उनके माता पिता भावुक न हो सकें और उनकी यात्रा सफलता पूर्वक पूर्ण हो जाए। बीच-बीच में पालकी को अन्य लोग भी सहारा देते है, उनके साथ और दो लोग चल रहे है विकास कहते है कि उसके माता-पिता उसके लिए ईश्वर है।

तीनो मार्ग पर कारवाड़ियो की उमड़ी भीड़

गर्मी के साथ बारिश के मौसम में कई मील दूर से पैदल यात्रा कर रहे विकास गहलोत की शक्ति और अपने माता पिता की भक्ति के लिए हर कोई उनकी सराहना कर रहा है। जानकारी के अनुसार हरिद्वार से लेकर रुड़की, नारसन तक के बाईपास हाईवे कांवड़ पटरी पूरी तरह शिव भक्तों से भरी हुई है। चारो तरफ शिव जी के जयकारे गूज रहे है।

सावन के सोमवार में तीनों मार्गों पर कांवड़ियों की भीड़ लगी हुई है। प्रातः काल से ही शिव भक्त अपने पैरो में घुंघरू बांधकर कांधे पर कांवड़ रख भोले बाबा का गुणगान करते हुए चले जा रहे थे। दोपहर की तेज गर्मी के कारण वे थोड़े समय के लिए रुक गए उसके बाद शाम से एक बार फिर कावड़ियों का सैलाब देखने मिला। शिव भक्ति में मग्न भक्त नाचते गाते हुए कांवड़िए अपनी मंजिल के लिए निकल पड़े। हर कोने पर पुलिस भक्तों की रक्षा के लिए तैनात की गई थी। जिससे कही कोई परेशानी ना हो।

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